विधानसभा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को नामांकन पत्र के साथ दो शपथ पत्र भी जमा करना होंगे। शपथ पत्र में उन्हें अपने आपराधिक रिकार्ड और चल-अचल संपत्ति का पूरा विवरण देना होगा वरना चुनाव आयोग उनका पर्चा खारिज कर देगा।
आयोग के अनुसार आपराधिक मामले का पूरा ब्यौरा देना होगा जिसमें धाराओं और आरोप निर्धारित होने से लेकर ताजा स्थिति तक की जानकारी होनी चाहिए। इसके साथ दिए जाने वाले दूसरे शपथ पत्र में उम्मीदवार के स्वयं, पत्नी और आश्रितों के पास मौजूद नगद राशि, बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों व गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में जमा धनराशि, बांड, डिवेंचर, एनएसएस, डाक बचत, शेयर, बीमा पालिसी, गाड़ियां, गहनों सहित सभी संपत्ति के बारे में बिंदुवार जानकारी देना होगी। इसी तरह उसे अचल संपत्तियों में कृषि भूमि, गैर कृषि भूमि, भवन और ऐसी संपत्ति जिसमें उम्मीदवार का हिस्सा हो उनकी जानकारी देना पड़ेगी। इस शपथ पत्र में उम्मीदवार को कर्ज के बारे में भी बताना होगा कि उसे किसे कितने रुपए देना हैं। आयोग ने नामांकन पत्र भरने में पूरी सतर्कता बरतने की सलाह दी है ताकि पर्चा खारिज न हो। सूत्र बताते हैं कि किसी भी प्रकार की खामी रहने या तय शर्त के तहत नामांकन दाखिल नहीं करने पर आयोग पर्चा निरस्त कर सकता है। आयोग के दफ्तर में हेल्प लाइन शुरू : राजधानी में स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के दफ्तर में मतदाताओं की सहूलियत के लिए 24 घंटे की हेल्प लाइन सेवा शुरू की गई है। हेल्प लाइन के मोबाइल नंबर 9425601845 और 9425601846 पर लोग मतदाता सूची में अपने नाम, फोटो परिचय पत्र, मतदान केंद्र और अपने विधानसभा क्षेत्र आदि के बारे में जानकारी ले सकेंगे। इसके अलावा सिर्फ बीएसएनएल उपभोक्ता मतदाता के रूप में शार्ट कोड नंबर 554466 पर अपने फोटो परिचय पत्र का नंबर एसएमएस कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इन नंबरों पर चौबीस घंटे जानकारी मिलेगी। इसी तरह निर्वाचन कार्यालय के काल सेंटर पर लगे फोन नंबर 0755-2555999 पर भी सुबह छह बजे से रात दस बजे तक संपर्क किया जा सकता है।
तब भी हो सकता है पर्चा निरस्त
* पछले चुनाव के खर्च का ब्यौरा नहीं दिया हो।
* रटर्निग आफिसर और सहायक रिटर्निग आफिसर की जगह किसी और को सौंपने पर।
* आवश्यक और योग्य प्रस्तावकों के हस्ताक्षर नहीं होने पर।
* सुरक्षा राशि जमा नहीं करने पर।
* सही उम्र और अन्य जानकारी नहीं भरने पर।
* संबंधित क्षेत्र का मतदाता नहीं होने पर।
* मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल के अधिकृत पदाधिकारी दल द्वारा पार्टी के उम्मीदवार के बारे में निर्वाचन अधिकारी को सूचना नहीं देने पर।
भाजपा के 3-4 सांसद ही पाएंगे टिकट
भोपाल। प्रदेश में दोबारा सरकार बनाने के लिए पैनल में हर जिले से सांसद का नाम शामिल करने वाली भाजपा ने अब हाथ खींच लिए हैं। पार्टी परिसीमन से प्रभावित तीन से चार सांसदों को ही इस बार विधानसभा चुनाव लड़ाएगी। 23 और 24 अक्टूबर को हुई प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में पार्टी के दस सांसदों के नाम विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए विभिन्न सीटों से पैनल में रखे गए थे। भाजपा के जिन सांसदों को विधानसभा चुनाव में टिकट मिल सकता है उनमें परिसीमन प्रभावित मुरैना सांसद अशोक अर्गल, भिंड सांसद रामलखन सिंह, सागर सांसद वीरेंद्र खटीक, तथा बैतूल सांसद हेमंत खण्डेलवाल के साथ होशंगाबाद सांसद सरताज सिंह का नाम शामिल हैं। धार सांसद छतर सिंह दरबार, सतना सांसद गणेश सिंह और विदिशा सांसद रामपाल सिंह भी टिकट चाहने वालों की सूची में हैं, लेकिन इनका चांस कम है। इनमें पहले दमोह लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके खजुराहो सांसद रामकृष्ण कुसमारिया का भी नाम शामिल था। उनका नाम पथरिया सीट से रखा गया था, लेकिन कुसमारिया ने बैठक के तुरंत बाद चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा जताई है। सांसदों को लड़ाने के बारे में पूछे जाने पर कुसमारिया का प्रतिप्रश्न था, लोकसभा खाली करनी है क्या? विधानसभा के बजाए उनकी नजर नई बनी खजुराहो लोकसभा सीट पर है।
इस बीच कुसमारिया को पथरिया से मैदान में न उतरने को लेकर धमकी भी मिल गई है जिसकी शिकायत उन्होंने प्रदेशाध्यक्ष तथा संगठन महामंत्री से की है। इसी तरह परिसीमन में समाप्त हो रहे सिवनी लोकसभा क्षेत्र की सांसद नीता पटैरिया की केवलारी से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा परवान चढ़ती नहीं दिख रही।
प्रदेश नेतृत्व ने उन्हें अभी तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिए, उल्टे केवलारी का प्रभारी परिसीमन से विधानसभा क्षेत्र बदलने को विवश हुए पूर्व मंत्री ढाल सिंह बिसेन को बना दिया, जो प्रत्याशी की तरह चुनावी तैयारी में जुटे हैं। बैतूल सांसद हेमंत खण्डेलवाल को विधानसभा चुनाव लड़ाने की तैयारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर कर रहे हैं। हालांकि खबर है कि हेमंत ने इस बारे में अपनी अनिच्छा जताई है। प्रदेश चुनाव समिति के एक वरिष्ठ सदस्य पुष्टि करते हैं कि परिसीमन से सीटें बदलने के अलावा बहुत जरूरी होने पर ही सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारा जाएगा। उनके अनुसार सभी को यहां लड़ा देंगे तो पार्टी केंद्र में सरकार बनाने के लिए चुनाव कैसे लड़ेगी।
शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2008
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