भोपाल। 'काम कहीं वेतन कहीं से' की तर्ज पर पद न होने के बावजूद अपनी पसंद के कालेज में पढ़ा रहे प्रोफेसरों की मनमानी अब नहीं चलेगी। अब यदि वेतन चाहिए तो उन्हें उसी कालेज में क्लास लेना होगी, जहां से वेतन निकल रहा है। यह व्यवस्था इसी माह से जारी कर दी गई है। इसके बाद भी किसी कालेज में इस तरह की दोहरी व्यवस्था मिलती है तो प्राचार्य के साथ क्षेत्र के अतिरिक्त संचालक पर भी गाज गिरना तय है।
प्रदेश के सरकारी कालेजों के 150 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रोफेसर इस आदेश के घेरे में आ गए हैं। ऐसे प्रोफेसरों की सर्वाधिक संख्या राजधानी में हैं तो इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा के कालेजों में भी इनकी संख्या बहुतायत में है। हालत यह है कि अतिशेष और संबंधित विषय न होने के बाद भी प्रोफेसर शहरों के कालेजों में कब्जा जमाए हुए हैं। इनके कारण विभाग के आदेशों की तो धज्जियां उड़ ही रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कालेजों में भरपूर शिक्षक होने के बाद भी छात्र-छात्राओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है। बार-बार आदेश जारी करने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने एक अक्टूबर से इस तरह की व्यवस्था पर रोक लगा दी है। अब जिस कालेज से वेतन निकल रहा होगा, शिक्षकों को अध्यापन कार्य भी उसी कालेज में करना होगा। किसी भी स्थिति में दूसरे कालेज में अटैच प्रोफेसर्स को वेतन भुगतान अब नहीं होगा। विशेषकर उन कालेजों में तो कतई पद विरुद्ध वेतन नहीं निकाला जाएगा, जहां पहले से ही निर्धारित संख्या से अधिक प्रोफेसर पदस्थ हैं।
मनमानी करने वालों से किया आग्रह
आयुक्त उच्च शिक्षा ने विभाग की व्यवस्था को ध्वस्त करने वाले प्रोफेसरों से विशेष अंदाज में आग्रह तक कर डाला है। 'असुविधा के लिए खेद है' की तर्ज में दिए आदेश में आयुक्त ने मनमानी करने वालों से निवेदन किया है कि उन्हें यदि वेतन चाहिए तो कृपया उसी कालेज में जाकर पढ़ाएं, जहां से वेतन जारी हो रहा है। ताकि ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को भी आपके अनुभव का लाभ मिल सके।
अतिथि विद्वानों की नियुक्ति भी अटकी
ये शहर पसंद प्रोफेसर खुद तो गांव में जाना नहीं चाहते, कोई दूसरा वहां जाना चाहे तो उसमें भी रोड़ा साबित हो रहे हैं। इनका वेतन गांव के कालेजों से निकलने के कारण आज तक अतिथि विद्वानों की नियुक्ति भी नहीं हो पा रही है। बार-बार आदेश और बजट जारी करने के बाद भी अतिथि विद्वानों की नियुक्ति न होने से नाराज विभाग ने ऐसे सभी कालेजों से दस अक्टूबर तक इस संबंध में जानकारी तलब की है। जानकारी न आने की स्थिति में माना जाएगा कि उस कालेज में पद के विरुद्ध किसी भी शिक्षक का वेतन नहीं निकल रहा है। इसके बाद यदि जांच में यह स्थिति मिलती है तो उसके लिए प्राचार्य के साथ क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक को भी दोषी माना जाएगा।
बुधवार, 8 अक्टूबर 2008
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