रविवार, 14 सितंबर 2008

मनोरंजन : रंगमंच कलाकारों का दर्जा सिनेमा कलाकार से ऊंचा: अमिताभ

कोलकाता। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के अनुसार एक फिल्म अभिनेता के लिए परदे पर खुद को रंगमंच कलाकार के रूप में पेश करना बेहद कठिन होता है। निर्माता ऋतुपर्णो घोष की शुक्रवार को रिलीज हुई फिल्म द लास्ट लियर में बच्चन महान नाटककार विलियम शेक्सपीयर के जबरदस्त प्रशंसक एक रंगमंच कलाकार के किरदार में दिखे हैं।
फिल्म के विशेष प्रदर्शन के मौके पर कोलकाता पहुंचे बच्चन ने कहा कि एक रंगमंच कलाकार की कला सिनेमा कलाकार से बढ़कर होती है। मैंने जिस रंगमंच कलाकार, हरीश मिश्रा का चरित्र परदे पर निभाया है, उसके अंदर इस बात का अहम है। रंगमंच के कलाकारों की तरह बातचीत के दौरान मिश्रा अपने हाथ चलाते रहते हैं। बच्चन ने माना कि हैरी के चरित्र को निभाने के लिए उन्हें बेहद मेहनत करनी पड़ी। वे कहते हैं कि हरीश उर्फ हैरी के चरित्र में खुद को ढालने के लिए घोष ने मुझे इतना गृहकार्य दे दिया था कि मुझे स्कूल के दिनों की याद आ गई थी। उन्होंने मुझे शेक्सपीयर के नाटक पढ़ने को दिए और विश्वभर में आयोजित उनके नाटकों की डीवीडी देखने को भी दी। उन्होंने मेरी मेज किताबों से भर दी थी। सेट पर भी वे मुझसे चर्चा करते रहते थे, ताकि मैं हैरी के चरित्र में ही रहूं।
उनके अनुसार हैरी के चरित्र का अकेलापन और सांसारिक विषय ही इस फिल्म की विशेषता है। यह एक मजबूत भावनात्मक फिल्म है जिसे देखकर लोग हंसेंगे भी और रोएंगे भी। उत्पल दत्त के बंगाली नाटक आजकेर शाहजहां पर आधारित इस फिल्म में प्रीति जिंटा और अर्जुन रामपाल ने भी अभिनय किया है। अपनी पहली फिल्म सात हिंदुस्तानी में बच्चन ने दत्त के साथ अभिनय किया था। साथ ही, उनकी बांग्ला फिल्म भुवन शोम के लिए अपनी आवाज भी दी थी।

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