बुधवार, 8 अक्टूबर 2008

कैबिनेट मंत्री भी भ्रष्टाचार से परेशान

भोपाल। प्रदेश की आम जनता ही नहीं, केबिनेट मंत्री तक भ्रष्टाचार से परेशान हैं। ऐसा ही एक मामला मंगलवार को सामने आया। अपने विभाग में भ्रष्टाचार से परेशान खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री अखंड प्रताप सिंह यादव ने उपलोकायुक्त से गुहार लगाई। मंत्री जी इस मामले में राज्य आर्थिक अपराध ब्यूरो के अफसरों से भी समय मांग चुके हैं।
श्री सिंह मंगलवार दोपहर दो बजे लोकायुक्त कार्यालय पहुंचे। वे चुपचाप पहले लोकायुक्त कार्यालय के सचिव से मिले और फिर उपलोकायुक्त चंद्रेश भूषण के पास जा पहुंचे। वहां उन्होंने करीब बीस मिनट उपलोकायुक्त से बंद कमरे में बात की। इसके बाद बाहर निकले और मीडिया से मुखातिब हुए। मंत्री अखंड प्रताप सिंह की सफाई भी काबिले गौर थी। 'मेरे विभाग में अन्नपूर्णा योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन और खाद्यान्नों के उपार्जन में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ किस प्रकार कार्रवाई की जा सकती है, इसी के लिए सलाह लेने में उपलोकायुक्त महोदय के पास आया हूं।' एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, हां मैं केबिनेट मंत्री हूं, कार्रवाई करने में सक्षम हूं, इसी कारण सलाह लेने आया हूं। उनका कहना था कि इस मामले में उन्होंने ईओडब्ल्यू के वरिष्ठ अफसरों से भी समय मांगा है। संभंवत: वे बुधवार को ब्यूरो के अफसरों से मिल सकते हैं। इस मुलाकात में भी वे भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के बारे में विचार करेंगे।
कांग्रेस प्रवक्ता के आरोपों पर भी दी सफाई : खाद्य मंत्री ने उपलोकायुक्त चंद्रेश भूषण को कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा द्वारा खुद पर लगाए आरोपों के बारे में सफाई दी। उन्होंने लोकायुक्त के नाम संबोधित एक संक्षिप्त ज्ञापन भी मीडिया को सौंपा। इसमें लिखा है कि मुझे समाचार पत्रों से ज्ञात हुआ है कि श्री मिश्रा ने उनके खिलाफ कोई शिकायत आपके यहां की है। इस शिकायत पर अविलंब कार्रवाई की जाए और यदि मेरे सहयोग की सूचना हो तो मुझे सूचित कर दिया जाए। इसकी एक कापी उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी भेजी है। मंत्री जी ने इस मुद्दे पर कहा कि मैंने अपने अधिकार का उपयोग करते हुए बंसल पेट्रोल पंप पर की गई कार्रवाई पर अस्थायी स्टे दिया था। ये कार्रवाई मैंने मेरे सामने पेश किए गए तथ्यों के आधार पर की थी। उनका कहना था कि यदि किसी को कोई आपत्ति है तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। उनका कहना था कि मैं यहां सफाई देने नहीं, अपना पक्ष रखने आया हूं। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में उन्हें या उनके विभाग को लोकायुक्त ने कोई नोटिस जारी नहीं किया है।

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