भोपाल। भारतीय जनता पार्टी मंगलवार को कांग्रेस सहित तमाम राजनैतिक दलों के निशाने पर रही। इन पार्टियों ने खुले आम भाजपा पर मतदाताओं को लुभाने, जनप्रतिनिधियों को डराने और सरकारी खजाने को लुटाने की शिकायत करते हुए चुनाव आयोग से तत्काल चुनाव आचार संहिता लगाने की अपील की। लेकिन आयोग ने सभी दलों की बात सुनने के बाद हाथ खड़े कर दिए। उप निर्वाचन आयुक्त आर बालकृष्णन आयोग के कार्यालय में मंगलवार शाम को राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर रहे थे।
श्री बालकृष्णन ने डेढ़ घंटे तक भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा और कम्युनिस्ट पार्टी सहित मान्यता प्राप्त सभी दलों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। प्रदेश कांग्रेस विधि विभाग के अध्यक्ष अधिवक्ता विजय चौधरी और कोषाध्यक्ष एनपी प्रजापति ने मुख्यमंत्री द्वारा लगातार की जा रही घोषणाओं और मतदाता सूची में गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए शीघ्र चुनाव आचार संहिता लगाने का अनुरोध किया। इस पर श्री बालकृष्णन ने उन्हें बताया कि आयोग नामीनेशन से 45 दिन पहले ही आचार संहिता लगा सकता है। मतदाता सूची में गड़बड़ी पर कांग्रेस का कहना था कि उनकी शिकायत पर ही इसे ठीक किया गया। सपा के कार्यालय प्रभारी साहिब लाल गौर ने पार्टी के विधायक डॉ. सुनीलम की पिटाई कर मतदाताओं को डराने, कांग्रेस और भाजपा द्वारा चुनावी सामग्री खरीदने व बाल पेंटिंग कराने और चुनाव के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करने की शिकायत की। इस पर उप निर्वाचन आयुक्त ने साफ कहा कि आचार संहिता लगने से पहले आयोग कुछ नहीं कर सकता। पार्टियों ने सत्ताधारी दल पर चुनावी लाभ के लिए सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का भी आरोप लगाया। विभिन्न दलों के इन आरोपों का वहां मौजूद भाजपा के प्रतिनिधि शांतिलाल लोड़ा ने विरोध किया। उनका कहना था कि इसमें आयोग कुछ नहीं कर सकता। श्री बालकृष्णन ने भी इसे राज्य का मामला बता कुछ करने में असमर्थता जताई। सभी दलों के प्रतिनिधियों ने अंतिम प्रकाशन सूची स्कूलों और पंचायत भवन में चस्पा करने का कहा ताकि लोगों को पता चल सके कि उनका नाम जुड़ा है या नहीं। आयोग ने उनसे कहा कि राजनैतिक दल अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से यह चेक कराएं। पार्टियों का कहना था कि जब नाम जोड़ने के लिए सीधे आवेदन लिए जाते हैं तो चेक भी आयोग ही करे। उप निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि प्रदेश में 14 दिसंबर को नई सरकार बननी है।
पोलिंग एजेंट भी होगा आयोग का : उप निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि जिन क्षेत्रों में राजनैतिक दलों के पास पोलिंग एजेंट नहीं हैं वे वहां की सूची दे दें उनके लिए आयोग केंद्रीय शासन के कर्मचारी को वहां माइको पर्यवेक्षक तैनात करेगा। अधिकांश दलों ने पोलिंग एजेंट के उसी क्षेत्र का रहने वाला होने और पुलिस वेरीफिकेशन का विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि कई आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी के कार्यकर्ता नहीं इस कारण वहां एजेंट की समस्या है।
गुरुवार, 2 अक्टूबर 2008
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