गृह मंत्रालय ने सेना से इस बात का स्पष्टीकरण मांगा है कि उसे इस बात का पता कैसे नहीं लगा कि नियंत्रण रेखा पर लगी कंटीली बाड़ के बावजूद हाल ही में नागरिकों ने वहां से घुसपैठ की है।
मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सेना के अधिकारियों से उस घटना का जवाब तलब किया गया है, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के तीन परिवारों ने भारतीय क्षेत्र के 10 किलोमीटर भीतर तक आ कर पुलिस चौकी में अपने आने की सूचना दी।
गृह मंत्रालय ने इस घटना के संदर्भ में सीमा की चौकसी और नियंत्रण रेखा पर लगाई गई कंटीली बाड़ की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बच्चे और उम्र दराज लोग इसे पार करके आ रहे हैं और वहां तैनात लोगों को इसकी भनक तक नहीं लग रही है।
सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्रालय के द्वारा गृह मंत्रालय के इस पत्र को सेना को भेजा गया है। इस बारे में टिप्पणी करने के लिए सेना की ओर से कोई उपलब्ध नहीं हुआ। उत्तरी कश्मीर के कारनाह संभाग के तंगधार क्षेत्र से 26 सितंबर को तड़के पांच बच्चों और एक उम्र दराज महिला सहित 12 लोग नियंत्रण रेखा पार करके भारतीय क्षेत्र में आ गए थे।
जम्मू कश्मीर गृह विभाग ने इस घटना के बारे में केन्द्रीय गृह मंत्रालय को सूचित किया है। 12 लोगों के इस काफिले द्वारा नियंत्रण रेखा पर लगाई गई कंटीली बाड़ को पार करने से सब अचरज में हैं। उससे भी बड़ी हैरत यह है कि नियंत्रण रेखा की निगरानी करने वाले भारतीय जवानों की भी इन पर नज़र नहीं गई। इस काफिले में आठ महीने के एक शिशु सहित पांच बच्चे और एक वृद्धा शामिल हैं।
पुलिस चौकी पर आने पर इन लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। इनमें से कुछ पाकिस्तानी नागरिक हैं। बिना उचित दस्तावेजों के भारतीय सीमा में प्रवेश करने के लिए उनके विरूद्ध उचित कार्रवाई की जा रही है। सेना इस पूरे घटनाक्रम में अपनी कमी पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है। उसके अधिकारी अनौपचारिक तौर पर कह रहे हैं कि इन परिवारों ने नियंत्रण रेखा के समीप बाहरी चौकी में रिपोर्ट किया था। लेकिन पुलिस इस दावे का खंडन कर रही है।
इन परिवारों ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा है कि 1988 से 1996 के बीच वे पाक अधिकृत कश्मीर चले गए थे और वहीं विवाह करके बस गए थे। सूत्रों का कहना है कि नागरिक घुसपैठ का यह कोई अलग थलग मामला नहीं है। उनका दावा है कि नागरिकों द्वारा नियंत्रण रेखा से घुसपैठ करना सामान्य सी बात हो गई है। उन्होंने बताया कि 2006 में उत्तरी कश्मीर में ऐसी घटनाएं शुरु हुई थीं लेकिन पुलिस द्वारा ऐसा करने वालों के खिलाफ मामले दर्ज करने पर उन पर रोक लग गई। हालांकि, उस घटना के दो साल बाद भी केन्द्रीय गृह मंत्रालय पाक अधिकृत कश्मीर से होने वाली ऐसी परिवारिक घुसपैठ के खिलाफ कोई नीति बनाने में अभी तक असफल रहा है।
रविवार, 28 सितंबर 2008
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