गुरुवार, 2 अक्टूबर 2008

अन्नपूर्णा नहीं, तीन रुपए किलो अनाज

भोपाल। राज्य सरकार द्वारा योजनाओं के प्रचार के लिए उठाए गए खर्चीले कदमों के बावजूद सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं से गांवों के लोग अनजान हैं। लाडली लक्ष्मी और मजदूर सुरक्षा जैसी योजनाओं की बात तो दूर वे यह भी नहीं जानते कि तीन रूपए किलो अनाज उन्हें अन्नपूर्णा योजना के तहत मिल रहा है। जबकि सरकार में बैठी भाजपा इन्हीं योजनाओं के जरिए दोबारा सत्ता में लौटने का सपना संजोए हुए है।
दैनिक जागरण ने राज्य सरकार के चार मंत्रियों के निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर योजनाओं की नब्ज टटोली तो यह सच उजागर हुआ। ये क्षेत्र हैं डॉ. गौरीशकर शेजवार का साची, लक्ष्मीकात शर्मा का सिरोंज, राघवजी भाई का शमशाबाद और करण सिंह वर्मा का इछावर। गावों के लोग योजना का नाम भले ही न जानें, अन्नपूर्णा और जननी एक्सप्रेस जैसी कुछ योजनाओं के लाभ से परिचित है। खास बात यह है कि इन योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए राज्य सरकार ने दीवार लेखन कराने के साथ बड़ी तादाद में पुस्तकें व पैम्पलेट छपवाए और निचले स्तर तक बाटे भी गए।
लाड़ली लक्ष्मी योजना: मुख्यमंत्री की पसंदीदा लाड़ली लक्ष्मी का हाल अपेक्षा के मुताबिक नहीं है। साची के ग्यारसाबाद के प्रकाश की तरह गावों में लोग अन्य योजनाओं की तरह इसके बारे में भी नहीं जानते। गाव में कोई लाड़ली लक्ष्मी है पूछने पर हाल ही में पैदा हुई पहली बेटी के पिता प्रकाश सहित आधा दर्जन गाव वाले इकार में सिर हिलाते हैं। इसी बारे में गाव की आगनवाड़ी कार्यकर्ता से पूछा तो उसने बताया प्रकाश की बेटी पहली लाड़ली लक्ष्मी बनेगी, उसका फार्म भरवाया जा रहा है। शमशाबाद के रतवा गाव के महेश शर्मा की बेटी का फार्म भी जमा होने वाला है। इस गाव की वह दूसरी लाड़ली लक्ष्मी होगी। इन दो लोगों के अलावा कोई गाव वाला लाड़ली लक्ष्मी योजना के बारे में नहीं जानता।
जननी एक्सप्रेस: गाव वाले जानते है तो उस टेलीफोन नंबर को जिसे लगा कर डिलेवरी के लिए अस्पताल ले जाने गाड़ी बुलाई जाती है। सिरोंज के रास्ते में मोटे अक्षरों में जननी एक्सप्रेस नेम प्लेट लिखी बोलेरो गाड़ी दिखी और स्वास्थ्य केंद्रों पर उसे बुलाने के लिए मोबाइल फोन के नंबर। लोग इस सेवा से खुश है। बस इतना है कि वे इस योजना के नाम से परिचित नहीं है।
अन्नपूर्णा योजना: हर गरीब परिवार को तीन रुपए किलो गेंहू और साढ़े चार रुपए किलो चावल देने के लिए शुरू की गई अन्नपूर्णा योजना के नाम से पूछने पर लोग इसे नहीं जानते। तीन रुपए किलो अनाज मिला या नहीं, इस सवाल पर जवाब होता है मिलता है। इस योजना की शिकायत करने वाला कोई नहीं मिला। किसी को परेशानी है तो बस इस बात की कि अनाज मिलने के दिन नियत है। दो माह का अनाज एकमुश्त मिल रहा है। इछावर विधानसभा क्षेत्र के पालखेड़ी के प्रेम सिंह और सिरोंज के चितावर के रामकुमार जरूर कहते है कि परमिट नहीं बना।
काम मिला नहीं दस
रुपए और चले गए
सिरोंज क्षेत्र के ग्राम औराखेड़ी के खुमान सिंह ने यह टिप्पणी रोजगार गारटी योजना के बारे में की थी। उसके अनुसार जॉब कार्ड बना है पर काम नहीं मिल रहा। सरपंच कहते है कि दीवाली के समय काम खोलेंगे। खुमान सिंह कहता है उम्मीद थी कि वाटरशेड में काम निकलेगा लेकिन मिला नहीं। उसे काम नहीं मिलने के साथ इस बात का रज है कि पंजीयन के लिए दस रुपए और जेब से चले गए। वह नहीं जानता कि यह राशि मजदूर सुरक्षा योजना के लिए ली गई है। मुख्यमंत्री की दूसरी पसंदीदा योजना मजदूर सुरक्षा योजना की हकीकत भी यही है। जिसके लिए पंजीयन तो हुआ लेकिन लोगों को पता नहीं इसका लाभ उन्हें कैसे मिलेगा।

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