ओरछा/भोपाल। मध्य प्रदेश में गुरुवार को मतदान के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सीमा संवेदनशील हो गई है। सीमा पर स्थित पर्यटन केंद्र ओरछा में बीते दो दिनों से पुलिस अफसरों के फोनों की घंटियां लगातार बज रही हैं। ज्यादातर शिकायतें उत्तर प्रदेश से सीमा पार कर आ रही अवैध शराब, हथियारों से लैस अपराधियों व मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए बंट रहे नोटों की है। उत्तर सीमा पर मध्य प्रदेश पुलिस खास नजर रखे हुए है।
ओरछा कस्बे में कई घरों की तलाशी पुलिस ले चुकी है और आने-जाने वाले वाहनों पर उसकी कड़ी नजर है। बड़ी मुश्किल से इक्का-दुक्का वाहन ही सीमा पार कर जा पा रहे हैं। हालत यह है कि पर्यटकों से भरे रहने वाले ओरछा में फिलहाल सैलानियों से ज्यादा पुलिस के जवान हैं। उस पर भी भाजपा नेताओं को अपने शासन वाली मध्य प्रदेश पुलिस नहीं, बल्कि गुजरात पुलिस पर ज्यादा भरोसा है।
जी हां, भरोसा नहीं होता तो एक बानगी देखिए। टीकमगढ़ से ओरछा के रास्ते में पृथ्वीपुर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार सुनील नायक से यह संवाददाता बात कर रहा था। उसी समय भाजपा कार्यकर्ता सूचना देते हैं कि क्षेत्र में कई सशस्त्र असामाजिक तत्व व अवैध शराब पहुंच चुकी है। नायक फोन पर कुछ अधिकारियों से बात करते हैं और उन्हें गांवों व स्थानों के बारे में बताते है। साथ ही अनुरोध करते हैं कि इस क्षेत्र में गुजरात से आए पुलिस बल को तैनात किया जाए।
मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है, लेकिन नायक को प्रदेश की पुलिस पर भरोसा नहीं है। उन्हें लगता है कि वह दबाव में आ सकती है। राज्य में चुनाव प्रचार खत्म होते ही मध्य प्रदेश की सीमाएं सील कर दी गईं हैं। उत्तर प्रदेश से मध्य प्रदेश में प्रवेश करने में कड़ी सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ रहा है। ओरछा से दतिया के बीच में झांसी है, इसलिए दो बार सीमाओं से गुजरना पड़ता है।
दतिया जिले में मुकाबला तो भाजपा व कांग्रेस में ही है, लेकिन रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी पूरे प्रदेश में केवल यहीं सबसे ज्यादा प्रभावी है। पासवान खुद बीते एक साल में यहां के आधा दर्जन दौरे कर चुके हैं। मांडेर सीट पर उसके प्रदेश अध्यक्ष फूल सिंह बरैया ने भाजपा व कांग्रेस की मुसीबतें बढ़ाई हुई हैं। दतिया शहर की सीट पर प्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्र को कांग्रेस व बसपा ने घेर रखा है। पूर्व सिंधिया रियासत के इस क्षेत्र को कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य ने प्रतिष्ठा की लड़ाई बनाया हुआ है।
गुरुवार, 27 नवंबर 2008
आज उम्मीदवारों का भाग्य लिखेगा मतदाता
भोपाल। हंग असेंबली की आशंकाओं के बीच मध्यप्रदेश का मतदाता गुरुवार 27 नवंबर को 13 वीं विधानसभा का भाग्य लिखेगा। कड़े सुरक्षा बंदोबस्त के बीच सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक होने वाले मतदान में कौन सिरमौर बनेगा, आठ दिसंबर को आने वाले नतीजे बताएंगे। प्रदेश में इस बार भी मुख्य मुकाबला सत्तासीन भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच है, लेकिन उमा भारती की भाजश, मायावती की बसपा तथा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी सहित अन्य छोटे दल भी अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में हैं।
प्रदेश के सभी 230 क्षेत्रों में शांतिपूर्ण व निष्पक्ष मतदान कराने के लिए पुख्ता सुरक्षा प्रबंधों के साथ ही सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राज्य निर्वाचन कार्यालय के सूत्रों के अनुसार गुरुवार सुबह आठ बजे से 47 हजार 209 मतदान केंद्रों पर मतदान शुरू हो जाएगा, जो शाम पांच बजे तक चलेगा। राज्य के चुनावी समर में उतरे 1369 निर्दलीयों समेत 3179 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में बंद हो जाएगा। कुल प्रत्याशियों में 196 महिलाएं और 2983 पुरूष शामिल हैं।
प्रदेश में 1,71,63,358 महिलाओं समेत 3,62,79,173 मतदाता मताधिकार का उपयोग कर सकेंगे। मतदान के लिए फोटोयुक्त मतदाता परिचय पत्र आवश्यक किया गया है, लेकिन जिन मतदाताओं को परिचय पत्र नहीं मिल पाए, वह निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित 13 वैध दस्तावेजों के आधार पर वोट डाल सकेंगे।
आयोग का दावा है कि राज्य में लगभग 94 प्रतिशत मतदाताओं को फोटोयुक्त परिचय पत्र जारी किए जा चुके हैं। तेरहवीं विधानसभा के इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के 228- 228 प्रत्याशी मैदान में हैं। बसपा के 228,
समाजवादी पार्टी के 187 भारतीय जन शक्ति के 197, शिवसेना के 29, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के 21, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के 14, राष्ट्रीय जनता दल के चार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दो और अन्य दलों के 672 प्रत्याशियों की किस्मत दाव पर लगी है। प्रदेश के 47 हजार 209 मतदान केंद्रों पर एक लाख 88 हजार से अधिक कर्मचारियों को मतदान संबंधी कार्य संपन्न कराने के लिए तैनात किया गया है। बारह हजार से अधिक मतदान केंद्र संवेदनशील माने गए हैं। सुरक्षा के लिए 262 कंपनियों को तैनात किया गया है। नक्सली बहुल बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जिलों के अलावा उत्तरप्रदेश की सीमा से लगे डकैत प्रभावित ग्वालियर-चंबल, सागर और रीवा संभाग के जिलों की सीमाओं को सील करने के साथ पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सके।
प्रदेश के सभी 230 क्षेत्रों में शांतिपूर्ण व निष्पक्ष मतदान कराने के लिए पुख्ता सुरक्षा प्रबंधों के साथ ही सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राज्य निर्वाचन कार्यालय के सूत्रों के अनुसार गुरुवार सुबह आठ बजे से 47 हजार 209 मतदान केंद्रों पर मतदान शुरू हो जाएगा, जो शाम पांच बजे तक चलेगा। राज्य के चुनावी समर में उतरे 1369 निर्दलीयों समेत 3179 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में बंद हो जाएगा। कुल प्रत्याशियों में 196 महिलाएं और 2983 पुरूष शामिल हैं।
प्रदेश में 1,71,63,358 महिलाओं समेत 3,62,79,173 मतदाता मताधिकार का उपयोग कर सकेंगे। मतदान के लिए फोटोयुक्त मतदाता परिचय पत्र आवश्यक किया गया है, लेकिन जिन मतदाताओं को परिचय पत्र नहीं मिल पाए, वह निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित 13 वैध दस्तावेजों के आधार पर वोट डाल सकेंगे।
आयोग का दावा है कि राज्य में लगभग 94 प्रतिशत मतदाताओं को फोटोयुक्त परिचय पत्र जारी किए जा चुके हैं। तेरहवीं विधानसभा के इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के 228- 228 प्रत्याशी मैदान में हैं। बसपा के 228,
समाजवादी पार्टी के 187 भारतीय जन शक्ति के 197, शिवसेना के 29, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के 21, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के 14, राष्ट्रीय जनता दल के चार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दो और अन्य दलों के 672 प्रत्याशियों की किस्मत दाव पर लगी है। प्रदेश के 47 हजार 209 मतदान केंद्रों पर एक लाख 88 हजार से अधिक कर्मचारियों को मतदान संबंधी कार्य संपन्न कराने के लिए तैनात किया गया है। बारह हजार से अधिक मतदान केंद्र संवेदनशील माने गए हैं। सुरक्षा के लिए 262 कंपनियों को तैनात किया गया है। नक्सली बहुल बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जिलों के अलावा उत्तरप्रदेश की सीमा से लगे डकैत प्रभावित ग्वालियर-चंबल, सागर और रीवा संभाग के जिलों की सीमाओं को सील करने के साथ पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सके।
सोमवार, 10 नवंबर 2008
मैदानी स्तर तक जुड़ेंगे चुनाव आयोग के तार
भोपाल। प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान के दिन बगैर अवरोध के मैदानी स्तर से चुनाव आयोग तक सूचना संप्रेषण का जाल बिछाया जा रहा है। इस सिलसिले में सारे जिला कलेक्टरों को इत्तेला करके तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है।
इस बार के चुनाव में सूचनाओं के आदान-प्रदान का ऐसा ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिससे कोई भी जानकारी विभिन्न स्तरों से गुजर कर आयोग के पास तत्काल पहुंच जाए। इस संचार व्यवस्था का माध्यम लैंडलाइन फोन, मोबाइल, फैक्स और वायरलैस बनेंगे। इससे मतदान केन्द्र के करीबी थाने या चौकी से लेकर संबंधित जोनल अफसर, सेक्टर मजिस्ट्रेट, मतदान केन्द्र के करीब रहने वाले भरोसेमंद व्यक्ति तथा जिला निर्वाचन अधिकारी, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और आयोग तक के तार आपस में जुड़ जाएंगे।
मतदान के दिन सबसे पहला काम यह होगा कि मॉक पोल का सíटफिकेट सुबह साढ़े आठ बजे तैयार करके भारत निर्वाचन आयोग को उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद निर्धारित अंतराल पर मतदान की विस्तृत रिपोर्ट मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और निर्वाचन आयोग तक पहुंचाई जाएगी। संचार तंत्र जुड़ाव की इस योजना का इस्तेमाल मतदान केन्द्रों, रूट चार्टो और चुनाव की अन्य तैयारियों में भी होगा। प्रशासकीय तौर पर विभिन्न स्तरों पर प्रत्येक दो घंटे के अंतराल से कुल मतदान प्रतिशत, महिला और पुरुष मतदाताओं की संख्या का ब्यौरा इस संचार योजना का हिस्सा होगा। रिटìनग अफसरों द्वारा आयोग को भेजी जाने वाली तयशुदा वैधानिक रिपोर्ट मतदान के दिन दोपहर एक बजे और शाम पांच बजे और दूसरे दिन सुबह सात बजे फैक्स के जरिए भेजी जाएगी।
इसकी एक प्रति जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को अनिवार्य तौर पर दी जाएगी। मतदान समाप्त होने के बाद कुल मतदान प्रतिशत एवं संख्या, किसी घटना या दुर्घटना, मतदान में खलल, ¨हसा, मतदान प्रक्रिया बिगाड़ने की जानकारी भी इन संचार माध्यमों से तत्काल दी जाएगी। इसके अलावा वह सूचना भी दी जाएगी, जिसे वरिष्ठ स्तर पर बताई जाना जरूरी है। योजना का दूसरा हिस्सा वरिष्ठ स्तरों से आने वाले ऐसे निर्देशों और आदेशों का होगा, जिन पर मैदानी अफसरों को तत्काल अमल करना है। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर टीमें गठित की गई हैं। रिटìनग अफसर की कम्युनिकेशन टीम तयशुदा वक्त में अपना काम पूरा कर जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की टीम को इसकी सूचना देगी, जिसे फिर भारत निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। कम्युनिकेशन प्लान से जुड़ने वाले सभी संपर्क नंबरों, व्यक्तियों, स्थानों की चे¨कग कर एक बार पूर्वाभ्यास 10 से 17 नवंबर के बीच और फिर दूसरी बार 18 से 25 नवंबर के बीच होगा।
इस बार के चुनाव में सूचनाओं के आदान-प्रदान का ऐसा ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिससे कोई भी जानकारी विभिन्न स्तरों से गुजर कर आयोग के पास तत्काल पहुंच जाए। इस संचार व्यवस्था का माध्यम लैंडलाइन फोन, मोबाइल, फैक्स और वायरलैस बनेंगे। इससे मतदान केन्द्र के करीबी थाने या चौकी से लेकर संबंधित जोनल अफसर, सेक्टर मजिस्ट्रेट, मतदान केन्द्र के करीब रहने वाले भरोसेमंद व्यक्ति तथा जिला निर्वाचन अधिकारी, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और आयोग तक के तार आपस में जुड़ जाएंगे।
मतदान के दिन सबसे पहला काम यह होगा कि मॉक पोल का सíटफिकेट सुबह साढ़े आठ बजे तैयार करके भारत निर्वाचन आयोग को उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद निर्धारित अंतराल पर मतदान की विस्तृत रिपोर्ट मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और निर्वाचन आयोग तक पहुंचाई जाएगी। संचार तंत्र जुड़ाव की इस योजना का इस्तेमाल मतदान केन्द्रों, रूट चार्टो और चुनाव की अन्य तैयारियों में भी होगा। प्रशासकीय तौर पर विभिन्न स्तरों पर प्रत्येक दो घंटे के अंतराल से कुल मतदान प्रतिशत, महिला और पुरुष मतदाताओं की संख्या का ब्यौरा इस संचार योजना का हिस्सा होगा। रिटìनग अफसरों द्वारा आयोग को भेजी जाने वाली तयशुदा वैधानिक रिपोर्ट मतदान के दिन दोपहर एक बजे और शाम पांच बजे और दूसरे दिन सुबह सात बजे फैक्स के जरिए भेजी जाएगी।
इसकी एक प्रति जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को अनिवार्य तौर पर दी जाएगी। मतदान समाप्त होने के बाद कुल मतदान प्रतिशत एवं संख्या, किसी घटना या दुर्घटना, मतदान में खलल, ¨हसा, मतदान प्रक्रिया बिगाड़ने की जानकारी भी इन संचार माध्यमों से तत्काल दी जाएगी। इसके अलावा वह सूचना भी दी जाएगी, जिसे वरिष्ठ स्तर पर बताई जाना जरूरी है। योजना का दूसरा हिस्सा वरिष्ठ स्तरों से आने वाले ऐसे निर्देशों और आदेशों का होगा, जिन पर मैदानी अफसरों को तत्काल अमल करना है। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर टीमें गठित की गई हैं। रिटìनग अफसर की कम्युनिकेशन टीम तयशुदा वक्त में अपना काम पूरा कर जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की टीम को इसकी सूचना देगी, जिसे फिर भारत निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। कम्युनिकेशन प्लान से जुड़ने वाले सभी संपर्क नंबरों, व्यक्तियों, स्थानों की चे¨कग कर एक बार पूर्वाभ्यास 10 से 17 नवंबर के बीच और फिर दूसरी बार 18 से 25 नवंबर के बीच होगा।
प्रदेश में बढ़े चुनाव लड़ने के इच्छुक
भोपाल। प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख तक कुल 2 हजार 505 उम्मीदवारों ने पर्चे भरे। इनमें 4 हजार 136 पुरूष और 369 महिला उम्मीदवार शामिल हैं।
इस वर्ष 2003 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार नामांकन दाखिल करने वालों की तादाद में 1 हजार 444 लोगों का इजाफा हुआ है जबकि उस वक्त कुल 3 हजार 61 लोगों ने ही नामांकन पत्र भरे थे।
प्रदेश में मौजूदा विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने का सिलसिला 31 अक्टूबर से शुरू हुआ था जो 7 नवंबर तक चला।
इस बार अलग बात यह थी कि प्रदेश के कुल 230 विधानसभा क्षेत्रों में से 177 क्षेत्रों में नामांकन पत्र संबंधित जिला मुख्यालयों पर और 53 क्षेत्रों में नामांकन इन इलाकों के रिटìनग अफसरों ने जिला मुख्यालय से बाहर अपने दफ्तरों के मुख्यालय पर प्राप्त किए थे। सर्वाधिक 208 लोगों ने रीवा जिले में और सबसे कम 9 लोगों ने अलीराजपुर जिले में नामांकन पत्र भरे।
इस वर्ष 2003 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार नामांकन दाखिल करने वालों की तादाद में 1 हजार 444 लोगों का इजाफा हुआ है जबकि उस वक्त कुल 3 हजार 61 लोगों ने ही नामांकन पत्र भरे थे।
प्रदेश में मौजूदा विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने का सिलसिला 31 अक्टूबर से शुरू हुआ था जो 7 नवंबर तक चला।
इस बार अलग बात यह थी कि प्रदेश के कुल 230 विधानसभा क्षेत्रों में से 177 क्षेत्रों में नामांकन पत्र संबंधित जिला मुख्यालयों पर और 53 क्षेत्रों में नामांकन इन इलाकों के रिटìनग अफसरों ने जिला मुख्यालय से बाहर अपने दफ्तरों के मुख्यालय पर प्राप्त किए थे। सर्वाधिक 208 लोगों ने रीवा जिले में और सबसे कम 9 लोगों ने अलीराजपुर जिले में नामांकन पत्र भरे।
48 घंटे सील रहेगा राजस्थान बार्डर
भोपाल। चुनाव आयोग ने राजस्थान बार्डर पर एक रणनीति के तहत पूरी चौकसी बरतने के निर्देश दिए हैं। इस सिलसिले में की जाने वाली सघन जांच के दायरे में दोनों राज्यों से गाड़ियों, असामाजिक तत्वों, शराब, हथियार और बगैर हिसाब की नगद राशि का परिवहन शामिल होगा। मतदान के दौरान 48 घंटे यह बार्डर पूरी तरह सील रहेगी।
प्रदेश के मुख्य सचिव ने कहा कि राजस्थान से लगे प्रदेश के जिलों में कड़ी चौकसी के उपाय तत्काल किए जाएं। इसके अलावा ऐहतियाती जरूरी कदम भी उठाए जाएं। निर्देशों में कहा गया है कि राजस्थान से आवाजाही करने वाली गाड़ियों की कड़ी जांच की जाए। जांच का यह सिलसिला दिन के साथ रात में भी चलेगा। इसके लिए निर्धारित जांच चौकियों के साथ ही चलित रूप से भी जांच की जाएगी। यह पूरा काम दोनों राज्य एक-दूसरे से मशविरा कर अंजाम देंगे। आयोग ने असामाजिक तत्वों की दोनों राज्यों में आवाजाही रोकने के लिए मतदान समाप्ति के 48 घंटों के दौरान सीमाएं सील करने को कहा है। आयोग ने यह हिदायत राजस्थान में भी होने जा रहे विधानसभा चुनाव के दौरान वहां किए जाने वाले इंतजाम की समीक्षा के बाद दी है। आयोग का मानना है कि निर्वाचन अपराध करने और बाद में वहां से बच निकलने के लिए ये तत्व सीमाओं का सहारा ले सकते हैं। ये निर्देश सीमावर्ती सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को दिए हैं।
टीवी चैनलों पर राजनीतिक विज्ञापन के लिए समिति :
उच्चतम न्यायालय के फैसले पर अमल के सिलसिले में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने टीवी चैनलों और केबल नेटवर्क पर राजनीतिक विज्ञापनों के प्रसारण के लिए एक समिति गठित की है। यह समिति राजनीतिक दलों और संगठनों के विज्ञापन प्रसारण संबंधी आवेदनों का परीक्षण करेगी। समिति का अध्यक्ष अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आशीष श्रीवास्तव को बनाया गया है। इसके सदस्य भोपाल कलेक्टर मनीष रस्तोगी और दूरदर्शन केन्द्र भोपाल के केन्द्र निदेशक रहेंगे।
इसी तरह एक और समिति मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी जेएस माथुर की अध्यक्षता में गठित की गई, जो पहली समिति के फैसले के खिलाफ राजनीतिक दल, उम्मीदवार या किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत शिकायत या अपील की सुनवाई करेगी। इसके बाद यह समिति प्रमाणीकरण संबंधी फैसला देगी।
तीन दिन पहले देना होगा विज्ञापन के लिए आवेदन :
हर पंजीकृत राजनीतिक दल और उम्मीदवार को विज्ञापन प्रसारण के न्यूनतम तीन दिन पहले आयोग द्वारा तयशुदा प्रारूप में आवेदन देना होगा। अन्य व्यक्तियों और गैर पंजीकृत दलों को यह आवेदन विज्ञापन प्रसारण के न्यूनतम 7 दिन पहले देना होगा।
प्रदेश के मुख्य सचिव ने कहा कि राजस्थान से लगे प्रदेश के जिलों में कड़ी चौकसी के उपाय तत्काल किए जाएं। इसके अलावा ऐहतियाती जरूरी कदम भी उठाए जाएं। निर्देशों में कहा गया है कि राजस्थान से आवाजाही करने वाली गाड़ियों की कड़ी जांच की जाए। जांच का यह सिलसिला दिन के साथ रात में भी चलेगा। इसके लिए निर्धारित जांच चौकियों के साथ ही चलित रूप से भी जांच की जाएगी। यह पूरा काम दोनों राज्य एक-दूसरे से मशविरा कर अंजाम देंगे। आयोग ने असामाजिक तत्वों की दोनों राज्यों में आवाजाही रोकने के लिए मतदान समाप्ति के 48 घंटों के दौरान सीमाएं सील करने को कहा है। आयोग ने यह हिदायत राजस्थान में भी होने जा रहे विधानसभा चुनाव के दौरान वहां किए जाने वाले इंतजाम की समीक्षा के बाद दी है। आयोग का मानना है कि निर्वाचन अपराध करने और बाद में वहां से बच निकलने के लिए ये तत्व सीमाओं का सहारा ले सकते हैं। ये निर्देश सीमावर्ती सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को दिए हैं।
टीवी चैनलों पर राजनीतिक विज्ञापन के लिए समिति :
उच्चतम न्यायालय के फैसले पर अमल के सिलसिले में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने टीवी चैनलों और केबल नेटवर्क पर राजनीतिक विज्ञापनों के प्रसारण के लिए एक समिति गठित की है। यह समिति राजनीतिक दलों और संगठनों के विज्ञापन प्रसारण संबंधी आवेदनों का परीक्षण करेगी। समिति का अध्यक्ष अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आशीष श्रीवास्तव को बनाया गया है। इसके सदस्य भोपाल कलेक्टर मनीष रस्तोगी और दूरदर्शन केन्द्र भोपाल के केन्द्र निदेशक रहेंगे।
इसी तरह एक और समिति मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी जेएस माथुर की अध्यक्षता में गठित की गई, जो पहली समिति के फैसले के खिलाफ राजनीतिक दल, उम्मीदवार या किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत शिकायत या अपील की सुनवाई करेगी। इसके बाद यह समिति प्रमाणीकरण संबंधी फैसला देगी।
तीन दिन पहले देना होगा विज्ञापन के लिए आवेदन :
हर पंजीकृत राजनीतिक दल और उम्मीदवार को विज्ञापन प्रसारण के न्यूनतम तीन दिन पहले आयोग द्वारा तयशुदा प्रारूप में आवेदन देना होगा। अन्य व्यक्तियों और गैर पंजीकृत दलों को यह आवेदन विज्ञापन प्रसारण के न्यूनतम 7 दिन पहले देना होगा।
भाजपा के 90 प्रतिशत बागी हुए राजी
भोपाल। बागी उम्मीदवारों को मनाने के मामले में भाजपा दूसरे दलों से तेज साबित हो रही है। पार्टी के नब्बे प्रतिशत बागी शनिवार रात तक नाम वापसी के लिए राजी हो गए थे। डेमेज कंट्रोल का यह काम खुद प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने किया। वे सुबह से देर रात तक फोन पर रूठे नेताओं को मनाते रहे।
प्रदेश में बगावत की खबरें पाकर शुक्रवार को अचानक भोपाल आए राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल प्रदेशाध्यक्ष के कुशल प्रबंधन से संतुष्ट होकर शनिवार को वापस लौट गए। इससे पहले सुबह रामलाल ने प्रदेशाध्यक्ष तोमर, संगठन महामंत्री माखन सिंह, सह संगठन महामंत्री भगवतशरण माथुर, उपाध्यक्ष अनिल दवे के साथ बैठ कर प्रदेश भर की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद प्रदेश कार्यालय में बैठ कर तोमर ने नाराज होकर पार्टी के खिलाफ नामांकन दाखिल करने वालों के साथ जिलों के प्रमुख नेताओं से चर्चा की। यह सिलसिला रात तक चला। इस मुहिम के चलते शाम को संभाग प्रभारियों के साथ होने वाली बैठक कल तक के लिए टाल दी गई। अब पार्टी कल संभाग प्रभारियों को बाकी बचे नाराज नेताओं को मनाने का जिम्मा सौंपेगी। जागरण से चर्चा में तोमर ने दावा किया है कि निर्दलीय नामांकन दाखिल करने वाले नब्बे प्रतिशत कार्यकर्ता नाम वापस लेने तैयार हैं। नाम वापसी की अंतिम तारीख दस नवंबर तक भाजपा को बगावत का कहीं भी सामना नहीं करना पड़ेगा। तोमर के अनुसार सभी लोग भाजपा के कार्यकर्ता हैं। अपेक्षाएं पूरी नहीं होने पर कई बार वे ऐसा कदम उठा लेते हैं, लेकिन सही और गलत का भान होते ही वे हमेशा पार्टी के पक्ष में ही निर्णय लेते हैं।
स्वामी लोधी को भाजपा ने बनाया हथियार
दो माह पहले भाजपा से त्यागपत्र देने वाले भारतीय जनशक्ति अध्यक्ष उमा भारती के बड़े भाई स्वामी प्रसाद लोधी ने शनिवार को भाजपा का दामन थाम लिया। उमा विरोधी तेवर अख्तियार कर चुके स्वामी का इस्तेमाल भाजपा अब टीकमगढ़ में सुश्री भारती के खिलाफ करेगी। इससे पहले सुश्री भारती के चुनाव लड़ने की संभावना भांप कर ही भाजपा ने खाद्य मंत्री अखण्ड प्रताप सिंह को टीकमगढ़ से उम्मीदवार बनाया है। स्वामी की तरह अखण्ड भी काफी मुखर हैं। भाजश ने उन्हें जबेरा से चुनाव मैदान में उतारने का निर्णय लिया, जो उन्हें रास नहीं आया। स्वामी बीते सप्ताह भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मिले, तब उन्हें वापसी के लिए मना कर दिया गया था। सुश्री भारती द्वारा टीकमगढ़ से नामांकन दाखिल करते ही स्वामी भाजपा के लिए महत्वपूर्ण हो गए और आज उन्हें बुला कर भाजपा में शामिल कर लिया गया। भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने उनका स्वागत किया। लोधी के अनुसार वे अब टीकमगढ़ जाकर पार्टी के पक्ष में प्रचार करेंगे।
प्रदेश में बगावत की खबरें पाकर शुक्रवार को अचानक भोपाल आए राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल प्रदेशाध्यक्ष के कुशल प्रबंधन से संतुष्ट होकर शनिवार को वापस लौट गए। इससे पहले सुबह रामलाल ने प्रदेशाध्यक्ष तोमर, संगठन महामंत्री माखन सिंह, सह संगठन महामंत्री भगवतशरण माथुर, उपाध्यक्ष अनिल दवे के साथ बैठ कर प्रदेश भर की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद प्रदेश कार्यालय में बैठ कर तोमर ने नाराज होकर पार्टी के खिलाफ नामांकन दाखिल करने वालों के साथ जिलों के प्रमुख नेताओं से चर्चा की। यह सिलसिला रात तक चला। इस मुहिम के चलते शाम को संभाग प्रभारियों के साथ होने वाली बैठक कल तक के लिए टाल दी गई। अब पार्टी कल संभाग प्रभारियों को बाकी बचे नाराज नेताओं को मनाने का जिम्मा सौंपेगी। जागरण से चर्चा में तोमर ने दावा किया है कि निर्दलीय नामांकन दाखिल करने वाले नब्बे प्रतिशत कार्यकर्ता नाम वापस लेने तैयार हैं। नाम वापसी की अंतिम तारीख दस नवंबर तक भाजपा को बगावत का कहीं भी सामना नहीं करना पड़ेगा। तोमर के अनुसार सभी लोग भाजपा के कार्यकर्ता हैं। अपेक्षाएं पूरी नहीं होने पर कई बार वे ऐसा कदम उठा लेते हैं, लेकिन सही और गलत का भान होते ही वे हमेशा पार्टी के पक्ष में ही निर्णय लेते हैं।
स्वामी लोधी को भाजपा ने बनाया हथियार
दो माह पहले भाजपा से त्यागपत्र देने वाले भारतीय जनशक्ति अध्यक्ष उमा भारती के बड़े भाई स्वामी प्रसाद लोधी ने शनिवार को भाजपा का दामन थाम लिया। उमा विरोधी तेवर अख्तियार कर चुके स्वामी का इस्तेमाल भाजपा अब टीकमगढ़ में सुश्री भारती के खिलाफ करेगी। इससे पहले सुश्री भारती के चुनाव लड़ने की संभावना भांप कर ही भाजपा ने खाद्य मंत्री अखण्ड प्रताप सिंह को टीकमगढ़ से उम्मीदवार बनाया है। स्वामी की तरह अखण्ड भी काफी मुखर हैं। भाजश ने उन्हें जबेरा से चुनाव मैदान में उतारने का निर्णय लिया, जो उन्हें रास नहीं आया। स्वामी बीते सप्ताह भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मिले, तब उन्हें वापसी के लिए मना कर दिया गया था। सुश्री भारती द्वारा टीकमगढ़ से नामांकन दाखिल करते ही स्वामी भाजपा के लिए महत्वपूर्ण हो गए और आज उन्हें बुला कर भाजपा में शामिल कर लिया गया। भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने उनका स्वागत किया। लोधी के अनुसार वे अब टीकमगढ़ जाकर पार्टी के पक्ष में प्रचार करेंगे।
शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2008
अपराध और संपत्ति ब्यौरा नहीं देने पर पर्चा खारिज
विधानसभा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को नामांकन पत्र के साथ दो शपथ पत्र भी जमा करना होंगे। शपथ पत्र में उन्हें अपने आपराधिक रिकार्ड और चल-अचल संपत्ति का पूरा विवरण देना होगा वरना चुनाव आयोग उनका पर्चा खारिज कर देगा।
आयोग के अनुसार आपराधिक मामले का पूरा ब्यौरा देना होगा जिसमें धाराओं और आरोप निर्धारित होने से लेकर ताजा स्थिति तक की जानकारी होनी चाहिए। इसके साथ दिए जाने वाले दूसरे शपथ पत्र में उम्मीदवार के स्वयं, पत्नी और आश्रितों के पास मौजूद नगद राशि, बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों व गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में जमा धनराशि, बांड, डिवेंचर, एनएसएस, डाक बचत, शेयर, बीमा पालिसी, गाड़ियां, गहनों सहित सभी संपत्ति के बारे में बिंदुवार जानकारी देना होगी। इसी तरह उसे अचल संपत्तियों में कृषि भूमि, गैर कृषि भूमि, भवन और ऐसी संपत्ति जिसमें उम्मीदवार का हिस्सा हो उनकी जानकारी देना पड़ेगी। इस शपथ पत्र में उम्मीदवार को कर्ज के बारे में भी बताना होगा कि उसे किसे कितने रुपए देना हैं। आयोग ने नामांकन पत्र भरने में पूरी सतर्कता बरतने की सलाह दी है ताकि पर्चा खारिज न हो। सूत्र बताते हैं कि किसी भी प्रकार की खामी रहने या तय शर्त के तहत नामांकन दाखिल नहीं करने पर आयोग पर्चा निरस्त कर सकता है। आयोग के दफ्तर में हेल्प लाइन शुरू : राजधानी में स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के दफ्तर में मतदाताओं की सहूलियत के लिए 24 घंटे की हेल्प लाइन सेवा शुरू की गई है। हेल्प लाइन के मोबाइल नंबर 9425601845 और 9425601846 पर लोग मतदाता सूची में अपने नाम, फोटो परिचय पत्र, मतदान केंद्र और अपने विधानसभा क्षेत्र आदि के बारे में जानकारी ले सकेंगे। इसके अलावा सिर्फ बीएसएनएल उपभोक्ता मतदाता के रूप में शार्ट कोड नंबर 554466 पर अपने फोटो परिचय पत्र का नंबर एसएमएस कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इन नंबरों पर चौबीस घंटे जानकारी मिलेगी। इसी तरह निर्वाचन कार्यालय के काल सेंटर पर लगे फोन नंबर 0755-2555999 पर भी सुबह छह बजे से रात दस बजे तक संपर्क किया जा सकता है।
तब भी हो सकता है पर्चा निरस्त
* पछले चुनाव के खर्च का ब्यौरा नहीं दिया हो।
* रटर्निग आफिसर और सहायक रिटर्निग आफिसर की जगह किसी और को सौंपने पर।
* आवश्यक और योग्य प्रस्तावकों के हस्ताक्षर नहीं होने पर।
* सुरक्षा राशि जमा नहीं करने पर।
* सही उम्र और अन्य जानकारी नहीं भरने पर।
* संबंधित क्षेत्र का मतदाता नहीं होने पर।
* मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल के अधिकृत पदाधिकारी दल द्वारा पार्टी के उम्मीदवार के बारे में निर्वाचन अधिकारी को सूचना नहीं देने पर।
भाजपा के 3-4 सांसद ही पाएंगे टिकट
भोपाल। प्रदेश में दोबारा सरकार बनाने के लिए पैनल में हर जिले से सांसद का नाम शामिल करने वाली भाजपा ने अब हाथ खींच लिए हैं। पार्टी परिसीमन से प्रभावित तीन से चार सांसदों को ही इस बार विधानसभा चुनाव लड़ाएगी। 23 और 24 अक्टूबर को हुई प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में पार्टी के दस सांसदों के नाम विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए विभिन्न सीटों से पैनल में रखे गए थे। भाजपा के जिन सांसदों को विधानसभा चुनाव में टिकट मिल सकता है उनमें परिसीमन प्रभावित मुरैना सांसद अशोक अर्गल, भिंड सांसद रामलखन सिंह, सागर सांसद वीरेंद्र खटीक, तथा बैतूल सांसद हेमंत खण्डेलवाल के साथ होशंगाबाद सांसद सरताज सिंह का नाम शामिल हैं। धार सांसद छतर सिंह दरबार, सतना सांसद गणेश सिंह और विदिशा सांसद रामपाल सिंह भी टिकट चाहने वालों की सूची में हैं, लेकिन इनका चांस कम है। इनमें पहले दमोह लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके खजुराहो सांसद रामकृष्ण कुसमारिया का भी नाम शामिल था। उनका नाम पथरिया सीट से रखा गया था, लेकिन कुसमारिया ने बैठक के तुरंत बाद चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा जताई है। सांसदों को लड़ाने के बारे में पूछे जाने पर कुसमारिया का प्रतिप्रश्न था, लोकसभा खाली करनी है क्या? विधानसभा के बजाए उनकी नजर नई बनी खजुराहो लोकसभा सीट पर है।
इस बीच कुसमारिया को पथरिया से मैदान में न उतरने को लेकर धमकी भी मिल गई है जिसकी शिकायत उन्होंने प्रदेशाध्यक्ष तथा संगठन महामंत्री से की है। इसी तरह परिसीमन में समाप्त हो रहे सिवनी लोकसभा क्षेत्र की सांसद नीता पटैरिया की केवलारी से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा परवान चढ़ती नहीं दिख रही।
प्रदेश नेतृत्व ने उन्हें अभी तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिए, उल्टे केवलारी का प्रभारी परिसीमन से विधानसभा क्षेत्र बदलने को विवश हुए पूर्व मंत्री ढाल सिंह बिसेन को बना दिया, जो प्रत्याशी की तरह चुनावी तैयारी में जुटे हैं। बैतूल सांसद हेमंत खण्डेलवाल को विधानसभा चुनाव लड़ाने की तैयारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर कर रहे हैं। हालांकि खबर है कि हेमंत ने इस बारे में अपनी अनिच्छा जताई है। प्रदेश चुनाव समिति के एक वरिष्ठ सदस्य पुष्टि करते हैं कि परिसीमन से सीटें बदलने के अलावा बहुत जरूरी होने पर ही सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारा जाएगा। उनके अनुसार सभी को यहां लड़ा देंगे तो पार्टी केंद्र में सरकार बनाने के लिए चुनाव कैसे लड़ेगी।
आयोग के अनुसार आपराधिक मामले का पूरा ब्यौरा देना होगा जिसमें धाराओं और आरोप निर्धारित होने से लेकर ताजा स्थिति तक की जानकारी होनी चाहिए। इसके साथ दिए जाने वाले दूसरे शपथ पत्र में उम्मीदवार के स्वयं, पत्नी और आश्रितों के पास मौजूद नगद राशि, बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों व गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में जमा धनराशि, बांड, डिवेंचर, एनएसएस, डाक बचत, शेयर, बीमा पालिसी, गाड़ियां, गहनों सहित सभी संपत्ति के बारे में बिंदुवार जानकारी देना होगी। इसी तरह उसे अचल संपत्तियों में कृषि भूमि, गैर कृषि भूमि, भवन और ऐसी संपत्ति जिसमें उम्मीदवार का हिस्सा हो उनकी जानकारी देना पड़ेगी। इस शपथ पत्र में उम्मीदवार को कर्ज के बारे में भी बताना होगा कि उसे किसे कितने रुपए देना हैं। आयोग ने नामांकन पत्र भरने में पूरी सतर्कता बरतने की सलाह दी है ताकि पर्चा खारिज न हो। सूत्र बताते हैं कि किसी भी प्रकार की खामी रहने या तय शर्त के तहत नामांकन दाखिल नहीं करने पर आयोग पर्चा निरस्त कर सकता है। आयोग के दफ्तर में हेल्प लाइन शुरू : राजधानी में स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के दफ्तर में मतदाताओं की सहूलियत के लिए 24 घंटे की हेल्प लाइन सेवा शुरू की गई है। हेल्प लाइन के मोबाइल नंबर 9425601845 और 9425601846 पर लोग मतदाता सूची में अपने नाम, फोटो परिचय पत्र, मतदान केंद्र और अपने विधानसभा क्षेत्र आदि के बारे में जानकारी ले सकेंगे। इसके अलावा सिर्फ बीएसएनएल उपभोक्ता मतदाता के रूप में शार्ट कोड नंबर 554466 पर अपने फोटो परिचय पत्र का नंबर एसएमएस कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इन नंबरों पर चौबीस घंटे जानकारी मिलेगी। इसी तरह निर्वाचन कार्यालय के काल सेंटर पर लगे फोन नंबर 0755-2555999 पर भी सुबह छह बजे से रात दस बजे तक संपर्क किया जा सकता है।
तब भी हो सकता है पर्चा निरस्त
* पछले चुनाव के खर्च का ब्यौरा नहीं दिया हो।
* रटर्निग आफिसर और सहायक रिटर्निग आफिसर की जगह किसी और को सौंपने पर।
* आवश्यक और योग्य प्रस्तावकों के हस्ताक्षर नहीं होने पर।
* सुरक्षा राशि जमा नहीं करने पर।
* सही उम्र और अन्य जानकारी नहीं भरने पर।
* संबंधित क्षेत्र का मतदाता नहीं होने पर।
* मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल के अधिकृत पदाधिकारी दल द्वारा पार्टी के उम्मीदवार के बारे में निर्वाचन अधिकारी को सूचना नहीं देने पर।
भाजपा के 3-4 सांसद ही पाएंगे टिकट
भोपाल। प्रदेश में दोबारा सरकार बनाने के लिए पैनल में हर जिले से सांसद का नाम शामिल करने वाली भाजपा ने अब हाथ खींच लिए हैं। पार्टी परिसीमन से प्रभावित तीन से चार सांसदों को ही इस बार विधानसभा चुनाव लड़ाएगी। 23 और 24 अक्टूबर को हुई प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में पार्टी के दस सांसदों के नाम विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए विभिन्न सीटों से पैनल में रखे गए थे। भाजपा के जिन सांसदों को विधानसभा चुनाव में टिकट मिल सकता है उनमें परिसीमन प्रभावित मुरैना सांसद अशोक अर्गल, भिंड सांसद रामलखन सिंह, सागर सांसद वीरेंद्र खटीक, तथा बैतूल सांसद हेमंत खण्डेलवाल के साथ होशंगाबाद सांसद सरताज सिंह का नाम शामिल हैं। धार सांसद छतर सिंह दरबार, सतना सांसद गणेश सिंह और विदिशा सांसद रामपाल सिंह भी टिकट चाहने वालों की सूची में हैं, लेकिन इनका चांस कम है। इनमें पहले दमोह लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके खजुराहो सांसद रामकृष्ण कुसमारिया का भी नाम शामिल था। उनका नाम पथरिया सीट से रखा गया था, लेकिन कुसमारिया ने बैठक के तुरंत बाद चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा जताई है। सांसदों को लड़ाने के बारे में पूछे जाने पर कुसमारिया का प्रतिप्रश्न था, लोकसभा खाली करनी है क्या? विधानसभा के बजाए उनकी नजर नई बनी खजुराहो लोकसभा सीट पर है।
इस बीच कुसमारिया को पथरिया से मैदान में न उतरने को लेकर धमकी भी मिल गई है जिसकी शिकायत उन्होंने प्रदेशाध्यक्ष तथा संगठन महामंत्री से की है। इसी तरह परिसीमन में समाप्त हो रहे सिवनी लोकसभा क्षेत्र की सांसद नीता पटैरिया की केवलारी से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा परवान चढ़ती नहीं दिख रही।
प्रदेश नेतृत्व ने उन्हें अभी तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिए, उल्टे केवलारी का प्रभारी परिसीमन से विधानसभा क्षेत्र बदलने को विवश हुए पूर्व मंत्री ढाल सिंह बिसेन को बना दिया, जो प्रत्याशी की तरह चुनावी तैयारी में जुटे हैं। बैतूल सांसद हेमंत खण्डेलवाल को विधानसभा चुनाव लड़ाने की तैयारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर कर रहे हैं। हालांकि खबर है कि हेमंत ने इस बारे में अपनी अनिच्छा जताई है। प्रदेश चुनाव समिति के एक वरिष्ठ सदस्य पुष्टि करते हैं कि परिसीमन से सीटें बदलने के अलावा बहुत जरूरी होने पर ही सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारा जाएगा। उनके अनुसार सभी को यहां लड़ा देंगे तो पार्टी केंद्र में सरकार बनाने के लिए चुनाव कैसे लड़ेगी।
प्रत्याशियों पर भाजपा चुनाव समिति में खींचतान
भाजपा की प्रदेश चुनाव समिति की अंतिम बैठक के दौरान दो अलग-अलग दंगल चल रहे थे। बंद कमरे में समिति के वरिष्ठ सदस्य अपनी सिफारिशों पर अड़े थे, तो बाहर दावेदारों के समर्थक अपने नेता के लिए माहौल बना रहे थे। बैठक की संभावित गर्मी को भांप कर ही प्रदेश प्रभारी राष्ट्रीय महामंत्री अनंत कुमार को बगैर कार्यक्रम के इस बैठक में आना पड़ा।
सुबह साढ़े 11 बजे शुरू हुई प्रत्याशी चयन की इस तीसरी बैठक में चुनाव समिति के नेता भले ही करीब आए, लेकिन सूत्रों के अनुसार उनके मतभेद पहले से ज्यादा मुखर रहे। आज राउण्ड टेबल बैठक चली। इससे पहले हुई दोनों बैठकों में से 23 को सारे नेता सोफे पर दूर-दूर बैठे थे, 24 अक्टूबर को सोफा हटा कर पास-पास कुर्सियां लगाई गई थीं। बैठक से पहले सांसद विक्रम वर्मा के घर पहुंची सुमित्रा महाजन ने करीब एक घंटे तक उनके साथ बैठ कर रणनीति पर चर्चा की।
बैठक में नीले रंग की फाइल लेकर आए वर्मा पूरी तैयारी के साथ थे। अनंत कुमार भी सर्वे और परिसीमन के आधार पर तैयार रिपोर्ट लेकर बैठे। प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने दीवाली से पहले राष्ट्रीय संगठन महामंत्री की सहमति से तैयार प्रत्याशियों की संभावित सूची पेश की। बावजूद इसके समिति के सदस्य वरिष्ठ सांसदों ने सभी सीटों पर पैनल में आए नामों पर गुण-दोष के आधार पर विचार करने पर जोर डाला। बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ तो रात तक चला और सहमति के प्रयासों पर असहमति हावी होती रही।
सीएम के साथ प्रकट हुए अनंत कुमार : प्रदेश चुनाव समिति बैठक के लिए सुबह 11 बजे भाजपा प्रदेश कार्यालय में अनंत कुमार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ प्रकट हुए। वे सुबह ही भोपाल आए और सीएम हाउस होते हुए कार्यालय पहुंचे। प्रदेश चुनाव समिति का सदस्य न होने के बावजूद राष्ट्रीय महामंत्री थावरचंद गेहलोत पूरे समय बैठक में रहे। वे केंद्रीय चुनाव समिति में प्रदेश के इकलौते सदस्य हैं। जबकि राष्ट्रीय सचिव प्रभात झा ने अपने कक्ष में ही आज का दिन बिताया।
जोशी को लेकर लगती रही अटकलें : पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी चुनाव समिति की बैठक में निर्धारित समय से करीब एक घंटे विलंब से पहुंचे। इसे लेकर कयास लगते रहे कि वे नाराज हैं।
कुछ लोगों ने उनके घर भी फोन लगा लिया, वहां से बताया गया कि वे बैठक के लिए रवाना हो गए हैं। इसी तरह दोपहर में वे भोजन के लिए अपने घर गए तो खबर चल पड़ी कि जोशी बैठक छोड़ गए। इसके घंटे भर बाद वे वापस लौट आए।
राजगढ़ वालों का शक्ति प्रदर्शन : राजगढ़ से विधायक हरिचरण तिवारी को लेकर चुनाव समिति की बैठक के दौरान भाजपा आफिस में शक्तिप्रदर्शन हुआ। एक गुट उन्हें टिकट न देने की मांग करते हुए प्रदेश कार्यालय में आकर नारेबाजी करने लगा। इसमें पंकज शर्मा, राजू इंगले आदि शामिल थे। राष्ट्रीय महामंत्री थावरचंद गेहलोत और सह संगठन महामंत्री भगवतशरण माथुर ने उन्हें समझा बुझा कर भेजा ही था कि तिवारी के समर्थन में लोग आकर नारेबाजी करने लगे।
सुबह साढ़े 11 बजे शुरू हुई प्रत्याशी चयन की इस तीसरी बैठक में चुनाव समिति के नेता भले ही करीब आए, लेकिन सूत्रों के अनुसार उनके मतभेद पहले से ज्यादा मुखर रहे। आज राउण्ड टेबल बैठक चली। इससे पहले हुई दोनों बैठकों में से 23 को सारे नेता सोफे पर दूर-दूर बैठे थे, 24 अक्टूबर को सोफा हटा कर पास-पास कुर्सियां लगाई गई थीं। बैठक से पहले सांसद विक्रम वर्मा के घर पहुंची सुमित्रा महाजन ने करीब एक घंटे तक उनके साथ बैठ कर रणनीति पर चर्चा की।
बैठक में नीले रंग की फाइल लेकर आए वर्मा पूरी तैयारी के साथ थे। अनंत कुमार भी सर्वे और परिसीमन के आधार पर तैयार रिपोर्ट लेकर बैठे। प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने दीवाली से पहले राष्ट्रीय संगठन महामंत्री की सहमति से तैयार प्रत्याशियों की संभावित सूची पेश की। बावजूद इसके समिति के सदस्य वरिष्ठ सांसदों ने सभी सीटों पर पैनल में आए नामों पर गुण-दोष के आधार पर विचार करने पर जोर डाला। बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ तो रात तक चला और सहमति के प्रयासों पर असहमति हावी होती रही।
सीएम के साथ प्रकट हुए अनंत कुमार : प्रदेश चुनाव समिति बैठक के लिए सुबह 11 बजे भाजपा प्रदेश कार्यालय में अनंत कुमार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ प्रकट हुए। वे सुबह ही भोपाल आए और सीएम हाउस होते हुए कार्यालय पहुंचे। प्रदेश चुनाव समिति का सदस्य न होने के बावजूद राष्ट्रीय महामंत्री थावरचंद गेहलोत पूरे समय बैठक में रहे। वे केंद्रीय चुनाव समिति में प्रदेश के इकलौते सदस्य हैं। जबकि राष्ट्रीय सचिव प्रभात झा ने अपने कक्ष में ही आज का दिन बिताया।
जोशी को लेकर लगती रही अटकलें : पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी चुनाव समिति की बैठक में निर्धारित समय से करीब एक घंटे विलंब से पहुंचे। इसे लेकर कयास लगते रहे कि वे नाराज हैं।
कुछ लोगों ने उनके घर भी फोन लगा लिया, वहां से बताया गया कि वे बैठक के लिए रवाना हो गए हैं। इसी तरह दोपहर में वे भोजन के लिए अपने घर गए तो खबर चल पड़ी कि जोशी बैठक छोड़ गए। इसके घंटे भर बाद वे वापस लौट आए।
राजगढ़ वालों का शक्ति प्रदर्शन : राजगढ़ से विधायक हरिचरण तिवारी को लेकर चुनाव समिति की बैठक के दौरान भाजपा आफिस में शक्तिप्रदर्शन हुआ। एक गुट उन्हें टिकट न देने की मांग करते हुए प्रदेश कार्यालय में आकर नारेबाजी करने लगा। इसमें पंकज शर्मा, राजू इंगले आदि शामिल थे। राष्ट्रीय महामंत्री थावरचंद गेहलोत और सह संगठन महामंत्री भगवतशरण माथुर ने उन्हें समझा बुझा कर भेजा ही था कि तिवारी के समर्थन में लोग आकर नारेबाजी करने लगे।
कलेक्टरों को मिल सकती है सप्ताह भर की मोहलत
प्रदेश के कुछ जिलों में अभी भी पूरे मतदाता फोटो परिचय-पत्र नहीं बांटे जा सके हैं। जबकि चुनाव आयोग द्वारा तय समय सीमा शनिवार को समाप्त हो रही है। ऐसे में शनिवार को हो रही कमिश्नर-कलेक्टरों की बैठक में कुछ जिलों के कलेक्टरों को आयोग की फटकार पड़ सकती है। साथ ही आयोग कलेक्टरों को एक सप्ताह की अंतिम मोहलत भी दे सकता है।
ज्ञात रहे कि निर्वाचन आयोग के निर्देश पर पिछले शनिवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी जेएस माथुर ने वीडियो कांफ्रें¨सग के जरिए सारे जिला कलेक्टरों को हर हालत में 31 अक्टूबर तक मतदाता फोटो परिचय-पत्र बांटने के आदेश दिए थे। सूत्र बताते हैं कि जिलों से हर रोज मतदाता परिचय-पत्र के बांटे जाने की रिपोर्ट ली जा रही है। अभी भी कुछ जिलों में शत-प्रतिशत काम नहीं हुआ है। इस कारण उन कलेक्टरों की नींद उड़ी हुई है, जिनके यहां पूरा काम नहीं हुआ है।
ज्ञात रहे कि निर्वाचन आयोग के निर्देश पर पिछले शनिवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी जेएस माथुर ने वीडियो कांफ्रें¨सग के जरिए सारे जिला कलेक्टरों को हर हालत में 31 अक्टूबर तक मतदाता फोटो परिचय-पत्र बांटने के आदेश दिए थे। सूत्र बताते हैं कि जिलों से हर रोज मतदाता परिचय-पत्र के बांटे जाने की रिपोर्ट ली जा रही है। अभी भी कुछ जिलों में शत-प्रतिशत काम नहीं हुआ है। इस कारण उन कलेक्टरों की नींद उड़ी हुई है, जिनके यहां पूरा काम नहीं हुआ है।
प्रत्याशी आज से पर्चा दाखिल की प्रक्रिया शुरू
प्रदेश में शुक्रवार से उम्मीदवार नामांकन दाखिल करना शुरू हो जाएगा। राज्यपाल डॉ. बलराम जाखड़ के अधिसूचना जारी करते ही सुबह 11 बजे से पर्चा दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी जो शाम तीन बजे तक चलेगी। पहले दिन छोटी पार्टियां और कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चा दाखिल करने की उम्मीद है। क्योंकि अभी तक कांग्रेस और भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि सात नवंबर है। उम्मीदवारों को नामांकन के साथ पांच हजार सुरक्षा निधि के रूप में जमा करने होंगे लेकिन अनुसूचित जाति और जनजाति के उम्मीदवार के लिए पचास फीसदी की छूट दी गई है। वह सिर्फ ढाई हजार रुपए जमा कर नामांकन दाखिल कर सकेंगे। आयोग ने नामांकन दाखिल करते समय उम्मीदवार के साथ सिर्फ पांच लोगों को जाने की इजाजत दी है।
साध्वी प्रज्ञा को चुनाव लड़ाना चाहती हैं उमा भारती
मालेगांव बम धमाके के सिलसिले में गिरफ्तार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के प्रति उमा भारती का समर्थन लगातार मजबूत होता जा रहा है। उमा की पार्टी भारतीय जनशक्ति (भाजश) पार्टी की ओर से प्रज्ञा को मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने की पेशकश की गई है। पार्टी की ओर से उन्हें कानूनी मदद मुहैया कराने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
भाजश के राष्ट्रीय सचिव इंदर प्रजापत ने गुरुवार को यहां संवाददाताओं से कहा, इस बारे में प्रज्ञा के वकील से बात हुई है। प्रजापत ने कहा कि अगर प्रज्ञा राजी हुई तो मध्यप्रदेश में भाजपा के किसी कद्दावर नेता के खिलाफ उन्हें चुनाव मैदान में उतारा जाएगा। प्रजापत ने प्रज्ञा को 'पूरी तरह निर्दोष' करार दिया और उनकी गिरफ्तारी को राजनीति से प्रेरित तथा संत समुदाय को बदनाम करने की साजिश बताया। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि जनता की अदालत अंतत: प्रज्ञा को बरी कर देगी।' प्रज्ञा को 29 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। वह तीन नवंबर तक महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधी दस्ते की हिरासत में हैं।
भाजश प्रमुख उमा भारती ने उनकी गिरफ्तारी के फौरन बाद इसे साजिश बताया था और प्रज्ञा को साफ निर्दोष करार दिया था।
भाजश के राष्ट्रीय सचिव इंदर प्रजापत ने गुरुवार को यहां संवाददाताओं से कहा, इस बारे में प्रज्ञा के वकील से बात हुई है। प्रजापत ने कहा कि अगर प्रज्ञा राजी हुई तो मध्यप्रदेश में भाजपा के किसी कद्दावर नेता के खिलाफ उन्हें चुनाव मैदान में उतारा जाएगा। प्रजापत ने प्रज्ञा को 'पूरी तरह निर्दोष' करार दिया और उनकी गिरफ्तारी को राजनीति से प्रेरित तथा संत समुदाय को बदनाम करने की साजिश बताया। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि जनता की अदालत अंतत: प्रज्ञा को बरी कर देगी।' प्रज्ञा को 29 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। वह तीन नवंबर तक महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधी दस्ते की हिरासत में हैं।
भाजश प्रमुख उमा भारती ने उनकी गिरफ्तारी के फौरन बाद इसे साजिश बताया था और प्रज्ञा को साफ निर्दोष करार दिया था।
बुधवार, 15 अक्टूबर 2008
भाजपा की आज से उल्टी गिनती शुरू: पचौरी
चुनाव आचार संहिता लगते ही भारतीय जनता पार्टी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। अब भाजपा को पांच साल में किए गए वादों, झूठे आश्वासन और कोरी घोषणाओं पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। इस सरकार के कार्यकाल में सरकारी अफसरों की मदद से किए गए आयोजनों पर हुए फिजूल खर्च और सरकारी जमीनों की बंदरबांट की भी जांच होना चाहिए। यह कहना है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी का। वे मंगलवार को पीसीसी में संवाददाताओं से चर्चा कर रहे थे।
श्री पचौरी ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बुधनी और होशंगाबाद में रेत खदानों के लिए मारामारी हो रही है। खनिज घोटाले हो रहे हैं। जिन लोगों के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष श्रीमती जमुना देवी ने रेत माफिया होने की शिकायत की थी, उन पर कार्रवाई करने की जगह लालबत्ती दे दी गई। उन्होंने सरकार की खामियां गिनाते हुए कहा कि 11 पंचायतों में 341 घोषणाएं की गई थीं, इनमें से 59 अब तक पूरी नहीं हुई हैं। 41 महीनों में 1,00,453 बच्चे कुपोषण से एक साल की उम्र से पहले ही मौत के मुंह में चले गए। प्रदेश 1,94,711 आपराधिक मामले दर्ज कर देश में सबसे अधिक अपराध होने वाला राज्य बन गया। प्रदेश में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या बढ़ी है, पूर्ण साक्षरता का वादा करने वाली सरकार में 63.7 फीसदी ही साक्षरता है, आज भी 58 फीसदी बच्चे प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर स्कूल छोड़ देते हैं। श्री पचौरी ने कहा कि इस सरकार में पांच मेडिकल कालेजों को मान्यता समाप्त हो गई, कृषि की उपेक्षा हुई, सांप्रदायिक दंगे हुए, बुरहानपुर विधायक पर झूठा मुकदमा दर्ज किया और आदिवासियों को बेदखल किया गया।
हाईकमान तय करेगा, चुनाव लड़ूंगा या नहीं
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने कहा कि वह पार्टी के आदेश का पालन करेंगे, उन्हें उम्मीदवार बनाना है या नहीं, इसका निर्णय केन्द्रीय चुनाव समिति और आलाकमान करेगा। यह पूछने पर कि कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची कब तक जारी होगी, उन्होंने कहा कि केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक की तिथि अभी तय नहीं हुई है। उसकी बैठक के बाद ही उम्मीदवारों की सूची जारी हो सकेगी। उन्होंने कहा कि जीतने योग्य उम्मीदवार पार्टी टिकट का हकदार होगा। विधानसभा चुनाव घोषणा पत्र के बारे में श्री पचौरी ने कहा कि प्रदेश चुनाव घोषणा पत्र समिति की तीन बैठकें हो चुकी हैं और हम घोषणा पत्र को अंतिम रूप दे रहे हैं, लेकिन इसे अंतिम स्वरूप तो केन्द्रीय चुनाव घोषणा पत्र समिति ही देगी। कांग्रेस सांसद माणिक सिंह और पूर्व मंत्री प्रेमनारायण ठाकुर के भाजपा में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनाव के समय नेता इधर से उधर होते रहते हैं, इसमें कोई खास बात नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के दबाव में श्रीमती सोनिया गांधी की आमसभा के लिए लाल परेड मैदान नहीं दिया गया।
श्री पचौरी ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बुधनी और होशंगाबाद में रेत खदानों के लिए मारामारी हो रही है। खनिज घोटाले हो रहे हैं। जिन लोगों के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष श्रीमती जमुना देवी ने रेत माफिया होने की शिकायत की थी, उन पर कार्रवाई करने की जगह लालबत्ती दे दी गई। उन्होंने सरकार की खामियां गिनाते हुए कहा कि 11 पंचायतों में 341 घोषणाएं की गई थीं, इनमें से 59 अब तक पूरी नहीं हुई हैं। 41 महीनों में 1,00,453 बच्चे कुपोषण से एक साल की उम्र से पहले ही मौत के मुंह में चले गए। प्रदेश 1,94,711 आपराधिक मामले दर्ज कर देश में सबसे अधिक अपराध होने वाला राज्य बन गया। प्रदेश में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या बढ़ी है, पूर्ण साक्षरता का वादा करने वाली सरकार में 63.7 फीसदी ही साक्षरता है, आज भी 58 फीसदी बच्चे प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर स्कूल छोड़ देते हैं। श्री पचौरी ने कहा कि इस सरकार में पांच मेडिकल कालेजों को मान्यता समाप्त हो गई, कृषि की उपेक्षा हुई, सांप्रदायिक दंगे हुए, बुरहानपुर विधायक पर झूठा मुकदमा दर्ज किया और आदिवासियों को बेदखल किया गया।
हाईकमान तय करेगा, चुनाव लड़ूंगा या नहीं
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने कहा कि वह पार्टी के आदेश का पालन करेंगे, उन्हें उम्मीदवार बनाना है या नहीं, इसका निर्णय केन्द्रीय चुनाव समिति और आलाकमान करेगा। यह पूछने पर कि कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची कब तक जारी होगी, उन्होंने कहा कि केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक की तिथि अभी तय नहीं हुई है। उसकी बैठक के बाद ही उम्मीदवारों की सूची जारी हो सकेगी। उन्होंने कहा कि जीतने योग्य उम्मीदवार पार्टी टिकट का हकदार होगा। विधानसभा चुनाव घोषणा पत्र के बारे में श्री पचौरी ने कहा कि प्रदेश चुनाव घोषणा पत्र समिति की तीन बैठकें हो चुकी हैं और हम घोषणा पत्र को अंतिम रूप दे रहे हैं, लेकिन इसे अंतिम स्वरूप तो केन्द्रीय चुनाव घोषणा पत्र समिति ही देगी। कांग्रेस सांसद माणिक सिंह और पूर्व मंत्री प्रेमनारायण ठाकुर के भाजपा में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनाव के समय नेता इधर से उधर होते रहते हैं, इसमें कोई खास बात नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के दबाव में श्रीमती सोनिया गांधी की आमसभा के लिए लाल परेड मैदान नहीं दिया गया।
बजा बिगुल, मप्र में मतदान 25 नवंबर को
चुनाव आयोग ने भाजपा शासित तीन राज्यों सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नवंबर-दिसंबर में कराने की आज घोषणा की, जिसे मिनी आम चुनाव के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने पर फिलहाल कोई फैसला नहीं किया गया है। आयोग ने मध्यप्रदेश में 25 नवंबर, छत्ताीसगढ़ में दो चरणों में 14 और 20 नवंबर, दिल्ली में 29 नवंबर, राजस्थान में चार दिसंबर और मिजोरम में 29 नवंबर को वहां की विधानसभाओं के चुनाव कराने की घोषणा की।
मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने यह घोषणा करते हुए बताया कि इन सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव की मतगणना एक साथ आठ दिसंबर को होगी। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आयोग अभी वहां की स्थिति का मूल्यांकन कर रहा है। मूल्यांकन के मुद्दों में सुरक्षा बलों की उपलब्धता भी शामिल है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि चुनाव आचार संहिता तुरंत प्रभाव से लागू हो जाएगी। जाति और साम्प्रदायिक आधार पर किसी तरह की अपील नहीं की जा सकेगी और मस्जिदों, चर्चो, मंदिरों या अन्य पूजा स्थलों को चुनाव प्रचार के मंच के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि चुनाव संबंधी सभी महत्वपूर्ण घटनाओं और संवदेनशील मतदान केन्द्रों की वीडियो फिल्म बनाई जाएगी। इसके अलावा मतदान केन्द्रों के भीतर डिजिटल कैमरे लगाए जाएंगे। गोपालस्वामी ने यह भी स्पष्ट किया कि इन पांचों राज्यों में परिसीमन के आधार पर निर्धारित चुनाव क्षेत्रों के अनुरूप चुनाव होंगे। मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के जरिए होगा। इन पांचों में से 230 सदस्यीय मध्यप्रदेश, 200 सदस्यीय राजस्थान और 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभाओं का कार्यकाल 14 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। 70 सदस्यीय दिल्ली और 90 सदस्यीय छत्ताीसगढ़ विधानसभाओं का कार्यकाल 17 और 21 दिसंबर को समाप्त होगा। मतदाताओं की संख्या के अनुसार सबसे अधिक तीन करोड़ 62 लाख 19 हजार 481 मतदाता राजस्थान में हैं। मध्यप्रदेश में तीन करोड़ 57 लाख पांच हजार 136, छत्ताीसगढ़ में एक करोड़ 52 लाख सात हजार 734, दिल्ली में एक करोड़ नौ लाख और मिजोरम में छह लाख 11 हजार 124 मतदाता हैं।
मिजोरम में 91 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 85 प्रतिशत, राजस्थान में 84.63 प्रतिशत, दिल्ली में 80 प्रतिशत और छत्ताीसगढ़ में 64.51 प्रतिशत मतदाताओं के पास फोटो पहचान पत्र हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि नक्सल प्रभावित छत्ताीसगढ़ में दो चरणों में चुनाव कराने का निर्णय किया गया है। वहां 14 और 20 नवंबर को चुनाव होंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने यह घोषणा करते हुए बताया कि इन सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव की मतगणना एक साथ आठ दिसंबर को होगी। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आयोग अभी वहां की स्थिति का मूल्यांकन कर रहा है। मूल्यांकन के मुद्दों में सुरक्षा बलों की उपलब्धता भी शामिल है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि चुनाव आचार संहिता तुरंत प्रभाव से लागू हो जाएगी। जाति और साम्प्रदायिक आधार पर किसी तरह की अपील नहीं की जा सकेगी और मस्जिदों, चर्चो, मंदिरों या अन्य पूजा स्थलों को चुनाव प्रचार के मंच के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि चुनाव संबंधी सभी महत्वपूर्ण घटनाओं और संवदेनशील मतदान केन्द्रों की वीडियो फिल्म बनाई जाएगी। इसके अलावा मतदान केन्द्रों के भीतर डिजिटल कैमरे लगाए जाएंगे। गोपालस्वामी ने यह भी स्पष्ट किया कि इन पांचों राज्यों में परिसीमन के आधार पर निर्धारित चुनाव क्षेत्रों के अनुरूप चुनाव होंगे। मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के जरिए होगा। इन पांचों में से 230 सदस्यीय मध्यप्रदेश, 200 सदस्यीय राजस्थान और 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभाओं का कार्यकाल 14 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। 70 सदस्यीय दिल्ली और 90 सदस्यीय छत्ताीसगढ़ विधानसभाओं का कार्यकाल 17 और 21 दिसंबर को समाप्त होगा। मतदाताओं की संख्या के अनुसार सबसे अधिक तीन करोड़ 62 लाख 19 हजार 481 मतदाता राजस्थान में हैं। मध्यप्रदेश में तीन करोड़ 57 लाख पांच हजार 136, छत्ताीसगढ़ में एक करोड़ 52 लाख सात हजार 734, दिल्ली में एक करोड़ नौ लाख और मिजोरम में छह लाख 11 हजार 124 मतदाता हैं।
मिजोरम में 91 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 85 प्रतिशत, राजस्थान में 84.63 प्रतिशत, दिल्ली में 80 प्रतिशत और छत्ताीसगढ़ में 64.51 प्रतिशत मतदाताओं के पास फोटो पहचान पत्र हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि नक्सल प्रभावित छत्ताीसगढ़ में दो चरणों में चुनाव कराने का निर्णय किया गया है। वहां 14 और 20 नवंबर को चुनाव होंगे।
रविवार, 12 अक्टूबर 2008
बुधवार, 8 अक्टूबर 2008
वेतन जहां से, पढ़ाना भी वहीं होगा
भोपाल। 'काम कहीं वेतन कहीं से' की तर्ज पर पद न होने के बावजूद अपनी पसंद के कालेज में पढ़ा रहे प्रोफेसरों की मनमानी अब नहीं चलेगी। अब यदि वेतन चाहिए तो उन्हें उसी कालेज में क्लास लेना होगी, जहां से वेतन निकल रहा है। यह व्यवस्था इसी माह से जारी कर दी गई है। इसके बाद भी किसी कालेज में इस तरह की दोहरी व्यवस्था मिलती है तो प्राचार्य के साथ क्षेत्र के अतिरिक्त संचालक पर भी गाज गिरना तय है।
प्रदेश के सरकारी कालेजों के 150 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रोफेसर इस आदेश के घेरे में आ गए हैं। ऐसे प्रोफेसरों की सर्वाधिक संख्या राजधानी में हैं तो इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा के कालेजों में भी इनकी संख्या बहुतायत में है। हालत यह है कि अतिशेष और संबंधित विषय न होने के बाद भी प्रोफेसर शहरों के कालेजों में कब्जा जमाए हुए हैं। इनके कारण विभाग के आदेशों की तो धज्जियां उड़ ही रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कालेजों में भरपूर शिक्षक होने के बाद भी छात्र-छात्राओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है। बार-बार आदेश जारी करने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने एक अक्टूबर से इस तरह की व्यवस्था पर रोक लगा दी है। अब जिस कालेज से वेतन निकल रहा होगा, शिक्षकों को अध्यापन कार्य भी उसी कालेज में करना होगा। किसी भी स्थिति में दूसरे कालेज में अटैच प्रोफेसर्स को वेतन भुगतान अब नहीं होगा। विशेषकर उन कालेजों में तो कतई पद विरुद्ध वेतन नहीं निकाला जाएगा, जहां पहले से ही निर्धारित संख्या से अधिक प्रोफेसर पदस्थ हैं।
मनमानी करने वालों से किया आग्रह
आयुक्त उच्च शिक्षा ने विभाग की व्यवस्था को ध्वस्त करने वाले प्रोफेसरों से विशेष अंदाज में आग्रह तक कर डाला है। 'असुविधा के लिए खेद है' की तर्ज में दिए आदेश में आयुक्त ने मनमानी करने वालों से निवेदन किया है कि उन्हें यदि वेतन चाहिए तो कृपया उसी कालेज में जाकर पढ़ाएं, जहां से वेतन जारी हो रहा है। ताकि ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को भी आपके अनुभव का लाभ मिल सके।
अतिथि विद्वानों की नियुक्ति भी अटकी
ये शहर पसंद प्रोफेसर खुद तो गांव में जाना नहीं चाहते, कोई दूसरा वहां जाना चाहे तो उसमें भी रोड़ा साबित हो रहे हैं। इनका वेतन गांव के कालेजों से निकलने के कारण आज तक अतिथि विद्वानों की नियुक्ति भी नहीं हो पा रही है। बार-बार आदेश और बजट जारी करने के बाद भी अतिथि विद्वानों की नियुक्ति न होने से नाराज विभाग ने ऐसे सभी कालेजों से दस अक्टूबर तक इस संबंध में जानकारी तलब की है। जानकारी न आने की स्थिति में माना जाएगा कि उस कालेज में पद के विरुद्ध किसी भी शिक्षक का वेतन नहीं निकल रहा है। इसके बाद यदि जांच में यह स्थिति मिलती है तो उसके लिए प्राचार्य के साथ क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक को भी दोषी माना जाएगा।
प्रदेश के सरकारी कालेजों के 150 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रोफेसर इस आदेश के घेरे में आ गए हैं। ऐसे प्रोफेसरों की सर्वाधिक संख्या राजधानी में हैं तो इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा के कालेजों में भी इनकी संख्या बहुतायत में है। हालत यह है कि अतिशेष और संबंधित विषय न होने के बाद भी प्रोफेसर शहरों के कालेजों में कब्जा जमाए हुए हैं। इनके कारण विभाग के आदेशों की तो धज्जियां उड़ ही रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कालेजों में भरपूर शिक्षक होने के बाद भी छात्र-छात्राओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है। बार-बार आदेश जारी करने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने एक अक्टूबर से इस तरह की व्यवस्था पर रोक लगा दी है। अब जिस कालेज से वेतन निकल रहा होगा, शिक्षकों को अध्यापन कार्य भी उसी कालेज में करना होगा। किसी भी स्थिति में दूसरे कालेज में अटैच प्रोफेसर्स को वेतन भुगतान अब नहीं होगा। विशेषकर उन कालेजों में तो कतई पद विरुद्ध वेतन नहीं निकाला जाएगा, जहां पहले से ही निर्धारित संख्या से अधिक प्रोफेसर पदस्थ हैं।
मनमानी करने वालों से किया आग्रह
आयुक्त उच्च शिक्षा ने विभाग की व्यवस्था को ध्वस्त करने वाले प्रोफेसरों से विशेष अंदाज में आग्रह तक कर डाला है। 'असुविधा के लिए खेद है' की तर्ज में दिए आदेश में आयुक्त ने मनमानी करने वालों से निवेदन किया है कि उन्हें यदि वेतन चाहिए तो कृपया उसी कालेज में जाकर पढ़ाएं, जहां से वेतन जारी हो रहा है। ताकि ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को भी आपके अनुभव का लाभ मिल सके।
अतिथि विद्वानों की नियुक्ति भी अटकी
ये शहर पसंद प्रोफेसर खुद तो गांव में जाना नहीं चाहते, कोई दूसरा वहां जाना चाहे तो उसमें भी रोड़ा साबित हो रहे हैं। इनका वेतन गांव के कालेजों से निकलने के कारण आज तक अतिथि विद्वानों की नियुक्ति भी नहीं हो पा रही है। बार-बार आदेश और बजट जारी करने के बाद भी अतिथि विद्वानों की नियुक्ति न होने से नाराज विभाग ने ऐसे सभी कालेजों से दस अक्टूबर तक इस संबंध में जानकारी तलब की है। जानकारी न आने की स्थिति में माना जाएगा कि उस कालेज में पद के विरुद्ध किसी भी शिक्षक का वेतन नहीं निकल रहा है। इसके बाद यदि जांच में यह स्थिति मिलती है तो उसके लिए प्राचार्य के साथ क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक को भी दोषी माना जाएगा।
भोपाल। प्रदेश की आम जनता ही नहीं, केबिनेट मंत्री तक भ्रष्टाचार से परेशान हैं। ऐसा ही एक मामला मंगलवार को सामने आया। अपने विभाग में भ्रष्टाचार से परेशा
भोपाल। 'मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके दिग्गज मंत्रियों को उनके ही गढ़ में घेरने के लिए कांग्रेस के बड़े नेताओं को उनके खिलाफ चुनाव मैदान में उतरना चाहिए।' कांग्रेस को यह सलाह दी है प्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष अजय सिंह 'राहुल' ने। वे यह बात चुनाव समिति की बैठक में भी रख चुके हैं।
श्री सिंह मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय इंदिरा भवन में पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी को भी चुनाव लड़ना चाहिए। यदि वे चुनाव नहीं लड़ते हैं तो इससे गलत संदेश जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को घेरने की रणनीति के सवाल पर अजय सिंह ने कहा कि वे चुनाव समिति की बैठक में कह चुके हैं कि भाजपा के कठिन उम्मीदवारों मुख्यमंत्री, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, गोपाल भार्गव, विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी आदि के खिलाफ काग्रेस के बड़े नेताओं को चुनाव लड़ना चाहिए। इससे हम उन्हें उनके ही घर में घेरे रख सकते हैं। श्री सिंह ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी 1993 में पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के खिलाफ भोजपुर से चुनाव लड़ चुके हैं। इसका नतीजा यह हुआ था कि भोजपुर को छोड़कर आसपास की पांचों सीटें भाजपा हार गई थी। उन्होंने कहा कि वे श्री पटवा के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय पी.वी नरसिम्हा राव से लड़कर टिकट लाए थे। चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ने कहा कि टिकट को लेकर नेताओं में नहीं दावेदारों में विवाद है। उन्होंने कहा कि स्वाभाविक रूप से हर नेता अपने समर्थक को टिकट दिलाने के प्रयास में हैं लेकिन इस बार सिर्फ जीतने वाले उम्मीदवार को ही टिकट मिलेगा। बसपा के सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले को प्रदेश में फेल बताते हुए राहुल ने कहा कि कांग्रेस को पिछले चुनाव में गोंगपा से जितना खतरा हुआ उसके आधे से भी कम बसपा से है।
बसपा से लोगों को सिर्फ टिकट मिल सकता है लेकिन उसके नाम से वोट नहीं। श्री सिंह ने कहा कि सिर्फ 15 फीसदी वोट बसपा, भाजश और गोंगपा में बटेंगे और 35 से 40 फीसदी वोट लेने वाले जीत जाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजश आज की स्थिति में 40 से 56 सीटें प्रभावित करेगी और भाजपा के टिकट तय होने के बाद इनकी संख्या बढ़ भी सकती है। कांग्रेस सांसद माणिक सिंह के भाजपा में शामिल होने पर उन्होंने कहा कि उनके जाने से कांग्रेस अब सातों सीटें जीतेगी और वे अपने क्षेत्र तक में नहीं घुस पाएंगे। उन्होंने कहा कि अधिकांश टिकट 20 अक्टूबर तक तय होने की संभावना है।
श्री सिंह मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय इंदिरा भवन में पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी को भी चुनाव लड़ना चाहिए। यदि वे चुनाव नहीं लड़ते हैं तो इससे गलत संदेश जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को घेरने की रणनीति के सवाल पर अजय सिंह ने कहा कि वे चुनाव समिति की बैठक में कह चुके हैं कि भाजपा के कठिन उम्मीदवारों मुख्यमंत्री, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, गोपाल भार्गव, विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी आदि के खिलाफ काग्रेस के बड़े नेताओं को चुनाव लड़ना चाहिए। इससे हम उन्हें उनके ही घर में घेरे रख सकते हैं। श्री सिंह ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी 1993 में पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के खिलाफ भोजपुर से चुनाव लड़ चुके हैं। इसका नतीजा यह हुआ था कि भोजपुर को छोड़कर आसपास की पांचों सीटें भाजपा हार गई थी। उन्होंने कहा कि वे श्री पटवा के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय पी.वी नरसिम्हा राव से लड़कर टिकट लाए थे। चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ने कहा कि टिकट को लेकर नेताओं में नहीं दावेदारों में विवाद है। उन्होंने कहा कि स्वाभाविक रूप से हर नेता अपने समर्थक को टिकट दिलाने के प्रयास में हैं लेकिन इस बार सिर्फ जीतने वाले उम्मीदवार को ही टिकट मिलेगा। बसपा के सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले को प्रदेश में फेल बताते हुए राहुल ने कहा कि कांग्रेस को पिछले चुनाव में गोंगपा से जितना खतरा हुआ उसके आधे से भी कम बसपा से है।
बसपा से लोगों को सिर्फ टिकट मिल सकता है लेकिन उसके नाम से वोट नहीं। श्री सिंह ने कहा कि सिर्फ 15 फीसदी वोट बसपा, भाजश और गोंगपा में बटेंगे और 35 से 40 फीसदी वोट लेने वाले जीत जाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजश आज की स्थिति में 40 से 56 सीटें प्रभावित करेगी और भाजपा के टिकट तय होने के बाद इनकी संख्या बढ़ भी सकती है। कांग्रेस सांसद माणिक सिंह के भाजपा में शामिल होने पर उन्होंने कहा कि उनके जाने से कांग्रेस अब सातों सीटें जीतेगी और वे अपने क्षेत्र तक में नहीं घुस पाएंगे। उन्होंने कहा कि अधिकांश टिकट 20 अक्टूबर तक तय होने की संभावना है।
कैबिनेट मंत्री भी भ्रष्टाचार से परेशान
भोपाल। प्रदेश की आम जनता ही नहीं, केबिनेट मंत्री तक भ्रष्टाचार से परेशान हैं। ऐसा ही एक मामला मंगलवार को सामने आया। अपने विभाग में भ्रष्टाचार से परेशान खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री अखंड प्रताप सिंह यादव ने उपलोकायुक्त से गुहार लगाई। मंत्री जी इस मामले में राज्य आर्थिक अपराध ब्यूरो के अफसरों से भी समय मांग चुके हैं।
श्री सिंह मंगलवार दोपहर दो बजे लोकायुक्त कार्यालय पहुंचे। वे चुपचाप पहले लोकायुक्त कार्यालय के सचिव से मिले और फिर उपलोकायुक्त चंद्रेश भूषण के पास जा पहुंचे। वहां उन्होंने करीब बीस मिनट उपलोकायुक्त से बंद कमरे में बात की। इसके बाद बाहर निकले और मीडिया से मुखातिब हुए। मंत्री अखंड प्रताप सिंह की सफाई भी काबिले गौर थी। 'मेरे विभाग में अन्नपूर्णा योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन और खाद्यान्नों के उपार्जन में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ किस प्रकार कार्रवाई की जा सकती है, इसी के लिए सलाह लेने में उपलोकायुक्त महोदय के पास आया हूं।' एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, हां मैं केबिनेट मंत्री हूं, कार्रवाई करने में सक्षम हूं, इसी कारण सलाह लेने आया हूं। उनका कहना था कि इस मामले में उन्होंने ईओडब्ल्यू के वरिष्ठ अफसरों से भी समय मांगा है। संभंवत: वे बुधवार को ब्यूरो के अफसरों से मिल सकते हैं। इस मुलाकात में भी वे भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के बारे में विचार करेंगे।
कांग्रेस प्रवक्ता के आरोपों पर भी दी सफाई : खाद्य मंत्री ने उपलोकायुक्त चंद्रेश भूषण को कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा द्वारा खुद पर लगाए आरोपों के बारे में सफाई दी। उन्होंने लोकायुक्त के नाम संबोधित एक संक्षिप्त ज्ञापन भी मीडिया को सौंपा। इसमें लिखा है कि मुझे समाचार पत्रों से ज्ञात हुआ है कि श्री मिश्रा ने उनके खिलाफ कोई शिकायत आपके यहां की है। इस शिकायत पर अविलंब कार्रवाई की जाए और यदि मेरे सहयोग की सूचना हो तो मुझे सूचित कर दिया जाए। इसकी एक कापी उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी भेजी है। मंत्री जी ने इस मुद्दे पर कहा कि मैंने अपने अधिकार का उपयोग करते हुए बंसल पेट्रोल पंप पर की गई कार्रवाई पर अस्थायी स्टे दिया था। ये कार्रवाई मैंने मेरे सामने पेश किए गए तथ्यों के आधार पर की थी। उनका कहना था कि यदि किसी को कोई आपत्ति है तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। उनका कहना था कि मैं यहां सफाई देने नहीं, अपना पक्ष रखने आया हूं। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में उन्हें या उनके विभाग को लोकायुक्त ने कोई नोटिस जारी नहीं किया है।
श्री सिंह मंगलवार दोपहर दो बजे लोकायुक्त कार्यालय पहुंचे। वे चुपचाप पहले लोकायुक्त कार्यालय के सचिव से मिले और फिर उपलोकायुक्त चंद्रेश भूषण के पास जा पहुंचे। वहां उन्होंने करीब बीस मिनट उपलोकायुक्त से बंद कमरे में बात की। इसके बाद बाहर निकले और मीडिया से मुखातिब हुए। मंत्री अखंड प्रताप सिंह की सफाई भी काबिले गौर थी। 'मेरे विभाग में अन्नपूर्णा योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन और खाद्यान्नों के उपार्जन में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ किस प्रकार कार्रवाई की जा सकती है, इसी के लिए सलाह लेने में उपलोकायुक्त महोदय के पास आया हूं।' एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, हां मैं केबिनेट मंत्री हूं, कार्रवाई करने में सक्षम हूं, इसी कारण सलाह लेने आया हूं। उनका कहना था कि इस मामले में उन्होंने ईओडब्ल्यू के वरिष्ठ अफसरों से भी समय मांगा है। संभंवत: वे बुधवार को ब्यूरो के अफसरों से मिल सकते हैं। इस मुलाकात में भी वे भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के बारे में विचार करेंगे।
कांग्रेस प्रवक्ता के आरोपों पर भी दी सफाई : खाद्य मंत्री ने उपलोकायुक्त चंद्रेश भूषण को कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा द्वारा खुद पर लगाए आरोपों के बारे में सफाई दी। उन्होंने लोकायुक्त के नाम संबोधित एक संक्षिप्त ज्ञापन भी मीडिया को सौंपा। इसमें लिखा है कि मुझे समाचार पत्रों से ज्ञात हुआ है कि श्री मिश्रा ने उनके खिलाफ कोई शिकायत आपके यहां की है। इस शिकायत पर अविलंब कार्रवाई की जाए और यदि मेरे सहयोग की सूचना हो तो मुझे सूचित कर दिया जाए। इसकी एक कापी उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी भेजी है। मंत्री जी ने इस मुद्दे पर कहा कि मैंने अपने अधिकार का उपयोग करते हुए बंसल पेट्रोल पंप पर की गई कार्रवाई पर अस्थायी स्टे दिया था। ये कार्रवाई मैंने मेरे सामने पेश किए गए तथ्यों के आधार पर की थी। उनका कहना था कि यदि किसी को कोई आपत्ति है तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। उनका कहना था कि मैं यहां सफाई देने नहीं, अपना पक्ष रखने आया हूं। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में उन्हें या उनके विभाग को लोकायुक्त ने कोई नोटिस जारी नहीं किया है।
चेहरा ढककर चलने वालों की खैर नहीं !
भोपाल। यदि आप राजधानी में चेहरा ढककर चलने के आदी हो गए हैं तो सतर्क हो जाइए। अब आप पुलिस की कार्रवाई से बच नहीं पाएंगे। यातायात पुलिस का राजधानी में बढ़ती लूट की घटनाओं के मद्देनजर चैकिंग अभियान जारी है। इस अभियान में महिलाओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। अभियान के तीसरे दिन मंगलवार को लिंक रोड पर की गई चैकिंग में तीस लोगों के चालान बनाए गए।
चैकिंग अभियान में वैसे पुलिस के निशाने पर पुरुष या युवा वर्ग हैं। इसकी वजह लूट की वारदातों में ज्यादातर युवा वर्ग का होना है। हाल में तीन-चार घटनाएं बाइक सवार उन बदमाशों ने की हैं, जो मुंह पर कपड़ा बांधकर चल रहे थे। तीन दिन में लगभग सौ से अधिक युवक-युवतियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर चुकी है। पुलिस ऐसे युवक-युवतियों के खिलाफ परिचय छुपाने के नाम पर चालानी कार्रवाई कर रही है।
एएसपी ट्रैफिक महेन्द्र सिंह सिकरवार का कहना है कि मोटरयान अधिनियम में मुंह पर कपड़ा बांधकर चलने का नहीं, सिर्फ हेलमेट लगाने का प्रावधान है। 18 साल से कम उम्र के लड़के-लड़कियां वाहन चला रहे हैं। उनके पास लाइसेंस नहीं होता है। ऐसे में उनके खिलाफ बिना लाइसेंस वाहन चलाने के साथ उन्हें वाहन उपलब्ध कराने वाले पर जुर्माना किया जाएगा। फिलहाल तो उन्हें रोककर समझाइश दी जा रही है। उनके नाम, पते भी लिखे जा रहे हैं। इसके बाद उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी बार मुंह पर कपड़ा बांध कर चलते हुए जो युवक-युवतियां मिल रहे हैं, उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस कप्तान के निर्देश हैं कि जो महिलाएं या युवतियां कपड़ा बांधकर चल रही हैं, उनकी चैंकिंग महिला पुलिस अधिकारी से कराई जाए।
चैकिंग तो युवतियों की भी हो रही है, लेकिन हमारा जोर पुरुषों पर है। पिछले दिनों में लूट की कुछ वारदातें मुंह पर कपड़ा बांधकर चल रहे बाइक सवार बदमाशों ने की थी, इसलिए यह अभियान चलाया जा रहा है। जयदीप प्रसाद, एसपी भोपाल
चैकिंग अभियान में वैसे पुलिस के निशाने पर पुरुष या युवा वर्ग हैं। इसकी वजह लूट की वारदातों में ज्यादातर युवा वर्ग का होना है। हाल में तीन-चार घटनाएं बाइक सवार उन बदमाशों ने की हैं, जो मुंह पर कपड़ा बांधकर चल रहे थे। तीन दिन में लगभग सौ से अधिक युवक-युवतियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर चुकी है। पुलिस ऐसे युवक-युवतियों के खिलाफ परिचय छुपाने के नाम पर चालानी कार्रवाई कर रही है।
एएसपी ट्रैफिक महेन्द्र सिंह सिकरवार का कहना है कि मोटरयान अधिनियम में मुंह पर कपड़ा बांधकर चलने का नहीं, सिर्फ हेलमेट लगाने का प्रावधान है। 18 साल से कम उम्र के लड़के-लड़कियां वाहन चला रहे हैं। उनके पास लाइसेंस नहीं होता है। ऐसे में उनके खिलाफ बिना लाइसेंस वाहन चलाने के साथ उन्हें वाहन उपलब्ध कराने वाले पर जुर्माना किया जाएगा। फिलहाल तो उन्हें रोककर समझाइश दी जा रही है। उनके नाम, पते भी लिखे जा रहे हैं। इसके बाद उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी बार मुंह पर कपड़ा बांध कर चलते हुए जो युवक-युवतियां मिल रहे हैं, उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस कप्तान के निर्देश हैं कि जो महिलाएं या युवतियां कपड़ा बांधकर चल रही हैं, उनकी चैंकिंग महिला पुलिस अधिकारी से कराई जाए।
चैकिंग तो युवतियों की भी हो रही है, लेकिन हमारा जोर पुरुषों पर है। पिछले दिनों में लूट की कुछ वारदातें मुंह पर कपड़ा बांधकर चल रहे बाइक सवार बदमाशों ने की थी, इसलिए यह अभियान चलाया जा रहा है। जयदीप प्रसाद, एसपी भोपाल
40 फीसदी मंत्रियों के कट सकते हैं टिकट
नई दिल्ली में नायडू द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल होने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार सुबह प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, संगठन महामंत्री माखन सिंह, सह संगठन मंत्री भगवतशरण माथुर और अरविंद मेनन के साथ विमान से दिल्ली पहुंचे और देर रात भोपाल लौटे। इन नेताओं ने नायडू के समक्ष पार्टी और सरकार द्वारा कराए गए सर्वे तथा आंतरिक आंकलन की रिपोर्ट के साथ संभावित प्रत्याशियों के पैनल पेश किए। संगठन मंत्रियों ने अपने प्रभार के क्षेत्रों का फीडबैक भी दिया। नायडू के साथ हुई इन नेताओं की लंबी चर्चा सर्वे रिपोर्ट और सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों के संभावित उम्मीदवारों पर ही केंद्रित रही। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने की संभावना और प्रत्याशी चयन के लिए कराए गए इन सर्वे की अलग-अलग रिपोर्ट ने पार्टी को चक्कर में डाल रखा है। एक सर्वे जहां एक दर्जन से अधिक मंत्रियों सहित पचास से अधिक विधायकों को बदलने पर पार्टी की सरकार बनने का इशारा कर रहा है, तो सरकारी स्तर पर हुआ सर्वे भाजपा को सबसे बड़ा दल बताते हुए त्रिशंकु विधानसभा के संकेत दे रहा है। छोटे दलों द्वारा हो रहे नुकसान का भी इसमें उल्लेख है।
सर्वे तथा आंतरिक आंकलन बड़े पैमाने पर विधायकों के टिकट काटने की पैरवी कर रहे हैं। इस आधार पर बने संभावित उम्मीदवारों के पैनल के साथ प्रदेश नेतृत्व ने तमाम सर्वे रिपोर्ट सोमवार को वेंकैया नायडू के समक्ष रखी। प्रदेश में रायशुमारी पूरी होने की जानकारी भी दी गई। सूत्रों के अनुसार इस दौरान तय हुआ कि प्रदेश चुनाव समिति की बैठकें 11 से 13 अक्टूबर के बीच रखी जाएं, जिसमें नायडू भी मौजूद रहेंगे। इन बैठकों में पहले से तैयार पैनल और रायशुमारी की रिपोर्ट को सामने रखकर अंतिम रूप से प्रत्याशियों के पैनल बनाए जाएंगे।
सर्वे तथा आंतरिक आंकलन बड़े पैमाने पर विधायकों के टिकट काटने की पैरवी कर रहे हैं। इस आधार पर बने संभावित उम्मीदवारों के पैनल के साथ प्रदेश नेतृत्व ने तमाम सर्वे रिपोर्ट सोमवार को वेंकैया नायडू के समक्ष रखी। प्रदेश में रायशुमारी पूरी होने की जानकारी भी दी गई। सूत्रों के अनुसार इस दौरान तय हुआ कि प्रदेश चुनाव समिति की बैठकें 11 से 13 अक्टूबर के बीच रखी जाएं, जिसमें नायडू भी मौजूद रहेंगे। इन बैठकों में पहले से तैयार पैनल और रायशुमारी की रिपोर्ट को सामने रखकर अंतिम रूप से प्रत्याशियों के पैनल बनाए जाएंगे।
गुरुवार, 2 अक्टूबर 2008
निशाने पर भाजपा, आयोग ने किए हाथ खड़े
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी मंगलवार को कांग्रेस सहित तमाम राजनैतिक दलों के निशाने पर रही। इन पार्टियों ने खुले आम भाजपा पर मतदाताओं को लुभाने, जनप्रतिनिधियों को डराने और सरकारी खजाने को लुटाने की शिकायत करते हुए चुनाव आयोग से तत्काल चुनाव आचार संहिता लगाने की अपील की। लेकिन आयोग ने सभी दलों की बात सुनने के बाद हाथ खड़े कर दिए। उप निर्वाचन आयुक्त आर बालकृष्णन आयोग के कार्यालय में मंगलवार शाम को राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर रहे थे।
श्री बालकृष्णन ने डेढ़ घंटे तक भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा और कम्युनिस्ट पार्टी सहित मान्यता प्राप्त सभी दलों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। प्रदेश कांग्रेस विधि विभाग के अध्यक्ष अधिवक्ता विजय चौधरी और कोषाध्यक्ष एनपी प्रजापति ने मुख्यमंत्री द्वारा लगातार की जा रही घोषणाओं और मतदाता सूची में गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए शीघ्र चुनाव आचार संहिता लगाने का अनुरोध किया। इस पर श्री बालकृष्णन ने उन्हें बताया कि आयोग नामीनेशन से 45 दिन पहले ही आचार संहिता लगा सकता है। मतदाता सूची में गड़बड़ी पर कांग्रेस का कहना था कि उनकी शिकायत पर ही इसे ठीक किया गया। सपा के कार्यालय प्रभारी साहिब लाल गौर ने पार्टी के विधायक डॉ. सुनीलम की पिटाई कर मतदाताओं को डराने, कांग्रेस और भाजपा द्वारा चुनावी सामग्री खरीदने व बाल पेंटिंग कराने और चुनाव के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करने की शिकायत की। इस पर उप निर्वाचन आयुक्त ने साफ कहा कि आचार संहिता लगने से पहले आयोग कुछ नहीं कर सकता। पार्टियों ने सत्ताधारी दल पर चुनावी लाभ के लिए सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का भी आरोप लगाया। विभिन्न दलों के इन आरोपों का वहां मौजूद भाजपा के प्रतिनिधि शांतिलाल लोड़ा ने विरोध किया। उनका कहना था कि इसमें आयोग कुछ नहीं कर सकता। श्री बालकृष्णन ने भी इसे राज्य का मामला बता कुछ करने में असमर्थता जताई। सभी दलों के प्रतिनिधियों ने अंतिम प्रकाशन सूची स्कूलों और पंचायत भवन में चस्पा करने का कहा ताकि लोगों को पता चल सके कि उनका नाम जुड़ा है या नहीं। आयोग ने उनसे कहा कि राजनैतिक दल अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से यह चेक कराएं। पार्टियों का कहना था कि जब नाम जोड़ने के लिए सीधे आवेदन लिए जाते हैं तो चेक भी आयोग ही करे। उप निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि प्रदेश में 14 दिसंबर को नई सरकार बननी है।
पोलिंग एजेंट भी होगा आयोग का : उप निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि जिन क्षेत्रों में राजनैतिक दलों के पास पोलिंग एजेंट नहीं हैं वे वहां की सूची दे दें उनके लिए आयोग केंद्रीय शासन के कर्मचारी को वहां माइको पर्यवेक्षक तैनात करेगा। अधिकांश दलों ने पोलिंग एजेंट के उसी क्षेत्र का रहने वाला होने और पुलिस वेरीफिकेशन का विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि कई आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी के कार्यकर्ता नहीं इस कारण वहां एजेंट की समस्या है।
श्री बालकृष्णन ने डेढ़ घंटे तक भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा और कम्युनिस्ट पार्टी सहित मान्यता प्राप्त सभी दलों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। प्रदेश कांग्रेस विधि विभाग के अध्यक्ष अधिवक्ता विजय चौधरी और कोषाध्यक्ष एनपी प्रजापति ने मुख्यमंत्री द्वारा लगातार की जा रही घोषणाओं और मतदाता सूची में गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए शीघ्र चुनाव आचार संहिता लगाने का अनुरोध किया। इस पर श्री बालकृष्णन ने उन्हें बताया कि आयोग नामीनेशन से 45 दिन पहले ही आचार संहिता लगा सकता है। मतदाता सूची में गड़बड़ी पर कांग्रेस का कहना था कि उनकी शिकायत पर ही इसे ठीक किया गया। सपा के कार्यालय प्रभारी साहिब लाल गौर ने पार्टी के विधायक डॉ. सुनीलम की पिटाई कर मतदाताओं को डराने, कांग्रेस और भाजपा द्वारा चुनावी सामग्री खरीदने व बाल पेंटिंग कराने और चुनाव के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करने की शिकायत की। इस पर उप निर्वाचन आयुक्त ने साफ कहा कि आचार संहिता लगने से पहले आयोग कुछ नहीं कर सकता। पार्टियों ने सत्ताधारी दल पर चुनावी लाभ के लिए सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का भी आरोप लगाया। विभिन्न दलों के इन आरोपों का वहां मौजूद भाजपा के प्रतिनिधि शांतिलाल लोड़ा ने विरोध किया। उनका कहना था कि इसमें आयोग कुछ नहीं कर सकता। श्री बालकृष्णन ने भी इसे राज्य का मामला बता कुछ करने में असमर्थता जताई। सभी दलों के प्रतिनिधियों ने अंतिम प्रकाशन सूची स्कूलों और पंचायत भवन में चस्पा करने का कहा ताकि लोगों को पता चल सके कि उनका नाम जुड़ा है या नहीं। आयोग ने उनसे कहा कि राजनैतिक दल अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से यह चेक कराएं। पार्टियों का कहना था कि जब नाम जोड़ने के लिए सीधे आवेदन लिए जाते हैं तो चेक भी आयोग ही करे। उप निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि प्रदेश में 14 दिसंबर को नई सरकार बननी है।
पोलिंग एजेंट भी होगा आयोग का : उप निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि जिन क्षेत्रों में राजनैतिक दलों के पास पोलिंग एजेंट नहीं हैं वे वहां की सूची दे दें उनके लिए आयोग केंद्रीय शासन के कर्मचारी को वहां माइको पर्यवेक्षक तैनात करेगा। अधिकांश दलों ने पोलिंग एजेंट के उसी क्षेत्र का रहने वाला होने और पुलिस वेरीफिकेशन का विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि कई आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी के कार्यकर्ता नहीं इस कारण वहां एजेंट की समस्या है।
अन्नपूर्णा नहीं, तीन रुपए किलो अनाज
भोपाल। राज्य सरकार द्वारा योजनाओं के प्रचार के लिए उठाए गए खर्चीले कदमों के बावजूद सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं से गांवों के लोग अनजान हैं। लाडली लक्ष्मी और मजदूर सुरक्षा जैसी योजनाओं की बात तो दूर वे यह भी नहीं जानते कि तीन रूपए किलो अनाज उन्हें अन्नपूर्णा योजना के तहत मिल रहा है। जबकि सरकार में बैठी भाजपा इन्हीं योजनाओं के जरिए दोबारा सत्ता में लौटने का सपना संजोए हुए है।
दैनिक जागरण ने राज्य सरकार के चार मंत्रियों के निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर योजनाओं की नब्ज टटोली तो यह सच उजागर हुआ। ये क्षेत्र हैं डॉ. गौरीशकर शेजवार का साची, लक्ष्मीकात शर्मा का सिरोंज, राघवजी भाई का शमशाबाद और करण सिंह वर्मा का इछावर। गावों के लोग योजना का नाम भले ही न जानें, अन्नपूर्णा और जननी एक्सप्रेस जैसी कुछ योजनाओं के लाभ से परिचित है। खास बात यह है कि इन योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए राज्य सरकार ने दीवार लेखन कराने के साथ बड़ी तादाद में पुस्तकें व पैम्पलेट छपवाए और निचले स्तर तक बाटे भी गए।
लाड़ली लक्ष्मी योजना: मुख्यमंत्री की पसंदीदा लाड़ली लक्ष्मी का हाल अपेक्षा के मुताबिक नहीं है। साची के ग्यारसाबाद के प्रकाश की तरह गावों में लोग अन्य योजनाओं की तरह इसके बारे में भी नहीं जानते। गाव में कोई लाड़ली लक्ष्मी है पूछने पर हाल ही में पैदा हुई पहली बेटी के पिता प्रकाश सहित आधा दर्जन गाव वाले इकार में सिर हिलाते हैं। इसी बारे में गाव की आगनवाड़ी कार्यकर्ता से पूछा तो उसने बताया प्रकाश की बेटी पहली लाड़ली लक्ष्मी बनेगी, उसका फार्म भरवाया जा रहा है। शमशाबाद के रतवा गाव के महेश शर्मा की बेटी का फार्म भी जमा होने वाला है। इस गाव की वह दूसरी लाड़ली लक्ष्मी होगी। इन दो लोगों के अलावा कोई गाव वाला लाड़ली लक्ष्मी योजना के बारे में नहीं जानता।
जननी एक्सप्रेस: गाव वाले जानते है तो उस टेलीफोन नंबर को जिसे लगा कर डिलेवरी के लिए अस्पताल ले जाने गाड़ी बुलाई जाती है। सिरोंज के रास्ते में मोटे अक्षरों में जननी एक्सप्रेस नेम प्लेट लिखी बोलेरो गाड़ी दिखी और स्वास्थ्य केंद्रों पर उसे बुलाने के लिए मोबाइल फोन के नंबर। लोग इस सेवा से खुश है। बस इतना है कि वे इस योजना के नाम से परिचित नहीं है।
अन्नपूर्णा योजना: हर गरीब परिवार को तीन रुपए किलो गेंहू और साढ़े चार रुपए किलो चावल देने के लिए शुरू की गई अन्नपूर्णा योजना के नाम से पूछने पर लोग इसे नहीं जानते। तीन रुपए किलो अनाज मिला या नहीं, इस सवाल पर जवाब होता है मिलता है। इस योजना की शिकायत करने वाला कोई नहीं मिला। किसी को परेशानी है तो बस इस बात की कि अनाज मिलने के दिन नियत है। दो माह का अनाज एकमुश्त मिल रहा है। इछावर विधानसभा क्षेत्र के पालखेड़ी के प्रेम सिंह और सिरोंज के चितावर के रामकुमार जरूर कहते है कि परमिट नहीं बना।
काम मिला नहीं दस
रुपए और चले गए
सिरोंज क्षेत्र के ग्राम औराखेड़ी के खुमान सिंह ने यह टिप्पणी रोजगार गारटी योजना के बारे में की थी। उसके अनुसार जॉब कार्ड बना है पर काम नहीं मिल रहा। सरपंच कहते है कि दीवाली के समय काम खोलेंगे। खुमान सिंह कहता है उम्मीद थी कि वाटरशेड में काम निकलेगा लेकिन मिला नहीं। उसे काम नहीं मिलने के साथ इस बात का रज है कि पंजीयन के लिए दस रुपए और जेब से चले गए। वह नहीं जानता कि यह राशि मजदूर सुरक्षा योजना के लिए ली गई है। मुख्यमंत्री की दूसरी पसंदीदा योजना मजदूर सुरक्षा योजना की हकीकत भी यही है। जिसके लिए पंजीयन तो हुआ लेकिन लोगों को पता नहीं इसका लाभ उन्हें कैसे मिलेगा।
दैनिक जागरण ने राज्य सरकार के चार मंत्रियों के निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर योजनाओं की नब्ज टटोली तो यह सच उजागर हुआ। ये क्षेत्र हैं डॉ. गौरीशकर शेजवार का साची, लक्ष्मीकात शर्मा का सिरोंज, राघवजी भाई का शमशाबाद और करण सिंह वर्मा का इछावर। गावों के लोग योजना का नाम भले ही न जानें, अन्नपूर्णा और जननी एक्सप्रेस जैसी कुछ योजनाओं के लाभ से परिचित है। खास बात यह है कि इन योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए राज्य सरकार ने दीवार लेखन कराने के साथ बड़ी तादाद में पुस्तकें व पैम्पलेट छपवाए और निचले स्तर तक बाटे भी गए।
लाड़ली लक्ष्मी योजना: मुख्यमंत्री की पसंदीदा लाड़ली लक्ष्मी का हाल अपेक्षा के मुताबिक नहीं है। साची के ग्यारसाबाद के प्रकाश की तरह गावों में लोग अन्य योजनाओं की तरह इसके बारे में भी नहीं जानते। गाव में कोई लाड़ली लक्ष्मी है पूछने पर हाल ही में पैदा हुई पहली बेटी के पिता प्रकाश सहित आधा दर्जन गाव वाले इकार में सिर हिलाते हैं। इसी बारे में गाव की आगनवाड़ी कार्यकर्ता से पूछा तो उसने बताया प्रकाश की बेटी पहली लाड़ली लक्ष्मी बनेगी, उसका फार्म भरवाया जा रहा है। शमशाबाद के रतवा गाव के महेश शर्मा की बेटी का फार्म भी जमा होने वाला है। इस गाव की वह दूसरी लाड़ली लक्ष्मी होगी। इन दो लोगों के अलावा कोई गाव वाला लाड़ली लक्ष्मी योजना के बारे में नहीं जानता।
जननी एक्सप्रेस: गाव वाले जानते है तो उस टेलीफोन नंबर को जिसे लगा कर डिलेवरी के लिए अस्पताल ले जाने गाड़ी बुलाई जाती है। सिरोंज के रास्ते में मोटे अक्षरों में जननी एक्सप्रेस नेम प्लेट लिखी बोलेरो गाड़ी दिखी और स्वास्थ्य केंद्रों पर उसे बुलाने के लिए मोबाइल फोन के नंबर। लोग इस सेवा से खुश है। बस इतना है कि वे इस योजना के नाम से परिचित नहीं है।
अन्नपूर्णा योजना: हर गरीब परिवार को तीन रुपए किलो गेंहू और साढ़े चार रुपए किलो चावल देने के लिए शुरू की गई अन्नपूर्णा योजना के नाम से पूछने पर लोग इसे नहीं जानते। तीन रुपए किलो अनाज मिला या नहीं, इस सवाल पर जवाब होता है मिलता है। इस योजना की शिकायत करने वाला कोई नहीं मिला। किसी को परेशानी है तो बस इस बात की कि अनाज मिलने के दिन नियत है। दो माह का अनाज एकमुश्त मिल रहा है। इछावर विधानसभा क्षेत्र के पालखेड़ी के प्रेम सिंह और सिरोंज के चितावर के रामकुमार जरूर कहते है कि परमिट नहीं बना।
काम मिला नहीं दस
रुपए और चले गए
सिरोंज क्षेत्र के ग्राम औराखेड़ी के खुमान सिंह ने यह टिप्पणी रोजगार गारटी योजना के बारे में की थी। उसके अनुसार जॉब कार्ड बना है पर काम नहीं मिल रहा। सरपंच कहते है कि दीवाली के समय काम खोलेंगे। खुमान सिंह कहता है उम्मीद थी कि वाटरशेड में काम निकलेगा लेकिन मिला नहीं। उसे काम नहीं मिलने के साथ इस बात का रज है कि पंजीयन के लिए दस रुपए और जेब से चले गए। वह नहीं जानता कि यह राशि मजदूर सुरक्षा योजना के लिए ली गई है। मुख्यमंत्री की दूसरी पसंदीदा योजना मजदूर सुरक्षा योजना की हकीकत भी यही है। जिसके लिए पंजीयन तो हुआ लेकिन लोगों को पता नहीं इसका लाभ उन्हें कैसे मिलेगा।
लोहे के दलालों पर आयकर का छापा
भोपाल। आयकर विभाग ने लोहे के दलाल और व्यापारियों की मिलीभगत से चल रहा 120 करोड़ रुपए का गोरखधंधा पकड़ा है। यह लोग कागजों पर लोहे की खदीद-फरोख्त बताकर आयकर को चूना लगा रहे थे। इन दलालों और व्यापारियों से अब तक 40 करोड़ से ज्यादा की आयकर की चोरी का खुलासा हुआ है। विस्तृत जांच-पड़ताल में यह आंकड़ा और ज्यादा बढ़ सकता है।
आयकर विभाग ने मंगलवार को लोहे के पांच दलालों के एक दर्जन ठिकानों पर छापे के कार्रवाई की थी। सूत्रों के मुताबिक पीयूष गुप्ता, भारत कोठारी, श्री खंडेलवाल और श्री आहूजा शामिल है। यह सभी दलाल और व्यापारी इंदौर के हैं। दो दिन से चल रही इस कार्रवाई में आयकर विभाग ने करोड़ों रुपए का गोरखधंधा उजागर किया है। छापे में बड़ी मात्रा में दस्तावेज और प्रापर्टी के कागजात मिले हैं। छापे के लिए भोपाल मुख्यालय से आयकर की टीम इंदौर गई है। भोपाल और इंदौर की संयुक्त यह कार्रवाई देर रात तक जारी थी। इन व्यापारियों ने दो करोड़ रुपए सरेंडर कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक यह दलाल और व्यापारी कागजों पर लोहे की खरीद फरोख्त कर आयकर को चूना लगा रहे थे। यह दलाल व्यापारियों को फर्जी बिल जारी करते थे। सूत्र बताते हैं कि इसमें इंदौर की एक प्रतिष्ठित लोहा कंपनी भी शामिल बताई जाती है। ये व्यापारी और कंपनी इन बिलों को अपने दस्तावेजों में लगाकर उतनी राशि का खर्च बता देते थे। जिससे वह राशि खर्च में आ जाती थी और व्यापारी आयकर बचाने में कामयाब हो जाते थे। व्यापारियों और दलालों की मिलीभगत से यह गोरखधंधा सालों से चल रहा था। हालांकि इनमें से कई दलाल नियमित रुप से अपने रिटर्न दाखिल करते थे, लेकिन उसमें भी कई अनियमितताएं पाई गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, आयकर विभाग अब इन व्यापारियों और दलालों के यहां से मिले दस्तावेजों की विस्तृत जांच पड़ताल करेगा। उनके ठिकानों से करोड़ों रुपए की प्रापर्टी के कागजात,अब यह पता लगाया जाएगा कि इन दलालों ने कितने व्यापारियों और कंपनियों को बोगस बिल जारी कर आयकर को चूना लगाया है। सूत्रों के मुताबिक ऐसे व्यापारियों पर अब शिकंजा कसा जाएगा।
आयकर विभाग ने मंगलवार को लोहे के पांच दलालों के एक दर्जन ठिकानों पर छापे के कार्रवाई की थी। सूत्रों के मुताबिक पीयूष गुप्ता, भारत कोठारी, श्री खंडेलवाल और श्री आहूजा शामिल है। यह सभी दलाल और व्यापारी इंदौर के हैं। दो दिन से चल रही इस कार्रवाई में आयकर विभाग ने करोड़ों रुपए का गोरखधंधा उजागर किया है। छापे में बड़ी मात्रा में दस्तावेज और प्रापर्टी के कागजात मिले हैं। छापे के लिए भोपाल मुख्यालय से आयकर की टीम इंदौर गई है। भोपाल और इंदौर की संयुक्त यह कार्रवाई देर रात तक जारी थी। इन व्यापारियों ने दो करोड़ रुपए सरेंडर कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक यह दलाल और व्यापारी कागजों पर लोहे की खरीद फरोख्त कर आयकर को चूना लगा रहे थे। यह दलाल व्यापारियों को फर्जी बिल जारी करते थे। सूत्र बताते हैं कि इसमें इंदौर की एक प्रतिष्ठित लोहा कंपनी भी शामिल बताई जाती है। ये व्यापारी और कंपनी इन बिलों को अपने दस्तावेजों में लगाकर उतनी राशि का खर्च बता देते थे। जिससे वह राशि खर्च में आ जाती थी और व्यापारी आयकर बचाने में कामयाब हो जाते थे। व्यापारियों और दलालों की मिलीभगत से यह गोरखधंधा सालों से चल रहा था। हालांकि इनमें से कई दलाल नियमित रुप से अपने रिटर्न दाखिल करते थे, लेकिन उसमें भी कई अनियमितताएं पाई गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, आयकर विभाग अब इन व्यापारियों और दलालों के यहां से मिले दस्तावेजों की विस्तृत जांच पड़ताल करेगा। उनके ठिकानों से करोड़ों रुपए की प्रापर्टी के कागजात,अब यह पता लगाया जाएगा कि इन दलालों ने कितने व्यापारियों और कंपनियों को बोगस बिल जारी कर आयकर को चूना लगाया है। सूत्रों के मुताबिक ऐसे व्यापारियों पर अब शिकंजा कसा जाएगा।
रविवार, 28 सितंबर 2008
घुसपैठ पर स्पष्टीकरण दे सेना
गृह मंत्रालय ने सेना से इस बात का स्पष्टीकरण मांगा है कि उसे इस बात का पता कैसे नहीं लगा कि नियंत्रण रेखा पर लगी कंटीली बाड़ के बावजूद हाल ही में नागरिकों ने वहां से घुसपैठ की है।
मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सेना के अधिकारियों से उस घटना का जवाब तलब किया गया है, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के तीन परिवारों ने भारतीय क्षेत्र के 10 किलोमीटर भीतर तक आ कर पुलिस चौकी में अपने आने की सूचना दी।
गृह मंत्रालय ने इस घटना के संदर्भ में सीमा की चौकसी और नियंत्रण रेखा पर लगाई गई कंटीली बाड़ की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बच्चे और उम्र दराज लोग इसे पार करके आ रहे हैं और वहां तैनात लोगों को इसकी भनक तक नहीं लग रही है।
सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्रालय के द्वारा गृह मंत्रालय के इस पत्र को सेना को भेजा गया है। इस बारे में टिप्पणी करने के लिए सेना की ओर से कोई उपलब्ध नहीं हुआ। उत्तरी कश्मीर के कारनाह संभाग के तंगधार क्षेत्र से 26 सितंबर को तड़के पांच बच्चों और एक उम्र दराज महिला सहित 12 लोग नियंत्रण रेखा पार करके भारतीय क्षेत्र में आ गए थे।
जम्मू कश्मीर गृह विभाग ने इस घटना के बारे में केन्द्रीय गृह मंत्रालय को सूचित किया है। 12 लोगों के इस काफिले द्वारा नियंत्रण रेखा पर लगाई गई कंटीली बाड़ को पार करने से सब अचरज में हैं। उससे भी बड़ी हैरत यह है कि नियंत्रण रेखा की निगरानी करने वाले भारतीय जवानों की भी इन पर नज़र नहीं गई। इस काफिले में आठ महीने के एक शिशु सहित पांच बच्चे और एक वृद्धा शामिल हैं।
पुलिस चौकी पर आने पर इन लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। इनमें से कुछ पाकिस्तानी नागरिक हैं। बिना उचित दस्तावेजों के भारतीय सीमा में प्रवेश करने के लिए उनके विरूद्ध उचित कार्रवाई की जा रही है। सेना इस पूरे घटनाक्रम में अपनी कमी पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है। उसके अधिकारी अनौपचारिक तौर पर कह रहे हैं कि इन परिवारों ने नियंत्रण रेखा के समीप बाहरी चौकी में रिपोर्ट किया था। लेकिन पुलिस इस दावे का खंडन कर रही है।
इन परिवारों ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा है कि 1988 से 1996 के बीच वे पाक अधिकृत कश्मीर चले गए थे और वहीं विवाह करके बस गए थे। सूत्रों का कहना है कि नागरिक घुसपैठ का यह कोई अलग थलग मामला नहीं है। उनका दावा है कि नागरिकों द्वारा नियंत्रण रेखा से घुसपैठ करना सामान्य सी बात हो गई है। उन्होंने बताया कि 2006 में उत्तरी कश्मीर में ऐसी घटनाएं शुरु हुई थीं लेकिन पुलिस द्वारा ऐसा करने वालों के खिलाफ मामले दर्ज करने पर उन पर रोक लग गई। हालांकि, उस घटना के दो साल बाद भी केन्द्रीय गृह मंत्रालय पाक अधिकृत कश्मीर से होने वाली ऐसी परिवारिक घुसपैठ के खिलाफ कोई नीति बनाने में अभी तक असफल रहा है।
मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सेना के अधिकारियों से उस घटना का जवाब तलब किया गया है, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के तीन परिवारों ने भारतीय क्षेत्र के 10 किलोमीटर भीतर तक आ कर पुलिस चौकी में अपने आने की सूचना दी।
गृह मंत्रालय ने इस घटना के संदर्भ में सीमा की चौकसी और नियंत्रण रेखा पर लगाई गई कंटीली बाड़ की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बच्चे और उम्र दराज लोग इसे पार करके आ रहे हैं और वहां तैनात लोगों को इसकी भनक तक नहीं लग रही है।
सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्रालय के द्वारा गृह मंत्रालय के इस पत्र को सेना को भेजा गया है। इस बारे में टिप्पणी करने के लिए सेना की ओर से कोई उपलब्ध नहीं हुआ। उत्तरी कश्मीर के कारनाह संभाग के तंगधार क्षेत्र से 26 सितंबर को तड़के पांच बच्चों और एक उम्र दराज महिला सहित 12 लोग नियंत्रण रेखा पार करके भारतीय क्षेत्र में आ गए थे।
जम्मू कश्मीर गृह विभाग ने इस घटना के बारे में केन्द्रीय गृह मंत्रालय को सूचित किया है। 12 लोगों के इस काफिले द्वारा नियंत्रण रेखा पर लगाई गई कंटीली बाड़ को पार करने से सब अचरज में हैं। उससे भी बड़ी हैरत यह है कि नियंत्रण रेखा की निगरानी करने वाले भारतीय जवानों की भी इन पर नज़र नहीं गई। इस काफिले में आठ महीने के एक शिशु सहित पांच बच्चे और एक वृद्धा शामिल हैं।
पुलिस चौकी पर आने पर इन लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। इनमें से कुछ पाकिस्तानी नागरिक हैं। बिना उचित दस्तावेजों के भारतीय सीमा में प्रवेश करने के लिए उनके विरूद्ध उचित कार्रवाई की जा रही है। सेना इस पूरे घटनाक्रम में अपनी कमी पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है। उसके अधिकारी अनौपचारिक तौर पर कह रहे हैं कि इन परिवारों ने नियंत्रण रेखा के समीप बाहरी चौकी में रिपोर्ट किया था। लेकिन पुलिस इस दावे का खंडन कर रही है।
इन परिवारों ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा है कि 1988 से 1996 के बीच वे पाक अधिकृत कश्मीर चले गए थे और वहीं विवाह करके बस गए थे। सूत्रों का कहना है कि नागरिक घुसपैठ का यह कोई अलग थलग मामला नहीं है। उनका दावा है कि नागरिकों द्वारा नियंत्रण रेखा से घुसपैठ करना सामान्य सी बात हो गई है। उन्होंने बताया कि 2006 में उत्तरी कश्मीर में ऐसी घटनाएं शुरु हुई थीं लेकिन पुलिस द्वारा ऐसा करने वालों के खिलाफ मामले दर्ज करने पर उन पर रोक लग गई। हालांकि, उस घटना के दो साल बाद भी केन्द्रीय गृह मंत्रालय पाक अधिकृत कश्मीर से होने वाली ऐसी परिवारिक घुसपैठ के खिलाफ कोई नीति बनाने में अभी तक असफल रहा है।
सरकार तैयार, फरवरी में होगा आर या पार
कांग्रेस नेतृत्व वाली संप्रग सरकार फरवरी में लोकसभा चुनाव की तरफ बढ़ रही है। भाजपा, वामपंथी दलों और बसपा के तीखे तेवरों और सहयोगी सपा के बदले अंदाज से कांग्रेस अक्टूबर में बुलाए गए सत्र के दौरान ही लोकसभा भंग कर नए चुनावों की घोषणा करने पर गंभीरता से मंथन कर रही है। अगर किसी तरह यह संसद सत्र चलाने में सरकार सफल भी रही तो दिसंबर में चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद भी सरकार लोकसभा चुनावों की घोषणा के लिए तैयार है।
कांग्रेस व सरकार के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के विदेश यात्रा से वापस आने तक कांग्रेस के रणनीतिकार पूरी योजना तैयार कर लेंगे। प्रधानमंत्री से विमर्श करने के बाद फाल्गुन से पहले यानी फरवरी तक चुनाव कराने की योजना पर मुहर लगा दी जाएगी। दरअसल, 17 अक्टूबर से प्रस्तावित संसद सत्र को लेकर कांग्रेस व सरकार के रणनीतिकार सांसत में हैं। आंतरिक सुरक्षा और महंगाई जैसे मुद्दों पर भाजपा सान चढ़ा ही रही है। चार साल तक सरकार को बाहर से समर्थन देते रहे वामपंथी दल भी घायल शेर की तरह कांग्रेस से हिसाब चुकता करने को मचल रहे हैं। चिर प्रतिद्वंदी सपा के साथ गई कांग्रेस से बसपा तो खार खाए बैठे ही है। ईसाइयों पर हमले, महंगाई व विदेश नीति जैसे मोर्चो पर अपने इन पूर्व सहयोगियों से निपटना संप्रग के लिए मुश्किल होगा।
सरकार के लिए इससे भी ज्यादा दिक्कत समाजवादी पार्टी के बदले अंदाज से हुई है। जिस तरह से सपा ने केंद्र व कांग्रेस पर हमला बोला है, उसके बाद सरकार अपने नए 'संकटमोचक सहयोगी' को लेकर भी सशंकित है। इस सत्र में वैसे भी सरकार के पास कोई खास काम नहीं है। भू-अधिग्रहण संशोधन जैसा संविधान संशोधन विधेयक जरूर एजेंडे पर है। इसका पारित न होना सरकार को मुश्किल में डाल सकता है।
उधर, राज्यसभा में तो भाजपा, वामपंथी दल, बसपा व दूसरे पाले में खड़ी पार्टियों के समक्ष कांग्रेस ही नहीं, बल्कि पूरा संप्रग अल्पमत में है।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ पार्टी व सरकार के शीर्ष नेताओं के साथ इन हालात पर विषद मंत्रणा हो चुकी है। कांग्रेस अक्टूबर वाला सत्र ज्यादा हंगामी होने पर लोकसभा भंग करने के लिए तैयार है। इन हालात में चुनाव आयोग को तैयारियों के लिए तीन माह चाहिए होंगे। इस तरह फरवरी तक सरकार खिंच जाएगी। वैसे भी कांग्रेस चाहती है कि यह संसद का आखिरी सत्र हो। अगर मई में चुनाव होते हैं तो उसे लेखानुदान लाना पड़ेगा। इससे वह बचना चाहती है।
दूसरी परिस्थिति में अगर सत्र चल भी जाए तो मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और जम्मू कश्मीर विधानसभाओं के चुनाव होने के बाद दिसंबर में लोकसभा भंग कर दिए जाने का विकल्प है। इसके बाद भी फरवरी तक चुनाव हो जाएंगे। दरअसल, कांग्रेस के रणनीतिकार मान रहे हैं कि तब तक परमाणु करार को मुकाम तक पहुंचाने का तमगा सरकार के पास होगा। इधर विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मध्य प्रदेश व राजस्थान से अच्छी खबर की आशा है, जो लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी व गठबंधन का उत्साह बढ़ाएगी।
कांग्रेस व सरकार के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के विदेश यात्रा से वापस आने तक कांग्रेस के रणनीतिकार पूरी योजना तैयार कर लेंगे। प्रधानमंत्री से विमर्श करने के बाद फाल्गुन से पहले यानी फरवरी तक चुनाव कराने की योजना पर मुहर लगा दी जाएगी। दरअसल, 17 अक्टूबर से प्रस्तावित संसद सत्र को लेकर कांग्रेस व सरकार के रणनीतिकार सांसत में हैं। आंतरिक सुरक्षा और महंगाई जैसे मुद्दों पर भाजपा सान चढ़ा ही रही है। चार साल तक सरकार को बाहर से समर्थन देते रहे वामपंथी दल भी घायल शेर की तरह कांग्रेस से हिसाब चुकता करने को मचल रहे हैं। चिर प्रतिद्वंदी सपा के साथ गई कांग्रेस से बसपा तो खार खाए बैठे ही है। ईसाइयों पर हमले, महंगाई व विदेश नीति जैसे मोर्चो पर अपने इन पूर्व सहयोगियों से निपटना संप्रग के लिए मुश्किल होगा।
सरकार के लिए इससे भी ज्यादा दिक्कत समाजवादी पार्टी के बदले अंदाज से हुई है। जिस तरह से सपा ने केंद्र व कांग्रेस पर हमला बोला है, उसके बाद सरकार अपने नए 'संकटमोचक सहयोगी' को लेकर भी सशंकित है। इस सत्र में वैसे भी सरकार के पास कोई खास काम नहीं है। भू-अधिग्रहण संशोधन जैसा संविधान संशोधन विधेयक जरूर एजेंडे पर है। इसका पारित न होना सरकार को मुश्किल में डाल सकता है।
उधर, राज्यसभा में तो भाजपा, वामपंथी दल, बसपा व दूसरे पाले में खड़ी पार्टियों के समक्ष कांग्रेस ही नहीं, बल्कि पूरा संप्रग अल्पमत में है।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ पार्टी व सरकार के शीर्ष नेताओं के साथ इन हालात पर विषद मंत्रणा हो चुकी है। कांग्रेस अक्टूबर वाला सत्र ज्यादा हंगामी होने पर लोकसभा भंग करने के लिए तैयार है। इन हालात में चुनाव आयोग को तैयारियों के लिए तीन माह चाहिए होंगे। इस तरह फरवरी तक सरकार खिंच जाएगी। वैसे भी कांग्रेस चाहती है कि यह संसद का आखिरी सत्र हो। अगर मई में चुनाव होते हैं तो उसे लेखानुदान लाना पड़ेगा। इससे वह बचना चाहती है।
दूसरी परिस्थिति में अगर सत्र चल भी जाए तो मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और जम्मू कश्मीर विधानसभाओं के चुनाव होने के बाद दिसंबर में लोकसभा भंग कर दिए जाने का विकल्प है। इसके बाद भी फरवरी तक चुनाव हो जाएंगे। दरअसल, कांग्रेस के रणनीतिकार मान रहे हैं कि तब तक परमाणु करार को मुकाम तक पहुंचाने का तमगा सरकार के पास होगा। इधर विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मध्य प्रदेश व राजस्थान से अच्छी खबर की आशा है, जो लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी व गठबंधन का उत्साह बढ़ाएगी।
मप्र में आडवाणी नहीं बिकाऊ माल
भोपाल। भाजपा ने कुछ साल पहले नारा दिया था 'सब पर भारी अटलबिहारी'। यह नारा ही अब उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी पर भारी पड़ रहा है। पार्टी के सबसे बड़े नेता आडवाणी मध्यप्रदेश में बिकाऊ माल नहीं है। उनसे ज्यादा बिक्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की हो रही है।
भाजपा प्रदेश कार्यालय के सामने लगी प्रचार सामग्री की दुकानें तो यही हकीकत उजागर कर रही हैं। इन दुकानों पर जो सामग्री है, वह सब पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी पर आधारित हैं। विधानसभा चुनाव मध्यप्रदेश में होना है इसलिए इन दुकानों पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विभिन्न मुद्रा में पोस्टर भी हैं। परंपरागत रूप से बिल्ले, बैच, गमछा, बिंदी और अन्य प्रचार सामग्री भी इन दुकानों पर है। यहां तैनात रमेश बताता है कि भाजपा में सबसे अधिक मांग अटलबिहारी वाजपेयी वाले पोस्टर, डंगलर तथा स्टीकरों की है। आडवाणी क्यों नहीं? पूछने पर वे बताते हैं कि उनकी डिमांड अभी तक नहीं आई है। आर्डर पर उनकी सामग्री भी छपवाई जा सकती है। प्रचार सामग्री का यह सच भाजपा की उन तैयारियों के उलट है, जिसमें पार्टी ने हर मतदान केंद्र तक आडवाणी का पोस्टर व कट आउट पहुंचाने के निर्देश प्रदेश इकाई को दिए हैं।
लोकसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए विधानसभा के मैदान में उतर रही भाजपा आडवाणी को वाजपेयी की तरह पार्टी का सर्वमान्य नेता साबित करना चाहती है। यही वजह है कि प्रदेश के चुनाव प्रभारी और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने अपनी कार्ययोजना में आडवाणी पर केंद्रित प्रचार सामग्री मतदान केंद्रों तक पहुंचाने का निर्देश दिया है। कार्यकर्ता महाकुंभ के दौरान उनके इस निर्देश का पालन भी हुआ। कार्यकर्ताओं को दिए गए थैले में आडवाणी का एक पोस्टर था तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर केंद्रित पुस्तक। इस थैले के एक ओर अकेले आडवाणी का चित्र बना है। दूसरी तरफ भाजपाध्यक्ष राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के चित्र छापे गए हैं। पार्टी की इतने प्रयासों के बावजूद प्रचार सामग्री बेचने वालों को आडवाणी के ग्राहक नहीं मिल रहे। शीला इंटरप्राइजेस के नारायण बताते हैं कि अभी उन्होंने अटल पर केंद्रित सामग्री के अलावा शिवराज सिंह चौहान के पोस्टर छपवाए हैं। कुछ सामग्री में अटल के साथ आडवाणी भी हैं, लेकिन केवल आडवाणी वाली सामग्री की मांग अभी तक नहीं आई है।
आडवाणी के साथ लगाना पड़े अटल के कटआउट
कार्यकर्ता महाकुंभ के दौरान भाजपा ने आडवाणी को प्रोजेक्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। महाकुंभ स्थल के चारों ओर के रास्तों पर आडवाणी, राजनाथ, शिवराज और तोमर के कट आउट लगाए गए थे। कुछ स्थानों पर इस दौरान अटलबिहारी वाजपेयी के कट आउट भी दिखे।
भाजपा प्रदेश कार्यालय के सामने लगी प्रचार सामग्री की दुकानें तो यही हकीकत उजागर कर रही हैं। इन दुकानों पर जो सामग्री है, वह सब पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी पर आधारित हैं। विधानसभा चुनाव मध्यप्रदेश में होना है इसलिए इन दुकानों पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विभिन्न मुद्रा में पोस्टर भी हैं। परंपरागत रूप से बिल्ले, बैच, गमछा, बिंदी और अन्य प्रचार सामग्री भी इन दुकानों पर है। यहां तैनात रमेश बताता है कि भाजपा में सबसे अधिक मांग अटलबिहारी वाजपेयी वाले पोस्टर, डंगलर तथा स्टीकरों की है। आडवाणी क्यों नहीं? पूछने पर वे बताते हैं कि उनकी डिमांड अभी तक नहीं आई है। आर्डर पर उनकी सामग्री भी छपवाई जा सकती है। प्रचार सामग्री का यह सच भाजपा की उन तैयारियों के उलट है, जिसमें पार्टी ने हर मतदान केंद्र तक आडवाणी का पोस्टर व कट आउट पहुंचाने के निर्देश प्रदेश इकाई को दिए हैं।
लोकसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए विधानसभा के मैदान में उतर रही भाजपा आडवाणी को वाजपेयी की तरह पार्टी का सर्वमान्य नेता साबित करना चाहती है। यही वजह है कि प्रदेश के चुनाव प्रभारी और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने अपनी कार्ययोजना में आडवाणी पर केंद्रित प्रचार सामग्री मतदान केंद्रों तक पहुंचाने का निर्देश दिया है। कार्यकर्ता महाकुंभ के दौरान उनके इस निर्देश का पालन भी हुआ। कार्यकर्ताओं को दिए गए थैले में आडवाणी का एक पोस्टर था तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर केंद्रित पुस्तक। इस थैले के एक ओर अकेले आडवाणी का चित्र बना है। दूसरी तरफ भाजपाध्यक्ष राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के चित्र छापे गए हैं। पार्टी की इतने प्रयासों के बावजूद प्रचार सामग्री बेचने वालों को आडवाणी के ग्राहक नहीं मिल रहे। शीला इंटरप्राइजेस के नारायण बताते हैं कि अभी उन्होंने अटल पर केंद्रित सामग्री के अलावा शिवराज सिंह चौहान के पोस्टर छपवाए हैं। कुछ सामग्री में अटल के साथ आडवाणी भी हैं, लेकिन केवल आडवाणी वाली सामग्री की मांग अभी तक नहीं आई है।
आडवाणी के साथ लगाना पड़े अटल के कटआउट
कार्यकर्ता महाकुंभ के दौरान भाजपा ने आडवाणी को प्रोजेक्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। महाकुंभ स्थल के चारों ओर के रास्तों पर आडवाणी, राजनाथ, शिवराज और तोमर के कट आउट लगाए गए थे। कुछ स्थानों पर इस दौरान अटलबिहारी वाजपेयी के कट आउट भी दिखे।
मां भवानी की उपासना का पर्व कल से
भोपाल। मां भवानी की उपासना का पर्व शारदेय नवरात्रि मंगलवार से शुरू हो जाएगा। इसी दिन शाम को घट पूजा के साथ शहर भर में झांकियां रंग बिरंगी रोशनी से झिलमिलाने लगेंगी। नवरात्रि शुरू होने के साथ ही सड़कों के अलावा बाजारों में भी चहल-पहल नजर आएगी। पितृपक्ष के दौरान लोग कपड़ा, आभूषण तथा वाहन आदि की खरीद से बचते रहे। नवरात्रि पर्व के शुरू हो जाने के साथ ही शुभ मुहूर्त से लोग खरीदारी फिर शुरू करेंगे। पं. अरविंद तिवारी ने बताया कि नवरात्रि में नवग्रह से संबंधित दोषों, विविध प्रकार के अशुभ योग, अरिष्ट, कालसर्प दोष, मंगलदोष, अस्त, वक्री, अशुभ स्थिति, साढ़ेसाती, ढैया, अशुभ दशाओं के दुष्प्रभावों को दूर करने की उपासना की जाती है। वहीं ग्रहों के शुभ प्रभावों में वृद्धिकारक पूजा-उपासनाएं एवं अन्य ज्योतिषीय कर्म किए जा सकते है। उन्होंने घट स्थापना के संबंध में बताया कि घट स्थापना दिन में की जाती है। उस दिन प्रात:काल स्नान करके लाल आसन पर पूर्व की ओर मुंह करके बैठना चाहिए। पूजा सामग्री जिसमें रोली, मौली, केसर, सुपारी, चावल, जौ, सुगंधित पुष्प, इलायची, लौंग, पान, सिन्दूर, दूध, दही, शहद, गंगाजल, शक्कर, शुद्ध घी, वस्त्र यज्ञोपवीत, तांबे का कलश, पंचपात्र, चौकी, कपड़ा (बिछाने हेतु) दुर्गा प्रतिमा या फोटो, नारियल, दीपक, रुई आदि से मां का श्रद्धापूर्वक पूजन करे। वहीं शहर भर में आठ सौ से भी अधिक स्थानों पर सार्वजनिक रूप से विराजी जा रही झांकियों का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में है।
बाबा अमरनाथ की गुफाएं- मां पाताल भैरवी समिति द्वारा स्थापित कोटरा स्थित झांकी में इस वर्ष बाबा अमरनाथ की गुफा के दर्शन होंगे। इसमें भगवान भोलेनाथ के सभी रूपों के दर्शन कराए जाएंगे। समिति के अध्यक्ष संतोष पांडेय व दीपक सराठे ने बताया कि झांकी में त्रिवेणी संगम का रुप भी दिखाया गया है। वहीं सर्प विशेषज्ञ सलीम द्वारा सर्पो की विशेष जानकारियां दी जाएगी। समिति के सचिव विकास शर्मा ने बताया कि झांकी में मां भवानी की छह फीट की आकर्षक प्रतिमा होगी। झांकी संपूर्ण लागत करीब सात लाख रुपए है।
हिमालय के दर्शन- न्यू मार्केट व्यापारी दुर्गा उत्सव समिति द्वारा रोशनपुरा चौराहे पर स्थापित झांकी में हिमालय के दर्शन कराए जाएंगे। इसमें हिमालय के स्वरूप में 65 फुट ऊपर से झरना बहता हुआ दिखाई देगा। मां भगवती की 15 फीट ऊंची आकर्षक प्रतिमा होगी। समिति के अध्यक्ष अजय कुदेशिया ने बताया कि झांकी की लागत करीब पांच लाख रुपए होगी।
राम दरबार के दर्शन- कोलार दुर्गा उत्सव समिति द्वारा सर्वधर्म में बनाई गई झांकी में राम दरबार के दर्शन होंगे। समिति के अध्यक्ष अमित शुक्ला व रामानंद सिंह ने बताया कि झांकी में लंका दहन भी बताया जाएगा। झांकी की लागत करीब साढ़े तीन लाख रुपए आएगी।
जबलपुर का भेड़ाघाट- जयश्री कैला मां शीतला माता सेवा समिति टीला जमालपुरा में साढ़े चार हजार वर्ग फीट में झांकी का निर्माण किया गया है। समिति अध्यक्ष संतोष शिवहरे व वरुण गुप्ता ने बताया कि झांकी में जबलपुर के भेड़ाघाट का स्वरूप बनाया गया है। झांकी में 70 फीट लंबी गुफा होगी और मां भवानी की 12 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसकी संपूर्ण लागत करीब तीन लाख रुपए होगी।
बाल स्वरूप के दर्शन- नव दुर्गा उत्सव समिति दुर्गा चौक टीन शेड में भगवान राम, श्रीकृष्ण, गणेश जी के बाल स्वरूपों के दर्शन कराए जाएंगे। समिति के अध्यक्ष अजय घोष व धीरेंद्र राजपूत ने बताया कि झांकी में माता की 10 फीट की भव्य प्रतिमा विराजित की जाएंगी। झांकी की लागत करीब साढ़े तीन लाख रुपए तक होगी।
जनकपुरी- राजधानी में सर्वप्रथम सार्वजनिक दुर्गा उत्सव के रूप में जनकपुरी में इस बार भी मां भवानी की प्रतिमा परंपरागत रुप से होगी। श्री दुर्गा उत्सव राम बारात समारोह समिति के उपाध्यक्ष अनुपम अग्रवाल ने बताया कि यहां से पंचमी पर परंपरागत राम बारात चल समारोह भी निकाला जाएगा।
पहाड़ी वाला माता का मंदिर- दुर्गा उत्सव समिति एमपी नगर में गुफाओं से होते हुए दर्शक पहाड़ों वाली माता के दर्शन करेंगे। इस बार झांकी अपनी परंपरागत जगह ज्योति टाकीज के पास न होकर बृजवासी मिष्ठान भंडार के पीछे खाली पड़ी जमीन पर बनाई गई है। इसकी लागत करीब तीन लाख रुपए है।
स्वर्ण मंदिर- दुर्गा उत्सव समिति बरखेड़ा में इस बार अमृतसर स्वर्ण मंदिर के दर्शन कराएं जाएंगे।
बाबा अमरनाथ की गुफाएं- मां पाताल भैरवी समिति द्वारा स्थापित कोटरा स्थित झांकी में इस वर्ष बाबा अमरनाथ की गुफा के दर्शन होंगे। इसमें भगवान भोलेनाथ के सभी रूपों के दर्शन कराए जाएंगे। समिति के अध्यक्ष संतोष पांडेय व दीपक सराठे ने बताया कि झांकी में त्रिवेणी संगम का रुप भी दिखाया गया है। वहीं सर्प विशेषज्ञ सलीम द्वारा सर्पो की विशेष जानकारियां दी जाएगी। समिति के सचिव विकास शर्मा ने बताया कि झांकी में मां भवानी की छह फीट की आकर्षक प्रतिमा होगी। झांकी संपूर्ण लागत करीब सात लाख रुपए है।
हिमालय के दर्शन- न्यू मार्केट व्यापारी दुर्गा उत्सव समिति द्वारा रोशनपुरा चौराहे पर स्थापित झांकी में हिमालय के दर्शन कराए जाएंगे। इसमें हिमालय के स्वरूप में 65 फुट ऊपर से झरना बहता हुआ दिखाई देगा। मां भगवती की 15 फीट ऊंची आकर्षक प्रतिमा होगी। समिति के अध्यक्ष अजय कुदेशिया ने बताया कि झांकी की लागत करीब पांच लाख रुपए होगी।
राम दरबार के दर्शन- कोलार दुर्गा उत्सव समिति द्वारा सर्वधर्म में बनाई गई झांकी में राम दरबार के दर्शन होंगे। समिति के अध्यक्ष अमित शुक्ला व रामानंद सिंह ने बताया कि झांकी में लंका दहन भी बताया जाएगा। झांकी की लागत करीब साढ़े तीन लाख रुपए आएगी।
जबलपुर का भेड़ाघाट- जयश्री कैला मां शीतला माता सेवा समिति टीला जमालपुरा में साढ़े चार हजार वर्ग फीट में झांकी का निर्माण किया गया है। समिति अध्यक्ष संतोष शिवहरे व वरुण गुप्ता ने बताया कि झांकी में जबलपुर के भेड़ाघाट का स्वरूप बनाया गया है। झांकी में 70 फीट लंबी गुफा होगी और मां भवानी की 12 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसकी संपूर्ण लागत करीब तीन लाख रुपए होगी।
बाल स्वरूप के दर्शन- नव दुर्गा उत्सव समिति दुर्गा चौक टीन शेड में भगवान राम, श्रीकृष्ण, गणेश जी के बाल स्वरूपों के दर्शन कराए जाएंगे। समिति के अध्यक्ष अजय घोष व धीरेंद्र राजपूत ने बताया कि झांकी में माता की 10 फीट की भव्य प्रतिमा विराजित की जाएंगी। झांकी की लागत करीब साढ़े तीन लाख रुपए तक होगी।
जनकपुरी- राजधानी में सर्वप्रथम सार्वजनिक दुर्गा उत्सव के रूप में जनकपुरी में इस बार भी मां भवानी की प्रतिमा परंपरागत रुप से होगी। श्री दुर्गा उत्सव राम बारात समारोह समिति के उपाध्यक्ष अनुपम अग्रवाल ने बताया कि यहां से पंचमी पर परंपरागत राम बारात चल समारोह भी निकाला जाएगा।
पहाड़ी वाला माता का मंदिर- दुर्गा उत्सव समिति एमपी नगर में गुफाओं से होते हुए दर्शक पहाड़ों वाली माता के दर्शन करेंगे। इस बार झांकी अपनी परंपरागत जगह ज्योति टाकीज के पास न होकर बृजवासी मिष्ठान भंडार के पीछे खाली पड़ी जमीन पर बनाई गई है। इसकी लागत करीब तीन लाख रुपए है।
स्वर्ण मंदिर- दुर्गा उत्सव समिति बरखेड़ा में इस बार अमृतसर स्वर्ण मंदिर के दर्शन कराएं जाएंगे।
शुक्रवार, 19 सितंबर 2008
मंगलवार, 16 सितंबर 2008
हिंदी को आजादी चाहिए
भाषा कोई भी हो, वह अपनी जमीन से उपजती और पनपती है, इसलिए कोई लाख चाहे भी तो उसका रिश्ता उस जमीन से तोड़ नहीं सकता। भाषा को लेकर आज तक जितने भी विवाद हुए हैं, उसका हकीकत से कोई वास्ता नहीं रहा है। कुछ स्वार्थी तत्वों का हित-साधन उससे जरूर हो जाता है। भाषा का उससे न कुछ बनता है, न बिगड़ता है। जहां तक हिंदी की बात है, वह खुद इतनी सक्षम और सशक्त है कि अपना पालन-पोषण जीवंत तरीके से कर रही है। हर भाषा समय के साथ अपना रूप-रंग बदलती रहती है। इसका मतलब यह नहीं कि वह अपने मूल रूप से च्युत हो रही है। दरअसल उसकी आत्मा नहीं बदलती है। हिंदी को खुद खिलने और खेलने की आÊादी मिलनी चाहिए। हिंदी तो सतत प्रवाहित धारा है। धारा जरूरी नहीं कि सीधी ही चले, आड़ी-तिरछी भी चलेगी। उसे उसी रूप में बहने नहीं दिया गया, तो उसके साथ अन्याय होगा। हिंदी का विकास कभी नहीं रुका, सिर्फ जगह-जगह रूप बदल रहा है। जब मैं उत्तर भारत में था, तो मुझे लगता था कि जो हिंदी वहां बोली जा रही है, वही सही हिंदी है। जब मैं मुंबई आया तो पाया कि हिंदी तो यहां भी है, मगर उसमें कुछ टपोरीपन और मस्ती मिली हुई है। उसे ही हर कोई सुनता और बोलता है। किसी को कोई परेशानी भी नहीं होती। इसका मतलब यह नहीं कि हिंदी विकृत हो गई। हां, यह जरूर लगा कि व्याकरण यहां मजबूर हो गया है। भाषा-शुद्धि की आवश्यकता है। मगर यह शुद्धिकरण अभियान कहां-कहां चलाएंगे?
इसलिए भाषा को अपनी राह पर चलते रहने की आजादी चाहिए, जो अंतत: समृद्धि ही देगी। हमें अंग्रेजी से कुछ सीखने की जरूरत है। उसकी समृद्धि का राज सभी जानते हैं कि वह जहां गई है, वहीं की हो गई। भारत, स्पेन, रूस, ऑस्ट्रेलिया में अंग्रेजी को अलग-अलग ढंग से बोला जाता है, क्योंकि वहां की स्थानीय बोलियां उसमें शामिल हो जाती हैं। आंचलिक भाषाओं ने अंग्रेजी को इतना कुछ दे दिया है कि अंग्रेजी ऋणी हो गई है। भारत में भी लगभग सारी भाषाओं के शब्द अंग्रेजी में घुल-मिल रहे हैं।
इस मामले में हिंदी पिछड़ रही है। हिंदी के तथाकथित अलमबरदारों ने इसे अपनी ही सीमा में देखने और रखने का मानो संकल्प ले लिया है, लेकिन क्या किसी के रोके हिंदी का विकास रुक रहा है? अगर रुकना होता तो हिंदी के इतने सारे टीवी चैनल नहीं आए होते! और भी दर्जनों चैनल आने वाले हैं।
हिंदी के अखबारों के संस्करणों में लगातार वृद्धि हो रही है। पाठकों की संख्या का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है। टीवी सीरियल्स और हिंदी फिल्मों की लोकप्रियता और मांग में इजाफा ही हो रहा है। आज के जितने सफल विज्ञापन हिट हैं, वे सारे के सारे लगभग हिंदी में ही हैं। विज्ञापनों में ‘कैच लाइन’ का बहुत महत्व है, हिंदी में ज्यादा चर्चित हैं। वह चाहे ‘ठंडा मतलब..’, ‘सबका ठंडा एक..’, ‘दोबारा मत पूछना..’, ‘पीयो सर उठा के..’ हो या फिर ‘ज्यादा सफेदी..’ हो- हिंदी के सारे कैच लाइन मुहावरे की तरह प्रचलित हो रहे हैं।
¨हदीभाषियों को और भी उदार होने की जरूरत है। हृदय विशाल हो जाए, तो सीमा-रेखा अपने आप मिट जाएगी। सभी भाषाओं और बोलियों का सहयोग लेना चाहिए। अंग्रेजी के साथ भी जीने की आदत डालनी चाहिए, इसलिए मेरा मानना है कि भाषा के कपाट को कभी बंद नहीं रखना चाहिए। उसका खुला रहना सुखकर और समृद्धिकर है। कोई कैसे बोलेगा और कोई कैसे- इसे समस्या नहीं समझना चाहिए। हिंदी बोलने की आदत अगर कोई डाल रहा है तो यह अच्छी बात है।
गैर-हिंदीभाषी ही क्यों, हिंदीभाषी भी अशुद्ध बोलते हैं। इसका मतलब यह तो नहीं कि वे हिंदी को बिगाड़ रहे हैं। इसे इस तरह कहना चाहिए कि वे बोलकर भाषा को सीखने और शुद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं। यह उनकी मुख्यधारा(हिंदी) में शामिल होने की इच्छा है। गाना सबका स्वभाव होता है। कोई अच्छा गाता है और कोई बुरा। बुरा गाने वालों का लगाव गीतों से उतना ही है, जितना अच्छा गाने वालों का। फर्क इतना ही है कि किसी का सुर अच्छा लगता है और किसी का बुरा। गानों की तरह भाषा पर सबकी पकड़ एक जैसी हो, संभव नहीं है।
हिंदी के हितैषी पता नहीं क्यों, इसे लेकर इतने बचाव की मुद्रा में आ जाते हैं! हम यह क्यों नहीं मानते कि सबका बौद्धिक स्तर एक जैसा नहीं होता? कोई भाषा और व्याकरण के मामले में कमजोर होता है और कोई परिष्कृत शब्दों का इस्तेमाल करता है। इसके बावजूद दोनों में संवाद होना चाहिए। इससे दोनों में समृद्धि आएगी। जिम्मेदारी भी महसूस होगी।
हां, यह बात सही है कि आजकल फिल्मों की स्क्रिप्ट रोमन लिपि में लिखी जाती है, मगर इससे क्या फर्क पड़ता है। अंतत: पर्दे पर तो वह हिंदी ही बनकर आती है। इसे अंग्रेजीदां की जिद नहीं कह सकते। संभव है उन्हें अच्छी हिंदी बोलनी आती हो, मगर पढ़नी नहीं। सीधे हिंदी पढ़ने के बाद जो भाव आता है, संभव है वह रोमन से नहीं आता हो, मगर यह काम निर्देशक का है कि संवाद के अनुसार एक्सप्रेशन या इमोशन कैसे लाया जाए!
जहां तक फिल्म, टीवी, एड मीडिया में अंग्रेजी स्कूलों से पढ़े लोगों के आने की बात है, इसमें हिंदी को खुश होना चाहिए कि उन्हें हिंदी ही आश्रय दे रही है। वे अंग्रेजी में भले योजना बनाते हों, स्क्रिप्ट भी अंग्रेजी में मांगते हों, सेट पर पूरा माहौल अंग्रेजीनुमा हो, मगर कलाकारों को जब डायलॉग बोलने की बारी आएगी तो क्या बोलेंगे?
वैश्वीकरण के बाद हिंदी का भी विस्तार हो रहा है। हिंदी फिल्में विदेशों में भी धूम मचा रही हैं। इसे सिर्फ भारतीय या भारत के गैर-हिंदीभाषी ही नहीं देखते हैं, बल्कि विदेशी भी देखते और समझने की कोशिश करते हैं। अगर आज की भाषा में कहूं तो हिंदी एक बड़ा बाजार बन गया है। विदेशी भी हिंदी में काम करना चाह रहे हैं। भले उनके डायलॉग डब किए जाएं, मगर हिंदी की सत्ता को वे स्वीकार तो कर ही रहे हैं।
हिंदी की अपनी भाव-भूमि है। उसके अपने शब्दों में क्षेत्र, जमीन, मौसम, संवेदना और भावना का असर होता है। ‘तारे जमीं पर’ में ‘मां..’ वाला गाना भारतीय जमीन और मानसिकता का प्रतिबिंब है। उसका अनुवाद अगर विदेशी भाषा में होगा तो वह असर नहीं पैदा होगा, क्योंकि वहां की संस्कृति में ‘मां’ का क्या स्थान है, ठीक-ठीक पता नहीं है।
यह निश्चित है कि मां का जो दर्जा यहां है, वैसा कहीं नहीं है। इसलिए मैं मानता हूं कि हिंदी की भाषा जितनी समृद्ध है, उतने ही विचार भी परिपक्व हैं। हिंदी को रोकना संभव नहीं है, मगर हमारी जिम्मेदारी है कि हम हिंदी को खिलने की आजादी दें।
इसलिए भाषा को अपनी राह पर चलते रहने की आजादी चाहिए, जो अंतत: समृद्धि ही देगी। हमें अंग्रेजी से कुछ सीखने की जरूरत है। उसकी समृद्धि का राज सभी जानते हैं कि वह जहां गई है, वहीं की हो गई। भारत, स्पेन, रूस, ऑस्ट्रेलिया में अंग्रेजी को अलग-अलग ढंग से बोला जाता है, क्योंकि वहां की स्थानीय बोलियां उसमें शामिल हो जाती हैं। आंचलिक भाषाओं ने अंग्रेजी को इतना कुछ दे दिया है कि अंग्रेजी ऋणी हो गई है। भारत में भी लगभग सारी भाषाओं के शब्द अंग्रेजी में घुल-मिल रहे हैं।
इस मामले में हिंदी पिछड़ रही है। हिंदी के तथाकथित अलमबरदारों ने इसे अपनी ही सीमा में देखने और रखने का मानो संकल्प ले लिया है, लेकिन क्या किसी के रोके हिंदी का विकास रुक रहा है? अगर रुकना होता तो हिंदी के इतने सारे टीवी चैनल नहीं आए होते! और भी दर्जनों चैनल आने वाले हैं।
हिंदी के अखबारों के संस्करणों में लगातार वृद्धि हो रही है। पाठकों की संख्या का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है। टीवी सीरियल्स और हिंदी फिल्मों की लोकप्रियता और मांग में इजाफा ही हो रहा है। आज के जितने सफल विज्ञापन हिट हैं, वे सारे के सारे लगभग हिंदी में ही हैं। विज्ञापनों में ‘कैच लाइन’ का बहुत महत्व है, हिंदी में ज्यादा चर्चित हैं। वह चाहे ‘ठंडा मतलब..’, ‘सबका ठंडा एक..’, ‘दोबारा मत पूछना..’, ‘पीयो सर उठा के..’ हो या फिर ‘ज्यादा सफेदी..’ हो- हिंदी के सारे कैच लाइन मुहावरे की तरह प्रचलित हो रहे हैं।
¨हदीभाषियों को और भी उदार होने की जरूरत है। हृदय विशाल हो जाए, तो सीमा-रेखा अपने आप मिट जाएगी। सभी भाषाओं और बोलियों का सहयोग लेना चाहिए। अंग्रेजी के साथ भी जीने की आदत डालनी चाहिए, इसलिए मेरा मानना है कि भाषा के कपाट को कभी बंद नहीं रखना चाहिए। उसका खुला रहना सुखकर और समृद्धिकर है। कोई कैसे बोलेगा और कोई कैसे- इसे समस्या नहीं समझना चाहिए। हिंदी बोलने की आदत अगर कोई डाल रहा है तो यह अच्छी बात है।
गैर-हिंदीभाषी ही क्यों, हिंदीभाषी भी अशुद्ध बोलते हैं। इसका मतलब यह तो नहीं कि वे हिंदी को बिगाड़ रहे हैं। इसे इस तरह कहना चाहिए कि वे बोलकर भाषा को सीखने और शुद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं। यह उनकी मुख्यधारा(हिंदी) में शामिल होने की इच्छा है। गाना सबका स्वभाव होता है। कोई अच्छा गाता है और कोई बुरा। बुरा गाने वालों का लगाव गीतों से उतना ही है, जितना अच्छा गाने वालों का। फर्क इतना ही है कि किसी का सुर अच्छा लगता है और किसी का बुरा। गानों की तरह भाषा पर सबकी पकड़ एक जैसी हो, संभव नहीं है।
हिंदी के हितैषी पता नहीं क्यों, इसे लेकर इतने बचाव की मुद्रा में आ जाते हैं! हम यह क्यों नहीं मानते कि सबका बौद्धिक स्तर एक जैसा नहीं होता? कोई भाषा और व्याकरण के मामले में कमजोर होता है और कोई परिष्कृत शब्दों का इस्तेमाल करता है। इसके बावजूद दोनों में संवाद होना चाहिए। इससे दोनों में समृद्धि आएगी। जिम्मेदारी भी महसूस होगी।
हां, यह बात सही है कि आजकल फिल्मों की स्क्रिप्ट रोमन लिपि में लिखी जाती है, मगर इससे क्या फर्क पड़ता है। अंतत: पर्दे पर तो वह हिंदी ही बनकर आती है। इसे अंग्रेजीदां की जिद नहीं कह सकते। संभव है उन्हें अच्छी हिंदी बोलनी आती हो, मगर पढ़नी नहीं। सीधे हिंदी पढ़ने के बाद जो भाव आता है, संभव है वह रोमन से नहीं आता हो, मगर यह काम निर्देशक का है कि संवाद के अनुसार एक्सप्रेशन या इमोशन कैसे लाया जाए!
जहां तक फिल्म, टीवी, एड मीडिया में अंग्रेजी स्कूलों से पढ़े लोगों के आने की बात है, इसमें हिंदी को खुश होना चाहिए कि उन्हें हिंदी ही आश्रय दे रही है। वे अंग्रेजी में भले योजना बनाते हों, स्क्रिप्ट भी अंग्रेजी में मांगते हों, सेट पर पूरा माहौल अंग्रेजीनुमा हो, मगर कलाकारों को जब डायलॉग बोलने की बारी आएगी तो क्या बोलेंगे?
वैश्वीकरण के बाद हिंदी का भी विस्तार हो रहा है। हिंदी फिल्में विदेशों में भी धूम मचा रही हैं। इसे सिर्फ भारतीय या भारत के गैर-हिंदीभाषी ही नहीं देखते हैं, बल्कि विदेशी भी देखते और समझने की कोशिश करते हैं। अगर आज की भाषा में कहूं तो हिंदी एक बड़ा बाजार बन गया है। विदेशी भी हिंदी में काम करना चाह रहे हैं। भले उनके डायलॉग डब किए जाएं, मगर हिंदी की सत्ता को वे स्वीकार तो कर ही रहे हैं।
हिंदी की अपनी भाव-भूमि है। उसके अपने शब्दों में क्षेत्र, जमीन, मौसम, संवेदना और भावना का असर होता है। ‘तारे जमीं पर’ में ‘मां..’ वाला गाना भारतीय जमीन और मानसिकता का प्रतिबिंब है। उसका अनुवाद अगर विदेशी भाषा में होगा तो वह असर नहीं पैदा होगा, क्योंकि वहां की संस्कृति में ‘मां’ का क्या स्थान है, ठीक-ठीक पता नहीं है।
यह निश्चित है कि मां का जो दर्जा यहां है, वैसा कहीं नहीं है। इसलिए मैं मानता हूं कि हिंदी की भाषा जितनी समृद्ध है, उतने ही विचार भी परिपक्व हैं। हिंदी को रोकना संभव नहीं है, मगर हमारी जिम्मेदारी है कि हम हिंदी को खिलने की आजादी दें।
नई जल योजना की नई बातें
बाढ़ की तबाही से जल प्रबंधन फिर एक बार सुर्खियों में है, मगर एक और तरह की जल चिंता हाल में स्वीडन की राजधानी स्टाकहोम में ‘विश्व जल सप्ताह’ में व्यक्त की गई थी और उसमें आशंका व्यक्त की गई कि यदि इस अति-महत्वपूर्ण संसाधन के दुरुपयोग को नहीं रोका गया, तो धरती की बढ़ती आबादी के लिए भोजन और पेयजल की समस्या का समाधान खोजना मुश्किल होगा।
इस आशय का रहस्योद्घाटन हुआ कि विश्व की खाद्य सामग्री का 50 प्रतिशत हिस्सा बर्बाद हो जाता है, अत: इसके उत्पादन में जो पानी का इस्तेमाल होता है, वह प्रतिवर्ष बेकार जाता है। यदि खाद्य सामग्री की बर्बादी कम से कम 50 प्रतिशत नहीं रोकी गई तो विचारकों की राय में 2025 तक भोजन और पेयजल की भारी समस्या खड़ी होगी। कुवैत जहां पानी मुफ्त मिलता है, प्रति व्यक्ति 600 लीटर पानी प्रतिदिन वहां इस्तेमाल होता है।
इसके विपरीत स्वीडन में, जहां पानी के लिए कीमत देनी पड़ती है, वहां लोग 150 लीटर प्रतिदिन से ही काम चलाते हैं। इसका मतलब है कि पानी की समस्या का समाधन तलाशना है तो इसके उपयोग के लिए उचित मूल्यनीति अख्तियार करनी चाहिए। लोगों को पानी के पर्यावरणीय महत्व का ज्ञान भी कराना आवश्यक है। इस आशय का प्रचार होना चाहिए कि पानी एक मूल्यवान व सीमित संसाधन है, जिसका इस्तेमाल संभलकर करने की जरूरत है।
भारत को स्टाकहोम पानी सम्मेलन के संवाद से सबक लेना जरूरी है। भारत ने अभी तक पानी की समस्या पर गहराई से विचार नहीं किया है। सीमित पानी के स्टॉक के उपयोग के लिए न तो कोई योजना बनाई है और न ही लाभकारी इस्तेमाल का आचरण अख्तियार किया है। पहला, भारत में जलभंडार सीमित है, दुनिया में नदियों के पानी का सिर्फ ४ प्रतिशत पानी ही भारत में उपलब्ध है। यहां पानी मानसून पर निर्भर करता है, जिसका चरित्र स्थायी नहीं है। कभी बाढ़ तो कभी सूखे से गुजरना पड़ता है।
अधिकांश वष्र साल में 100 घंटे होती है। अत: इसके लिए गहन योजना आवश्यक है। दूसरा, भारत कृषिप्रधान देश है। अनुभव बताता है कि गरीबी से निपटने के लिए कृषि विकास की प्रधानता आने वाले दिनों में भी रहेगी। पहली हरित क्रांति की सफलता पानी की उपलब्धता के कारण हुई। दूसरी प्रस्तावित हरित क्रांति की सफलता भी पानी पर ही निर्भर करेगी। तीसरा, आर्थिक सोच में भी बदलाव आया है। पानी प्रकृति प्रदत्त है, लेकिन सीमित उपलब्धता और इसके लगातार दूषित होने के कारण मुफ्त और मनमाने तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। आठवीं योजना के दौरान पानी को आर्थिक संसाधन की मान्यता दी गई है।
दुनिया के स्तर पर पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है। विचारकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में पानी को लेकर ही विश्व में तनाव होने वाला है। भारत में पानी को लेकर कई स्तरों पर संघर्ष चल रहा है। कई राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर संघर्ष है। न तो केंद्र सरकार और न ही न्यायालय राज्यों के आपसी द्वंद्व को सुलझाने में कामयाब हुए हैं। इसी तरह विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर सामंजस्य स्थापित करने की समस्या खड़ी हुई है।
भारत में 1990 में ८३ प्रतिशत पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए होता था। 2025 में यद्यपि कृषि के विकास के लिए अधिक पानी की जरूरत होगी, सिंचाई के लिए पानी का अनुपात घटकर ७५ प्रतिशत हो जाएगा। इसी तरह घरेलू उपयोग में भी अधिक पानी मुहैया कराने की जरूरत पड़ेगी। शहरों के विकास के कारण भारत की नदियों का पानी दूषित हो रहा है। ‘स्वजल धारा’ योजना के तहत घरेलू इस्तेमाल के लिए पानी की योजना लागू की गई है, लेकिन राजस्थान के स्वजल धारा के मूल्यांकन के निष्कर्ष से पता चला है कि कमजोर तबके के लोगों को स्वजल धारा के तहत पानी नहीं मिल पाता है। पिछले वर्षो में जमीन से पानी निकालने की सुविधा के कारण पानी का स्तर लगातार कम होता जा रहा है।
‘जल ही जीवन है’ की कहावत को यदि सरजमीं पर उतारना है तो पानी के कई पक्षों पर गहराई से विचार कर नीति निर्धारित करनी होगी। देश का तेज विकास हो रहा है। अनुमान है कि 2025 में 350 मीट्रिक टन अनाज की जरूरत होगी। देहातों में भी शुद्ध जल की आवश्यकता बढ़ जाएगी, क्योंकि जल प्रदूषण की रफ्तार तेज है। उद्योगों को भी अधिक पानी चाहिए। ‘डबलीन-सिद्धांत’ यह प्रतिपादित करता है कि ‘पानी का इसके सभी तरह के इस्तेमालों में आर्थिक महत्व है और इसे आर्थिक वस्तु की मान्यता मिल जानी चाहिए।’
इस सिद्धांत ने उस परंपरागत मान्यता को समाप्त कर दिया है, जिसमें यह माना गया था कि पानी प्रकृति का मुफ्त का उपहार है और इसलिए इसे पाने का सभी को मानवीय अधिकार है।
‘राष्ट्रीय जल नीति’ (2002) की स्पष्ट धारणा है कि ‘जल संसाधन के विभिन्न उपयोगों के प्रबंधन में सहभागी नीति अख्तियार करनी चाहिए। इसके लिए केवल सरकारी महकमों को नहीं, बल्कि उपभोक्ता और इससे जुड़े दूसरे लोगों को योजना, डिजाइन और प्रबंधन में प्रभावकारी और निर्णायक ढंग से सम्मिलित करना चाहिए।’
प्रबंधन की नई सोच के मुताबिक सरकार के नियंत्रण को कम करना जरूरी है और उसके स्थान पर उपभोक्ताओं को अधिकार दिया जाए कि वे स्वयं दूसरा इंतजाम करें। केंद्र सरकार द्वारा ‘साझेदार सिंचाई प्रबंधन’ के लिए एक एक्ट भी प्रस्तावित है, जिसे दस राज्यों ने लागू किया है। इसमें ‘वाटर यूजर एसोसिएशन’ पर अधिक जोर दिया गया है। स्वामीनाथन कमेटी की राय है कि इस नीति के तहत गरीब किसानों को भी निर्णायक मंडल में शामिल किया जाना चाहिए।
उम्मीद की जाती है कि जब उपभोक्ता के हाथ में उपलब्ध पानी के व्यवस्था की जवाबदेही होगी, तो पानी की बर्बादी रुकेगी और वितरण उचित होगा, लेकिन व्यवहार में कई खामियां नजर आ रही हैं। खबर है कि राजनीतिक दखलंदाजी से इसका काम प्रभावित होता है। हर हालत में जवाबदेह उपभोक्ता की (चाहे वह किसान हो या स्वजल धारा का सदस्य) नितांत जरूरत है, जिसके लिए जनचेतना अभियान चलाना चाहिए।
इस आशय का रहस्योद्घाटन हुआ कि विश्व की खाद्य सामग्री का 50 प्रतिशत हिस्सा बर्बाद हो जाता है, अत: इसके उत्पादन में जो पानी का इस्तेमाल होता है, वह प्रतिवर्ष बेकार जाता है। यदि खाद्य सामग्री की बर्बादी कम से कम 50 प्रतिशत नहीं रोकी गई तो विचारकों की राय में 2025 तक भोजन और पेयजल की भारी समस्या खड़ी होगी। कुवैत जहां पानी मुफ्त मिलता है, प्रति व्यक्ति 600 लीटर पानी प्रतिदिन वहां इस्तेमाल होता है।
इसके विपरीत स्वीडन में, जहां पानी के लिए कीमत देनी पड़ती है, वहां लोग 150 लीटर प्रतिदिन से ही काम चलाते हैं। इसका मतलब है कि पानी की समस्या का समाधन तलाशना है तो इसके उपयोग के लिए उचित मूल्यनीति अख्तियार करनी चाहिए। लोगों को पानी के पर्यावरणीय महत्व का ज्ञान भी कराना आवश्यक है। इस आशय का प्रचार होना चाहिए कि पानी एक मूल्यवान व सीमित संसाधन है, जिसका इस्तेमाल संभलकर करने की जरूरत है।
भारत को स्टाकहोम पानी सम्मेलन के संवाद से सबक लेना जरूरी है। भारत ने अभी तक पानी की समस्या पर गहराई से विचार नहीं किया है। सीमित पानी के स्टॉक के उपयोग के लिए न तो कोई योजना बनाई है और न ही लाभकारी इस्तेमाल का आचरण अख्तियार किया है। पहला, भारत में जलभंडार सीमित है, दुनिया में नदियों के पानी का सिर्फ ४ प्रतिशत पानी ही भारत में उपलब्ध है। यहां पानी मानसून पर निर्भर करता है, जिसका चरित्र स्थायी नहीं है। कभी बाढ़ तो कभी सूखे से गुजरना पड़ता है।
अधिकांश वष्र साल में 100 घंटे होती है। अत: इसके लिए गहन योजना आवश्यक है। दूसरा, भारत कृषिप्रधान देश है। अनुभव बताता है कि गरीबी से निपटने के लिए कृषि विकास की प्रधानता आने वाले दिनों में भी रहेगी। पहली हरित क्रांति की सफलता पानी की उपलब्धता के कारण हुई। दूसरी प्रस्तावित हरित क्रांति की सफलता भी पानी पर ही निर्भर करेगी। तीसरा, आर्थिक सोच में भी बदलाव आया है। पानी प्रकृति प्रदत्त है, लेकिन सीमित उपलब्धता और इसके लगातार दूषित होने के कारण मुफ्त और मनमाने तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। आठवीं योजना के दौरान पानी को आर्थिक संसाधन की मान्यता दी गई है।
दुनिया के स्तर पर पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है। विचारकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में पानी को लेकर ही विश्व में तनाव होने वाला है। भारत में पानी को लेकर कई स्तरों पर संघर्ष चल रहा है। कई राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर संघर्ष है। न तो केंद्र सरकार और न ही न्यायालय राज्यों के आपसी द्वंद्व को सुलझाने में कामयाब हुए हैं। इसी तरह विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर सामंजस्य स्थापित करने की समस्या खड़ी हुई है।
भारत में 1990 में ८३ प्रतिशत पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए होता था। 2025 में यद्यपि कृषि के विकास के लिए अधिक पानी की जरूरत होगी, सिंचाई के लिए पानी का अनुपात घटकर ७५ प्रतिशत हो जाएगा। इसी तरह घरेलू उपयोग में भी अधिक पानी मुहैया कराने की जरूरत पड़ेगी। शहरों के विकास के कारण भारत की नदियों का पानी दूषित हो रहा है। ‘स्वजल धारा’ योजना के तहत घरेलू इस्तेमाल के लिए पानी की योजना लागू की गई है, लेकिन राजस्थान के स्वजल धारा के मूल्यांकन के निष्कर्ष से पता चला है कि कमजोर तबके के लोगों को स्वजल धारा के तहत पानी नहीं मिल पाता है। पिछले वर्षो में जमीन से पानी निकालने की सुविधा के कारण पानी का स्तर लगातार कम होता जा रहा है।
‘जल ही जीवन है’ की कहावत को यदि सरजमीं पर उतारना है तो पानी के कई पक्षों पर गहराई से विचार कर नीति निर्धारित करनी होगी। देश का तेज विकास हो रहा है। अनुमान है कि 2025 में 350 मीट्रिक टन अनाज की जरूरत होगी। देहातों में भी शुद्ध जल की आवश्यकता बढ़ जाएगी, क्योंकि जल प्रदूषण की रफ्तार तेज है। उद्योगों को भी अधिक पानी चाहिए। ‘डबलीन-सिद्धांत’ यह प्रतिपादित करता है कि ‘पानी का इसके सभी तरह के इस्तेमालों में आर्थिक महत्व है और इसे आर्थिक वस्तु की मान्यता मिल जानी चाहिए।’
इस सिद्धांत ने उस परंपरागत मान्यता को समाप्त कर दिया है, जिसमें यह माना गया था कि पानी प्रकृति का मुफ्त का उपहार है और इसलिए इसे पाने का सभी को मानवीय अधिकार है।
‘राष्ट्रीय जल नीति’ (2002) की स्पष्ट धारणा है कि ‘जल संसाधन के विभिन्न उपयोगों के प्रबंधन में सहभागी नीति अख्तियार करनी चाहिए। इसके लिए केवल सरकारी महकमों को नहीं, बल्कि उपभोक्ता और इससे जुड़े दूसरे लोगों को योजना, डिजाइन और प्रबंधन में प्रभावकारी और निर्णायक ढंग से सम्मिलित करना चाहिए।’
प्रबंधन की नई सोच के मुताबिक सरकार के नियंत्रण को कम करना जरूरी है और उसके स्थान पर उपभोक्ताओं को अधिकार दिया जाए कि वे स्वयं दूसरा इंतजाम करें। केंद्र सरकार द्वारा ‘साझेदार सिंचाई प्रबंधन’ के लिए एक एक्ट भी प्रस्तावित है, जिसे दस राज्यों ने लागू किया है। इसमें ‘वाटर यूजर एसोसिएशन’ पर अधिक जोर दिया गया है। स्वामीनाथन कमेटी की राय है कि इस नीति के तहत गरीब किसानों को भी निर्णायक मंडल में शामिल किया जाना चाहिए।
उम्मीद की जाती है कि जब उपभोक्ता के हाथ में उपलब्ध पानी के व्यवस्था की जवाबदेही होगी, तो पानी की बर्बादी रुकेगी और वितरण उचित होगा, लेकिन व्यवहार में कई खामियां नजर आ रही हैं। खबर है कि राजनीतिक दखलंदाजी से इसका काम प्रभावित होता है। हर हालत में जवाबदेह उपभोक्ता की (चाहे वह किसान हो या स्वजल धारा का सदस्य) नितांत जरूरत है, जिसके लिए जनचेतना अभियान चलाना चाहिए।
111 कांग्रेसी टिकटों पर विचार
भोपाल. विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर नई दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस चुनाव समिति ने राज्य की 230 में से 111 सीटों पर विचार किया। इनमें 41 मौजूदा विधायकों की सीटें भी शामिल हैं।
प्रदेश की बाकी 119 सीटों पर विचार करने के लिए 22 सितंबर को दिल्ली में फिर बैठक होगी। दो चरणों में चली समिति की मैराथन बैठक में उन आधा दर्जन मौजूदा विधायकों को दोबारा टिकट देने के बारे में सहमति नहीं बन पाई, जिनके क्षेत्र परिसीमन में समाप्त या आरक्षित हो गए हैं।
हालांकि अधिकांश कद्दावर नेताओं को टिकट मिलना लगभग तय है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री निवास तिवारी को इस मर्तबा सिरमौर से टिकट दिए जाने की संभावना है। परिसीमन में उनकी परंपरागत सीट मनगंवा आरक्षित हो गई है।
प्रदेश की बाकी 119 सीटों पर विचार करने के लिए 22 सितंबर को दिल्ली में फिर बैठक होगी। दो चरणों में चली समिति की मैराथन बैठक में उन आधा दर्जन मौजूदा विधायकों को दोबारा टिकट देने के बारे में सहमति नहीं बन पाई, जिनके क्षेत्र परिसीमन में समाप्त या आरक्षित हो गए हैं।
हालांकि अधिकांश कद्दावर नेताओं को टिकट मिलना लगभग तय है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री निवास तिवारी को इस मर्तबा सिरमौर से टिकट दिए जाने की संभावना है। परिसीमन में उनकी परंपरागत सीट मनगंवा आरक्षित हो गई है।
कांग्रेस से नाराज हैं 45 फीसदी मुसलमान
प्रदेश कांग्रेस के लिए खबर बुरी है कि उसका परंपरागत मुस्लिम वोट बैंक उससे छिटक रहा है। एक सर्वे में खुलासा हुआ कि प्रदेश के 45 फीसदी मुसलमान कांग्रेस के खिलाफ हैं। यह खुलेआम दूसरी पार्टी में वोट करने की बात कर रहे हैं। कांग्रेस के ही अल्पसंख्यक विभाग द्वारा कराया गया यह सर्वे प्रदेश कांग्रेस की चिंता बढ़ाने वाला है। विभाग ने सर्वे रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को भी भेज दी है। साथ ही कहा है कि उन्हें इस पर यकीन न हो तो दिल्ली से किसी भी एजेंसी से सर्वे करा सकती हैं।
सूत्र बताते हैं कि मध्यप्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग ने पूरे प्रदेश में एक सर्वे कराया है। इस सर्वे में अल्पसंख्यकों से जानने की कोशिश की गई कि वे किस पार्टी को वोट देना चाहते हैं। जब सर्वे रिपोर्ट आई तो विभाग ही चौंक गया। इसमें 45 फीसदी मुसलमानों ने कांग्रेस को मौका परस्त करार देते हुए वोट नहीं देने की बात की। जबकि 55 फीसदी देखो और इंतजार करो की स्थिति में रहे। सर्वे में कांग्रेस को वोट नहीं देने के संबंध में पूछे गए सवाल में अधिकांश लोगों ने कहा कि उन पर जब अत्याचार हुए तो कांग्रेस ने साथ नहीं दिया। प्रदेश में उनके नेताओं की संख्या लगातार घटती गई। जहां पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के दौर में 16-16 लोगों को कांग्रेस ने टिकट दिया वहीं अब इनकी संख्या नाम मात्र रह गई है। आलम यह है कि विधानसभा में अब कांग्रेस में मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व नगण्य है। सर्वे में यह बात भी आई कि अब कांग्रेसी नेता मुस्लिम समुदाय के हित में जोरदार ढंग से बात नहीं करते हैं। इस कारण उनका रुझान समाजवादी पार्टी की तरफ ज्यादा हुआ है। इसके बाद उनकी दूसरी पसंदीदा पार्टी बसपा है। सर्वे में कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई है। सूत्र बताते हैं कि अल्पसंख्यक भाजपा को वोट नहीं देना चाहते हैं इस कारण कांग्रेस से नाराजगी का फायदा सपा और बसपा को मिल सकता है। कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग ने सर्वे रिपोर्ट अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को फैक्स कर दी है। इसमें विभाग की कार्यकारिणी भंग किए जाने और चार महीना बीत जाने के बावजूद नई कार्यकारिणी गठित नहीं किए जाने की भी शिकायत की गई है। इसमें विभाग के अध्यक्ष को भी निष्क्रय बताया गया है। साथ ही मुस्लिम समुदाय को वापस कांग्रेस से जोड़ने के सुझाव भी सुझाए गए हैं।
सूत्र बताते हैं कि मध्यप्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग ने पूरे प्रदेश में एक सर्वे कराया है। इस सर्वे में अल्पसंख्यकों से जानने की कोशिश की गई कि वे किस पार्टी को वोट देना चाहते हैं। जब सर्वे रिपोर्ट आई तो विभाग ही चौंक गया। इसमें 45 फीसदी मुसलमानों ने कांग्रेस को मौका परस्त करार देते हुए वोट नहीं देने की बात की। जबकि 55 फीसदी देखो और इंतजार करो की स्थिति में रहे। सर्वे में कांग्रेस को वोट नहीं देने के संबंध में पूछे गए सवाल में अधिकांश लोगों ने कहा कि उन पर जब अत्याचार हुए तो कांग्रेस ने साथ नहीं दिया। प्रदेश में उनके नेताओं की संख्या लगातार घटती गई। जहां पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के दौर में 16-16 लोगों को कांग्रेस ने टिकट दिया वहीं अब इनकी संख्या नाम मात्र रह गई है। आलम यह है कि विधानसभा में अब कांग्रेस में मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व नगण्य है। सर्वे में यह बात भी आई कि अब कांग्रेसी नेता मुस्लिम समुदाय के हित में जोरदार ढंग से बात नहीं करते हैं। इस कारण उनका रुझान समाजवादी पार्टी की तरफ ज्यादा हुआ है। इसके बाद उनकी दूसरी पसंदीदा पार्टी बसपा है। सर्वे में कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई है। सूत्र बताते हैं कि अल्पसंख्यक भाजपा को वोट नहीं देना चाहते हैं इस कारण कांग्रेस से नाराजगी का फायदा सपा और बसपा को मिल सकता है। कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग ने सर्वे रिपोर्ट अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को फैक्स कर दी है। इसमें विभाग की कार्यकारिणी भंग किए जाने और चार महीना बीत जाने के बावजूद नई कार्यकारिणी गठित नहीं किए जाने की भी शिकायत की गई है। इसमें विभाग के अध्यक्ष को भी निष्क्रय बताया गया है। साथ ही मुस्लिम समुदाय को वापस कांग्रेस से जोड़ने के सुझाव भी सुझाए गए हैं।
एलियन ग्रह की तस्वीरें मिलीं
न्यूयार्क। खगोलविदें ने सूर्य से मिलते-जुलते एक तारे का चक्कर लगाने वाले ग्रह एलियन की तस्वीरें मिलने का दावा किया है।टोरंटो विश्वविद्यालय के एक दल ने हवाई के जेमिनी नार्थ दूरबीन से बृहस्पति से आठ गुना बड़े, दस गुना अधिक गर्म और कम से कम 30 हजार गुना ज्यादा चमकीले ग्रह का पता लगाया है। यह ग्रह आरएक्सएस जे 16029 1-210524 नामक तारे के करीब पाया गया है। यह तारा सूर्य से 85 फीसदी अधिक भारी, लेकिन उम्र में उससे 0.1 फीसदी से भी कम है। इसकी संभावित आयु 50 लाख वर्ष है। न्यू साइंटिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार दोनों पृथ्वी से पांच सौ प्रकाश वर्ष दूर हैं।
खगोलविदें के अनुसार नया संभावित ग्रह अपने तारे के परिक्रमा पथ पर करीब 330 एस्ट्रोनोमिकल इकाई की दूरी पर चक्कर काटता है। हमारे सौर परिवार में सबसे अधिक दूरी पर स्थित ग्रह नेप्च्यून है, जो सूर्य से लगभग 30 एस्ट्रोनोमिकल इकाई की दूरी पर है। दल के सदस्य रे जयवर्द्धन ने कहा कि यह खोज इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि सूर्य की तरह तारों के ग्रहों के निर्माण में एक से अधिक तरीके काम करते हैं।
मुख्यमंत्री ने की तैयारियों की समीक्षा
भोपाल। भाजपा कार्यकर्ता महाकुंभ को वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी तथा पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस संबंध में पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों से चर्चा की। साथ ही महाकुंभ स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के अलावा पार्टी के चुनाव प्रभारी अनिल माधव दवे के अलावा भोपाल संभागायुक्त डॉ. पुखराज मारू, आईजी डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्तव, डीआईजी अशोक अवस्थी सहित कई अधिकारी मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक देश में हो रहीं आतंकवादी घटनाओं को देखते हुए आला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। राजधानी के जंबूरी मैदान में 25 सितंबर को होने वाले इस महाकुंभ में दो लाख से अधिक कार्यकर्ताओं को लाने का लक्ष्य रखा गया है। तैयारियों का जायजा: बैठक के श्री दवे ने जंबूरी स्थित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण भी किया। वहां बन रहे पंडाल के अलावा कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और सुविधा के संबंध में की जा रहीं तैयारियों की समीक्षा भी उन्होंने की। इस मौके पर भाजपा जिला इकाई के पदाधिकारी भी मौजूद थे।
रविवार, 14 सितंबर 2008
जया बच्चन से अतिक्रमण तोड़ने का खर्च नहीं वसूल सका बीएमसी
भोपाल। लोकायुक्त के फरमान भी नगर निगम में गंभीरता से नहीं लिए जाते। मात्र औपचारिकता निभाकर छोड़ दिया जाता है। असंल अपार्टमेंट में सपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री जया बच्चन समेत 18 फ्लैट मालिकों को अवैध निर्माण तोड़ने का खर्चा वसूलने के लिए नगर निगम ने नोटिस थमाया था। लेकिन साल भर बाद भी निगम प्रशासन वसूली नहीं कर सका।
असंल अपार्टमेंट के भूतल के फ्लैटों में अतिक्रमण कर खुली भूमि पर कब्जा करने के मामले की लोकायुक्त में शिकायत हुई थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए लोकायुक्त ने अतिक्रमण हटाने की पिछले साल जून में कार्रवाई की थी। इस दौरान फिल्म अभिनेत्री जया बच्चन सहित 18 भवन स्वामियों के 26 फ्लैटों के सामने से निगम की भवन अनुज्ञा शाखा के इंजीनियरों और अतिक्रमण विरोधी दस्ते ने जेसीबी मशीन की मदद से फैंसिंग और पक्के निर्माण को तोड़ दिया था। इसके बाद इस मामले की लोकायुक्त में सुनवाई के दौरान निगम प्रशासन से पूछा गया कि दुबारा अतिक्रमण न हो इसके लिए क्या किया जा रहा है। निगम प्रशासन ने बताया कि असंल अपार्टमेंट के अतिक्रमणकारियों से निगम अमले द्वारा अवैध निर्माण तोड़ने पर आए खर्च की वसूली के लिए नोटिस थमाए जाएंगे। निगम की भवन अनुज्ञा शाखा ने जया बच्चन समेत सभी फ्लैट मालिकों को कुल 56,920 रुपए की वसूली का नोटिस थमाया था। इस नोटिस में अवैध निर्माण तोड़ने पर आए खर्च की राशि सात दिन की अवधि में जमा करने की हिदायत दी गई थी। बावजूद इसके किसी भी अतिक्रमणकारी ने साल भर बाद भी राशि जमा नहीं कराई है।
किससे कितनी राशि की होना है वसूली
फ्लैट मालिक फ्लैट नंबर राशि
जया बच्चन एच-101, 102 2800रु.
पीएस चावला ओ-102,103 4250रु
जसवीर कौर,
सतवंत सिंह,
राजीव कुमार पी-101,102,103- 21120रु
ताहिरा खान एन-101,103 4250रु
रणवीर सिंह एन-102 2125रु
कैलाश अग्रवाल के-102,103 2000रु
सीमा गुप्ता के-101 1400रु
राजेश नागू जे-102,103 4250रु
कुसुम बाजपेयी जी-103 2125रु
एसएन शर्मा क्यू-101,102 2800रु
प्रदीप पाटनी ओ-101 1400 रु
सलीम डी-101 1400रु
यावर रसीद डी-103 1400रु
श्री मनीष जी-101 2800रु
श्री हरविंदर बी-101 1400रु
श्री सिन्हा ए-102 1400 रु
-----------------------
कुल राशि 59,920 रु.
असंल अपार्टमेंट के भूतल के फ्लैटों में अतिक्रमण कर खुली भूमि पर कब्जा करने के मामले की लोकायुक्त में शिकायत हुई थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए लोकायुक्त ने अतिक्रमण हटाने की पिछले साल जून में कार्रवाई की थी। इस दौरान फिल्म अभिनेत्री जया बच्चन सहित 18 भवन स्वामियों के 26 फ्लैटों के सामने से निगम की भवन अनुज्ञा शाखा के इंजीनियरों और अतिक्रमण विरोधी दस्ते ने जेसीबी मशीन की मदद से फैंसिंग और पक्के निर्माण को तोड़ दिया था। इसके बाद इस मामले की लोकायुक्त में सुनवाई के दौरान निगम प्रशासन से पूछा गया कि दुबारा अतिक्रमण न हो इसके लिए क्या किया जा रहा है। निगम प्रशासन ने बताया कि असंल अपार्टमेंट के अतिक्रमणकारियों से निगम अमले द्वारा अवैध निर्माण तोड़ने पर आए खर्च की वसूली के लिए नोटिस थमाए जाएंगे। निगम की भवन अनुज्ञा शाखा ने जया बच्चन समेत सभी फ्लैट मालिकों को कुल 56,920 रुपए की वसूली का नोटिस थमाया था। इस नोटिस में अवैध निर्माण तोड़ने पर आए खर्च की राशि सात दिन की अवधि में जमा करने की हिदायत दी गई थी। बावजूद इसके किसी भी अतिक्रमणकारी ने साल भर बाद भी राशि जमा नहीं कराई है।
किससे कितनी राशि की होना है वसूली
फ्लैट मालिक फ्लैट नंबर राशि
जया बच्चन एच-101, 102 2800रु.
पीएस चावला ओ-102,103 4250रु
जसवीर कौर,
सतवंत सिंह,
राजीव कुमार पी-101,102,103- 21120रु
ताहिरा खान एन-101,103 4250रु
रणवीर सिंह एन-102 2125रु
कैलाश अग्रवाल के-102,103 2000रु
सीमा गुप्ता के-101 1400रु
राजेश नागू जे-102,103 4250रु
कुसुम बाजपेयी जी-103 2125रु
एसएन शर्मा क्यू-101,102 2800रु
प्रदीप पाटनी ओ-101 1400 रु
सलीम डी-101 1400रु
यावर रसीद डी-103 1400रु
श्री मनीष जी-101 2800रु
श्री हरविंदर बी-101 1400रु
श्री सिन्हा ए-102 1400 रु
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कुल राशि 59,920 रु.
सूबे में पांव जमाने की कोशिश में बसपा
Sep 06, 01:05 am
इंदौर। मध्य प्रदेश में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए बहुजन समाज पार्टी ने मध्य प्रदेश में पैर जमाने की मुहिम तेज कर दी है। पार्टी इसी कड़ी में उज्जैन में सात सितंबर को भाईचारा सम्मेलन का आयोजन कर रही है।
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष नर्बदा प्रसाद अहिरवार ने बताया कि प्रदेश की भाजपा सरकार सड़क, बिजली और पानी समेत सारे मोर्चो पर नाकाम रही है। हम भाईचारा सम्मेलन में जनता को सरकार की असलियत से रूबरू करायेंगे। इसमें समतामूलक समाज की स्थापना के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर भी चर्चा की जाएगी।
अहिरवार ने दावा किया कि प्रदेश की जनता कांग्रेस और भाजपा से तंग आ चुकी है और आशा भरी नजरों से किसी तीसरे विकल्प की ओर देख रही है। उन्होंने कहा कि धार्मिक नगरी उज्जैन में सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के नारे के साथ आयोजित होने वाले भाईचारा सम्मेलन में उत्तर प्रदेश की बसपा सरकार के कई मंत्री शामिल होंगे।
गौरतलब है कि बसपा का प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके की कुछ सीटों पर प्रभाव दिखता रहा है। उज्जैन में होने वाले भाईचारा सम्मेलन को मालवा अंचल में पार्टी की जड़ें फैलाने के अभियान से जोड़ कर देखा जा रहा है।
इंदौर। मध्य प्रदेश में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए बहुजन समाज पार्टी ने मध्य प्रदेश में पैर जमाने की मुहिम तेज कर दी है। पार्टी इसी कड़ी में उज्जैन में सात सितंबर को भाईचारा सम्मेलन का आयोजन कर रही है।
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष नर्बदा प्रसाद अहिरवार ने बताया कि प्रदेश की भाजपा सरकार सड़क, बिजली और पानी समेत सारे मोर्चो पर नाकाम रही है। हम भाईचारा सम्मेलन में जनता को सरकार की असलियत से रूबरू करायेंगे। इसमें समतामूलक समाज की स्थापना के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर भी चर्चा की जाएगी।
अहिरवार ने दावा किया कि प्रदेश की जनता कांग्रेस और भाजपा से तंग आ चुकी है और आशा भरी नजरों से किसी तीसरे विकल्प की ओर देख रही है। उन्होंने कहा कि धार्मिक नगरी उज्जैन में सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के नारे के साथ आयोजित होने वाले भाईचारा सम्मेलन में उत्तर प्रदेश की बसपा सरकार के कई मंत्री शामिल होंगे।
गौरतलब है कि बसपा का प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके की कुछ सीटों पर प्रभाव दिखता रहा है। उज्जैन में होने वाले भाईचारा सम्मेलन को मालवा अंचल में पार्टी की जड़ें फैलाने के अभियान से जोड़ कर देखा जा रहा है।
मनोरंजन : रंगमंच कलाकारों का दर्जा सिनेमा कलाकार से ऊंचा: अमिताभ
कोलकाता। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के अनुसार एक फिल्म अभिनेता के लिए परदे पर खुद को रंगमंच कलाकार के रूप में पेश करना बेहद कठिन होता है। निर्माता ऋतुपर्णो घोष की शुक्रवार को रिलीज हुई फिल्म द लास्ट लियर में बच्चन महान नाटककार विलियम शेक्सपीयर के जबरदस्त प्रशंसक एक रंगमंच कलाकार के किरदार में दिखे हैं।
फिल्म के विशेष प्रदर्शन के मौके पर कोलकाता पहुंचे बच्चन ने कहा कि एक रंगमंच कलाकार की कला सिनेमा कलाकार से बढ़कर होती है। मैंने जिस रंगमंच कलाकार, हरीश मिश्रा का चरित्र परदे पर निभाया है, उसके अंदर इस बात का अहम है। रंगमंच के कलाकारों की तरह बातचीत के दौरान मिश्रा अपने हाथ चलाते रहते हैं। बच्चन ने माना कि हैरी के चरित्र को निभाने के लिए उन्हें बेहद मेहनत करनी पड़ी। वे कहते हैं कि हरीश उर्फ हैरी के चरित्र में खुद को ढालने के लिए घोष ने मुझे इतना गृहकार्य दे दिया था कि मुझे स्कूल के दिनों की याद आ गई थी। उन्होंने मुझे शेक्सपीयर के नाटक पढ़ने को दिए और विश्वभर में आयोजित उनके नाटकों की डीवीडी देखने को भी दी। उन्होंने मेरी मेज किताबों से भर दी थी। सेट पर भी वे मुझसे चर्चा करते रहते थे, ताकि मैं हैरी के चरित्र में ही रहूं।
उनके अनुसार हैरी के चरित्र का अकेलापन और सांसारिक विषय ही इस फिल्म की विशेषता है। यह एक मजबूत भावनात्मक फिल्म है जिसे देखकर लोग हंसेंगे भी और रोएंगे भी। उत्पल दत्त के बंगाली नाटक आजकेर शाहजहां पर आधारित इस फिल्म में प्रीति जिंटा और अर्जुन रामपाल ने भी अभिनय किया है। अपनी पहली फिल्म सात हिंदुस्तानी में बच्चन ने दत्त के साथ अभिनय किया था। साथ ही, उनकी बांग्ला फिल्म भुवन शोम के लिए अपनी आवाज भी दी थी।
फिल्म के विशेष प्रदर्शन के मौके पर कोलकाता पहुंचे बच्चन ने कहा कि एक रंगमंच कलाकार की कला सिनेमा कलाकार से बढ़कर होती है। मैंने जिस रंगमंच कलाकार, हरीश मिश्रा का चरित्र परदे पर निभाया है, उसके अंदर इस बात का अहम है। रंगमंच के कलाकारों की तरह बातचीत के दौरान मिश्रा अपने हाथ चलाते रहते हैं। बच्चन ने माना कि हैरी के चरित्र को निभाने के लिए उन्हें बेहद मेहनत करनी पड़ी। वे कहते हैं कि हरीश उर्फ हैरी के चरित्र में खुद को ढालने के लिए घोष ने मुझे इतना गृहकार्य दे दिया था कि मुझे स्कूल के दिनों की याद आ गई थी। उन्होंने मुझे शेक्सपीयर के नाटक पढ़ने को दिए और विश्वभर में आयोजित उनके नाटकों की डीवीडी देखने को भी दी। उन्होंने मेरी मेज किताबों से भर दी थी। सेट पर भी वे मुझसे चर्चा करते रहते थे, ताकि मैं हैरी के चरित्र में ही रहूं।
उनके अनुसार हैरी के चरित्र का अकेलापन और सांसारिक विषय ही इस फिल्म की विशेषता है। यह एक मजबूत भावनात्मक फिल्म है जिसे देखकर लोग हंसेंगे भी और रोएंगे भी। उत्पल दत्त के बंगाली नाटक आजकेर शाहजहां पर आधारित इस फिल्म में प्रीति जिंटा और अर्जुन रामपाल ने भी अभिनय किया है। अपनी पहली फिल्म सात हिंदुस्तानी में बच्चन ने दत्त के साथ अभिनय किया था। साथ ही, उनकी बांग्ला फिल्म भुवन शोम के लिए अपनी आवाज भी दी थी।
मल्लिका का टूटता तिलिस्म!

मल्लिका शेरावत जब अपनी बातें खुलेआम सबके सामने रखती थीं, तब भी उनकी आलोचना होती थी और अब, जब उन्होंने अपना मुंह बंद कर काम पर ध्यान देना शुरू किया है, तब भी उनके हाथ कुछ खास नहीं आ रहा है। फिल्मी दुनिया में मल्लिका के करियर को डूबती नैया माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि समय के साथ उनके आकर्षण का तिलिस्म भी टूट रहा है। सच तो यह है कि अपनी मादक अदाओं के भरोसे दर्शकों का दिल जीतने की आशा भी अब उनके लिए निराशा में बदल रही है। प्यार के साइड इफेक्ट्स की सफलता को आधार बनाकर ही मल्लिका ने अगली और पगली और मान गए मुगल-ए-आजम जैसी रोमांटिक कॉमेडी फिल्में कीं, लेकिन इन फिल्मों को स्वीकारने का निर्णय अंतत: उनके फिल्मी करियर के लिए घातक साबित हुआ। लगातार रिलीज हुई ये फिल्में असफल रहीं और उसका परिणाम यह हुआ कि फिल्म इंडस्ट्री की इस मल्लिका की कुर्सी हिलने लगी।
दरअसल, हिंदी फिल्मों में लगातार मिल रही असफलता की वजह से मल्लिका ने अब हॉलीवुड की ओर ध्यान देना शुरू कर दिया है। यदि उनकी आने वाली फिल्मों की ओर नजर डालें, तो फिलहाल उनके पास हिंदी की एकमात्र फिल्म है फौज में मौज, जबकि हॉलीवुड की दो फिल्में हैं। जहां अनवील्ड में वे योगिनी की भूमिका निभा रही हैं, वहीं हॉलीवुड की मशहूर निर्देशक जेनिफर लींक की फिल्म में वे नागिन बनी हैं। यदि ये फिल्में भी नहीं चलीं, तो मल्लिका न घर की रहेंगी और न घाट की!
नैनोटेक्नोलोजी पर बातचीत विफल
कोलकाता राजनीतिक कार्यकर्ता विरोध एक कार संयंत्र का निर्माण करने के लिए टाटा मोटर्स ' अति नैनोटेक्नोलोजी कार सस्ते ताजा विरोध की धमकी के बाद शनिवार को सरकार के साथ बातचीत विफल रहे गतिरोध को तोड़ने का एक अधिकारी ने कहा . टाटा मोटर्स के कारखाने में काम स्थगित कर दिया पश्चिम बंगाल में है और इससे पहले इस महीने की धमकी को देखने के लिए वैकल्पिक स्थलों के बाद स्थानीय किसानों का समर्थन अवरुद्ध सड़कों के प्रमुख विपक्षी दल के कार्यकर्ताओं की धमकी और संयंत्र है . इस परियोजना से राज्य में नैनो की गई है mired में एक पंक्ति के बाद से देश की नाक snub , 2300 डॉलर की कार में अनावरण किया गया था मेढक के प्रचार जनवरी में . अनिच्छुक किसानों को उनकी भूमि की मांग की थी 300 एकड़ खेत फैक्टरी से जटिल है . सरकार का कहना है कि 70 एकड़ से अधिक वापस जा सकते हैं ( 28 हेक्टेयर ) और मुआवजा देकर किसानों के लिए ज्यादा पैसा है , लेकिन उनके पास इस प्रस्ताव से इनकार कर दिया . " सरकार मुआवजा पैकेज का वादा किया था वह नहीं है जो हम से , " ममता बनर्जी ने कहा , तृणमूल कांग्रेस की नेता है , जो विरोध प्रदर्शन की अगुआई की . " हम अपनी घोषणा के बाद अगले कदम में एक रैली के निकट फैक्टरी पर 16 सितम्बर है . " टाटा मोटर्स ने कहा कि वे टिप्पणी करने के इच्छुक नहीं थे इस समय है . इस टकराव का खतरा कम उत्पादन क्षमता की संभावना नहीं है लेकिन देरी करने के लिए अक्टूबर के प्रक्षेपण की योजना बनाई है नैनो , बिल के रूप में दुनिया की सस्ती कार , कुछ इकाइयों के रूप में आ सकता है नैनो से मौजूदा पौधों . यह एक बड़ी प्रतिबिंबित नैनोटेक्नोलॉजी विरोध के बीच गतिरोध उद्योग और किसानों के अनिच्छुक देने के लिए देश में एक ऐसे देश में जहां तक दो तिहाई आबादी कृषि पर निर्भर करते हैं . राजनीतिकरण की किसानों के रोष ने आगे की जटिल मुद्दा है . नैनोटेक्नोलॉजी की फैक्टरी की जा रही थीं और उसकी सहायक इकाइयों के निर्माण पर लगभग 1000 एकड़ ( 400 हेक्टेयर ) भूमि है . लगभग 400 एकड़ ( 160 हेक्टेयर ) , सहायक इकाइयों के लिए रखी है , के अंतर्गत विवाद है . टाटा मोटर्स की सहायक इकाइयों से अलग कहते हैं मुख्य संयंत्र को इस परियोजना की लागत के हिसाब से परेशान है , और किसी भी परिवर्तन के मूल व्यवस्था में अस्वीकार्य है .
एकजुट रहे दिल्ली के लोग
नई दिल्ली , 13 सितम्बर गृह मंत्री शिवराज पाटिल आज की रात की चेतावनी दी " कड़ी से कड़ी सजा दी " श्रृंखलाबद्ध विस्फोटों के पीछे उन लोगों को देश की राजधानी में लोगों को एकजुट करने की अपील की है और उनके नापाक इरादों विफल . पाटिल , जो स्थिति की समीक्षा की विस्फोटों के तुरंत बाद दावा किया है जो जीवन के कई ने कहा , समय की मांग थी कि उनके का उद्देश्य यह सुनिश्चित करने के लिए सफल नहीं हुए और इस स्थिति बिगड़ना करने की अनुमति नहीं थी . उन्होंने लोगों से अपील की जाँच करने के लिए अफवाह mongering और साहस के साथ काम नहीं किया गया है ताकि सामाजिक सौहार्द अशांत है . विस्फोटों की निंदा करते हुए , उन्होंने के साथ सहानुभूति व्यक्त की हत्या के परिवारों के लोगों के लिए प्रार्थना की और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ है . दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की समीक्षा बैठक में उपस्थित थे .
न्यूज़ : प्रदेश में आचार संहिता ३अक्टूबर से
प्रदेश में आचार संहिता २० से , आधी अधूरी योजनाए से भाजपा शुरू करेगी चुनावी विगुल, कमजोर कांग्रेस नेता उठायेंगे फायदा
शनिवार, 13 सितंबर 2008
जल्द आ रहे है ,
आपके बारे में जानकारी लेकर जल्द आ रहे है हम सोमवार से पढ़े न्यूज़ के साथ मीडिया की खबरे
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