विधानसभा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को नामांकन पत्र के साथ दो शपथ पत्र भी जमा करना होंगे। शपथ पत्र में उन्हें अपने आपराधिक रिकार्ड और चल-अचल संपत्ति का पूरा विवरण देना होगा वरना चुनाव आयोग उनका पर्चा खारिज कर देगा।
आयोग के अनुसार आपराधिक मामले का पूरा ब्यौरा देना होगा जिसमें धाराओं और आरोप निर्धारित होने से लेकर ताजा स्थिति तक की जानकारी होनी चाहिए। इसके साथ दिए जाने वाले दूसरे शपथ पत्र में उम्मीदवार के स्वयं, पत्नी और आश्रितों के पास मौजूद नगद राशि, बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों व गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में जमा धनराशि, बांड, डिवेंचर, एनएसएस, डाक बचत, शेयर, बीमा पालिसी, गाड़ियां, गहनों सहित सभी संपत्ति के बारे में बिंदुवार जानकारी देना होगी। इसी तरह उसे अचल संपत्तियों में कृषि भूमि, गैर कृषि भूमि, भवन और ऐसी संपत्ति जिसमें उम्मीदवार का हिस्सा हो उनकी जानकारी देना पड़ेगी। इस शपथ पत्र में उम्मीदवार को कर्ज के बारे में भी बताना होगा कि उसे किसे कितने रुपए देना हैं। आयोग ने नामांकन पत्र भरने में पूरी सतर्कता बरतने की सलाह दी है ताकि पर्चा खारिज न हो। सूत्र बताते हैं कि किसी भी प्रकार की खामी रहने या तय शर्त के तहत नामांकन दाखिल नहीं करने पर आयोग पर्चा निरस्त कर सकता है। आयोग के दफ्तर में हेल्प लाइन शुरू : राजधानी में स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के दफ्तर में मतदाताओं की सहूलियत के लिए 24 घंटे की हेल्प लाइन सेवा शुरू की गई है। हेल्प लाइन के मोबाइल नंबर 9425601845 और 9425601846 पर लोग मतदाता सूची में अपने नाम, फोटो परिचय पत्र, मतदान केंद्र और अपने विधानसभा क्षेत्र आदि के बारे में जानकारी ले सकेंगे। इसके अलावा सिर्फ बीएसएनएल उपभोक्ता मतदाता के रूप में शार्ट कोड नंबर 554466 पर अपने फोटो परिचय पत्र का नंबर एसएमएस कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इन नंबरों पर चौबीस घंटे जानकारी मिलेगी। इसी तरह निर्वाचन कार्यालय के काल सेंटर पर लगे फोन नंबर 0755-2555999 पर भी सुबह छह बजे से रात दस बजे तक संपर्क किया जा सकता है।
तब भी हो सकता है पर्चा निरस्त
* पछले चुनाव के खर्च का ब्यौरा नहीं दिया हो।
* रटर्निग आफिसर और सहायक रिटर्निग आफिसर की जगह किसी और को सौंपने पर।
* आवश्यक और योग्य प्रस्तावकों के हस्ताक्षर नहीं होने पर।
* सुरक्षा राशि जमा नहीं करने पर।
* सही उम्र और अन्य जानकारी नहीं भरने पर।
* संबंधित क्षेत्र का मतदाता नहीं होने पर।
* मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल के अधिकृत पदाधिकारी दल द्वारा पार्टी के उम्मीदवार के बारे में निर्वाचन अधिकारी को सूचना नहीं देने पर।
भाजपा के 3-4 सांसद ही पाएंगे टिकट
भोपाल। प्रदेश में दोबारा सरकार बनाने के लिए पैनल में हर जिले से सांसद का नाम शामिल करने वाली भाजपा ने अब हाथ खींच लिए हैं। पार्टी परिसीमन से प्रभावित तीन से चार सांसदों को ही इस बार विधानसभा चुनाव लड़ाएगी। 23 और 24 अक्टूबर को हुई प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में पार्टी के दस सांसदों के नाम विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए विभिन्न सीटों से पैनल में रखे गए थे। भाजपा के जिन सांसदों को विधानसभा चुनाव में टिकट मिल सकता है उनमें परिसीमन प्रभावित मुरैना सांसद अशोक अर्गल, भिंड सांसद रामलखन सिंह, सागर सांसद वीरेंद्र खटीक, तथा बैतूल सांसद हेमंत खण्डेलवाल के साथ होशंगाबाद सांसद सरताज सिंह का नाम शामिल हैं। धार सांसद छतर सिंह दरबार, सतना सांसद गणेश सिंह और विदिशा सांसद रामपाल सिंह भी टिकट चाहने वालों की सूची में हैं, लेकिन इनका चांस कम है। इनमें पहले दमोह लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके खजुराहो सांसद रामकृष्ण कुसमारिया का भी नाम शामिल था। उनका नाम पथरिया सीट से रखा गया था, लेकिन कुसमारिया ने बैठक के तुरंत बाद चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा जताई है। सांसदों को लड़ाने के बारे में पूछे जाने पर कुसमारिया का प्रतिप्रश्न था, लोकसभा खाली करनी है क्या? विधानसभा के बजाए उनकी नजर नई बनी खजुराहो लोकसभा सीट पर है।
इस बीच कुसमारिया को पथरिया से मैदान में न उतरने को लेकर धमकी भी मिल गई है जिसकी शिकायत उन्होंने प्रदेशाध्यक्ष तथा संगठन महामंत्री से की है। इसी तरह परिसीमन में समाप्त हो रहे सिवनी लोकसभा क्षेत्र की सांसद नीता पटैरिया की केवलारी से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा परवान चढ़ती नहीं दिख रही।
प्रदेश नेतृत्व ने उन्हें अभी तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिए, उल्टे केवलारी का प्रभारी परिसीमन से विधानसभा क्षेत्र बदलने को विवश हुए पूर्व मंत्री ढाल सिंह बिसेन को बना दिया, जो प्रत्याशी की तरह चुनावी तैयारी में जुटे हैं। बैतूल सांसद हेमंत खण्डेलवाल को विधानसभा चुनाव लड़ाने की तैयारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर कर रहे हैं। हालांकि खबर है कि हेमंत ने इस बारे में अपनी अनिच्छा जताई है। प्रदेश चुनाव समिति के एक वरिष्ठ सदस्य पुष्टि करते हैं कि परिसीमन से सीटें बदलने के अलावा बहुत जरूरी होने पर ही सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारा जाएगा। उनके अनुसार सभी को यहां लड़ा देंगे तो पार्टी केंद्र में सरकार बनाने के लिए चुनाव कैसे लड़ेगी।
शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2008
प्रत्याशियों पर भाजपा चुनाव समिति में खींचतान
भाजपा की प्रदेश चुनाव समिति की अंतिम बैठक के दौरान दो अलग-अलग दंगल चल रहे थे। बंद कमरे में समिति के वरिष्ठ सदस्य अपनी सिफारिशों पर अड़े थे, तो बाहर दावेदारों के समर्थक अपने नेता के लिए माहौल बना रहे थे। बैठक की संभावित गर्मी को भांप कर ही प्रदेश प्रभारी राष्ट्रीय महामंत्री अनंत कुमार को बगैर कार्यक्रम के इस बैठक में आना पड़ा।
सुबह साढ़े 11 बजे शुरू हुई प्रत्याशी चयन की इस तीसरी बैठक में चुनाव समिति के नेता भले ही करीब आए, लेकिन सूत्रों के अनुसार उनके मतभेद पहले से ज्यादा मुखर रहे। आज राउण्ड टेबल बैठक चली। इससे पहले हुई दोनों बैठकों में से 23 को सारे नेता सोफे पर दूर-दूर बैठे थे, 24 अक्टूबर को सोफा हटा कर पास-पास कुर्सियां लगाई गई थीं। बैठक से पहले सांसद विक्रम वर्मा के घर पहुंची सुमित्रा महाजन ने करीब एक घंटे तक उनके साथ बैठ कर रणनीति पर चर्चा की।
बैठक में नीले रंग की फाइल लेकर आए वर्मा पूरी तैयारी के साथ थे। अनंत कुमार भी सर्वे और परिसीमन के आधार पर तैयार रिपोर्ट लेकर बैठे। प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने दीवाली से पहले राष्ट्रीय संगठन महामंत्री की सहमति से तैयार प्रत्याशियों की संभावित सूची पेश की। बावजूद इसके समिति के सदस्य वरिष्ठ सांसदों ने सभी सीटों पर पैनल में आए नामों पर गुण-दोष के आधार पर विचार करने पर जोर डाला। बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ तो रात तक चला और सहमति के प्रयासों पर असहमति हावी होती रही।
सीएम के साथ प्रकट हुए अनंत कुमार : प्रदेश चुनाव समिति बैठक के लिए सुबह 11 बजे भाजपा प्रदेश कार्यालय में अनंत कुमार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ प्रकट हुए। वे सुबह ही भोपाल आए और सीएम हाउस होते हुए कार्यालय पहुंचे। प्रदेश चुनाव समिति का सदस्य न होने के बावजूद राष्ट्रीय महामंत्री थावरचंद गेहलोत पूरे समय बैठक में रहे। वे केंद्रीय चुनाव समिति में प्रदेश के इकलौते सदस्य हैं। जबकि राष्ट्रीय सचिव प्रभात झा ने अपने कक्ष में ही आज का दिन बिताया।
जोशी को लेकर लगती रही अटकलें : पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी चुनाव समिति की बैठक में निर्धारित समय से करीब एक घंटे विलंब से पहुंचे। इसे लेकर कयास लगते रहे कि वे नाराज हैं।
कुछ लोगों ने उनके घर भी फोन लगा लिया, वहां से बताया गया कि वे बैठक के लिए रवाना हो गए हैं। इसी तरह दोपहर में वे भोजन के लिए अपने घर गए तो खबर चल पड़ी कि जोशी बैठक छोड़ गए। इसके घंटे भर बाद वे वापस लौट आए।
राजगढ़ वालों का शक्ति प्रदर्शन : राजगढ़ से विधायक हरिचरण तिवारी को लेकर चुनाव समिति की बैठक के दौरान भाजपा आफिस में शक्तिप्रदर्शन हुआ। एक गुट उन्हें टिकट न देने की मांग करते हुए प्रदेश कार्यालय में आकर नारेबाजी करने लगा। इसमें पंकज शर्मा, राजू इंगले आदि शामिल थे। राष्ट्रीय महामंत्री थावरचंद गेहलोत और सह संगठन महामंत्री भगवतशरण माथुर ने उन्हें समझा बुझा कर भेजा ही था कि तिवारी के समर्थन में लोग आकर नारेबाजी करने लगे।
सुबह साढ़े 11 बजे शुरू हुई प्रत्याशी चयन की इस तीसरी बैठक में चुनाव समिति के नेता भले ही करीब आए, लेकिन सूत्रों के अनुसार उनके मतभेद पहले से ज्यादा मुखर रहे। आज राउण्ड टेबल बैठक चली। इससे पहले हुई दोनों बैठकों में से 23 को सारे नेता सोफे पर दूर-दूर बैठे थे, 24 अक्टूबर को सोफा हटा कर पास-पास कुर्सियां लगाई गई थीं। बैठक से पहले सांसद विक्रम वर्मा के घर पहुंची सुमित्रा महाजन ने करीब एक घंटे तक उनके साथ बैठ कर रणनीति पर चर्चा की।
बैठक में नीले रंग की फाइल लेकर आए वर्मा पूरी तैयारी के साथ थे। अनंत कुमार भी सर्वे और परिसीमन के आधार पर तैयार रिपोर्ट लेकर बैठे। प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने दीवाली से पहले राष्ट्रीय संगठन महामंत्री की सहमति से तैयार प्रत्याशियों की संभावित सूची पेश की। बावजूद इसके समिति के सदस्य वरिष्ठ सांसदों ने सभी सीटों पर पैनल में आए नामों पर गुण-दोष के आधार पर विचार करने पर जोर डाला। बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ तो रात तक चला और सहमति के प्रयासों पर असहमति हावी होती रही।
सीएम के साथ प्रकट हुए अनंत कुमार : प्रदेश चुनाव समिति बैठक के लिए सुबह 11 बजे भाजपा प्रदेश कार्यालय में अनंत कुमार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ प्रकट हुए। वे सुबह ही भोपाल आए और सीएम हाउस होते हुए कार्यालय पहुंचे। प्रदेश चुनाव समिति का सदस्य न होने के बावजूद राष्ट्रीय महामंत्री थावरचंद गेहलोत पूरे समय बैठक में रहे। वे केंद्रीय चुनाव समिति में प्रदेश के इकलौते सदस्य हैं। जबकि राष्ट्रीय सचिव प्रभात झा ने अपने कक्ष में ही आज का दिन बिताया।
जोशी को लेकर लगती रही अटकलें : पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी चुनाव समिति की बैठक में निर्धारित समय से करीब एक घंटे विलंब से पहुंचे। इसे लेकर कयास लगते रहे कि वे नाराज हैं।
कुछ लोगों ने उनके घर भी फोन लगा लिया, वहां से बताया गया कि वे बैठक के लिए रवाना हो गए हैं। इसी तरह दोपहर में वे भोजन के लिए अपने घर गए तो खबर चल पड़ी कि जोशी बैठक छोड़ गए। इसके घंटे भर बाद वे वापस लौट आए।
राजगढ़ वालों का शक्ति प्रदर्शन : राजगढ़ से विधायक हरिचरण तिवारी को लेकर चुनाव समिति की बैठक के दौरान भाजपा आफिस में शक्तिप्रदर्शन हुआ। एक गुट उन्हें टिकट न देने की मांग करते हुए प्रदेश कार्यालय में आकर नारेबाजी करने लगा। इसमें पंकज शर्मा, राजू इंगले आदि शामिल थे। राष्ट्रीय महामंत्री थावरचंद गेहलोत और सह संगठन महामंत्री भगवतशरण माथुर ने उन्हें समझा बुझा कर भेजा ही था कि तिवारी के समर्थन में लोग आकर नारेबाजी करने लगे।
कलेक्टरों को मिल सकती है सप्ताह भर की मोहलत
प्रदेश के कुछ जिलों में अभी भी पूरे मतदाता फोटो परिचय-पत्र नहीं बांटे जा सके हैं। जबकि चुनाव आयोग द्वारा तय समय सीमा शनिवार को समाप्त हो रही है। ऐसे में शनिवार को हो रही कमिश्नर-कलेक्टरों की बैठक में कुछ जिलों के कलेक्टरों को आयोग की फटकार पड़ सकती है। साथ ही आयोग कलेक्टरों को एक सप्ताह की अंतिम मोहलत भी दे सकता है।
ज्ञात रहे कि निर्वाचन आयोग के निर्देश पर पिछले शनिवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी जेएस माथुर ने वीडियो कांफ्रें¨सग के जरिए सारे जिला कलेक्टरों को हर हालत में 31 अक्टूबर तक मतदाता फोटो परिचय-पत्र बांटने के आदेश दिए थे। सूत्र बताते हैं कि जिलों से हर रोज मतदाता परिचय-पत्र के बांटे जाने की रिपोर्ट ली जा रही है। अभी भी कुछ जिलों में शत-प्रतिशत काम नहीं हुआ है। इस कारण उन कलेक्टरों की नींद उड़ी हुई है, जिनके यहां पूरा काम नहीं हुआ है।
ज्ञात रहे कि निर्वाचन आयोग के निर्देश पर पिछले शनिवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी जेएस माथुर ने वीडियो कांफ्रें¨सग के जरिए सारे जिला कलेक्टरों को हर हालत में 31 अक्टूबर तक मतदाता फोटो परिचय-पत्र बांटने के आदेश दिए थे। सूत्र बताते हैं कि जिलों से हर रोज मतदाता परिचय-पत्र के बांटे जाने की रिपोर्ट ली जा रही है। अभी भी कुछ जिलों में शत-प्रतिशत काम नहीं हुआ है। इस कारण उन कलेक्टरों की नींद उड़ी हुई है, जिनके यहां पूरा काम नहीं हुआ है।
प्रत्याशी आज से पर्चा दाखिल की प्रक्रिया शुरू
प्रदेश में शुक्रवार से उम्मीदवार नामांकन दाखिल करना शुरू हो जाएगा। राज्यपाल डॉ. बलराम जाखड़ के अधिसूचना जारी करते ही सुबह 11 बजे से पर्चा दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी जो शाम तीन बजे तक चलेगी। पहले दिन छोटी पार्टियां और कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चा दाखिल करने की उम्मीद है। क्योंकि अभी तक कांग्रेस और भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि सात नवंबर है। उम्मीदवारों को नामांकन के साथ पांच हजार सुरक्षा निधि के रूप में जमा करने होंगे लेकिन अनुसूचित जाति और जनजाति के उम्मीदवार के लिए पचास फीसदी की छूट दी गई है। वह सिर्फ ढाई हजार रुपए जमा कर नामांकन दाखिल कर सकेंगे। आयोग ने नामांकन दाखिल करते समय उम्मीदवार के साथ सिर्फ पांच लोगों को जाने की इजाजत दी है।
साध्वी प्रज्ञा को चुनाव लड़ाना चाहती हैं उमा भारती
मालेगांव बम धमाके के सिलसिले में गिरफ्तार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के प्रति उमा भारती का समर्थन लगातार मजबूत होता जा रहा है। उमा की पार्टी भारतीय जनशक्ति (भाजश) पार्टी की ओर से प्रज्ञा को मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने की पेशकश की गई है। पार्टी की ओर से उन्हें कानूनी मदद मुहैया कराने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
भाजश के राष्ट्रीय सचिव इंदर प्रजापत ने गुरुवार को यहां संवाददाताओं से कहा, इस बारे में प्रज्ञा के वकील से बात हुई है। प्रजापत ने कहा कि अगर प्रज्ञा राजी हुई तो मध्यप्रदेश में भाजपा के किसी कद्दावर नेता के खिलाफ उन्हें चुनाव मैदान में उतारा जाएगा। प्रजापत ने प्रज्ञा को 'पूरी तरह निर्दोष' करार दिया और उनकी गिरफ्तारी को राजनीति से प्रेरित तथा संत समुदाय को बदनाम करने की साजिश बताया। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि जनता की अदालत अंतत: प्रज्ञा को बरी कर देगी।' प्रज्ञा को 29 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। वह तीन नवंबर तक महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधी दस्ते की हिरासत में हैं।
भाजश प्रमुख उमा भारती ने उनकी गिरफ्तारी के फौरन बाद इसे साजिश बताया था और प्रज्ञा को साफ निर्दोष करार दिया था।
भाजश के राष्ट्रीय सचिव इंदर प्रजापत ने गुरुवार को यहां संवाददाताओं से कहा, इस बारे में प्रज्ञा के वकील से बात हुई है। प्रजापत ने कहा कि अगर प्रज्ञा राजी हुई तो मध्यप्रदेश में भाजपा के किसी कद्दावर नेता के खिलाफ उन्हें चुनाव मैदान में उतारा जाएगा। प्रजापत ने प्रज्ञा को 'पूरी तरह निर्दोष' करार दिया और उनकी गिरफ्तारी को राजनीति से प्रेरित तथा संत समुदाय को बदनाम करने की साजिश बताया। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि जनता की अदालत अंतत: प्रज्ञा को बरी कर देगी।' प्रज्ञा को 29 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। वह तीन नवंबर तक महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधी दस्ते की हिरासत में हैं।
भाजश प्रमुख उमा भारती ने उनकी गिरफ्तारी के फौरन बाद इसे साजिश बताया था और प्रज्ञा को साफ निर्दोष करार दिया था।
बुधवार, 15 अक्टूबर 2008
भाजपा की आज से उल्टी गिनती शुरू: पचौरी
चुनाव आचार संहिता लगते ही भारतीय जनता पार्टी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। अब भाजपा को पांच साल में किए गए वादों, झूठे आश्वासन और कोरी घोषणाओं पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। इस सरकार के कार्यकाल में सरकारी अफसरों की मदद से किए गए आयोजनों पर हुए फिजूल खर्च और सरकारी जमीनों की बंदरबांट की भी जांच होना चाहिए। यह कहना है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी का। वे मंगलवार को पीसीसी में संवाददाताओं से चर्चा कर रहे थे।
श्री पचौरी ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बुधनी और होशंगाबाद में रेत खदानों के लिए मारामारी हो रही है। खनिज घोटाले हो रहे हैं। जिन लोगों के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष श्रीमती जमुना देवी ने रेत माफिया होने की शिकायत की थी, उन पर कार्रवाई करने की जगह लालबत्ती दे दी गई। उन्होंने सरकार की खामियां गिनाते हुए कहा कि 11 पंचायतों में 341 घोषणाएं की गई थीं, इनमें से 59 अब तक पूरी नहीं हुई हैं। 41 महीनों में 1,00,453 बच्चे कुपोषण से एक साल की उम्र से पहले ही मौत के मुंह में चले गए। प्रदेश 1,94,711 आपराधिक मामले दर्ज कर देश में सबसे अधिक अपराध होने वाला राज्य बन गया। प्रदेश में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या बढ़ी है, पूर्ण साक्षरता का वादा करने वाली सरकार में 63.7 फीसदी ही साक्षरता है, आज भी 58 फीसदी बच्चे प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर स्कूल छोड़ देते हैं। श्री पचौरी ने कहा कि इस सरकार में पांच मेडिकल कालेजों को मान्यता समाप्त हो गई, कृषि की उपेक्षा हुई, सांप्रदायिक दंगे हुए, बुरहानपुर विधायक पर झूठा मुकदमा दर्ज किया और आदिवासियों को बेदखल किया गया।
हाईकमान तय करेगा, चुनाव लड़ूंगा या नहीं
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने कहा कि वह पार्टी के आदेश का पालन करेंगे, उन्हें उम्मीदवार बनाना है या नहीं, इसका निर्णय केन्द्रीय चुनाव समिति और आलाकमान करेगा। यह पूछने पर कि कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची कब तक जारी होगी, उन्होंने कहा कि केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक की तिथि अभी तय नहीं हुई है। उसकी बैठक के बाद ही उम्मीदवारों की सूची जारी हो सकेगी। उन्होंने कहा कि जीतने योग्य उम्मीदवार पार्टी टिकट का हकदार होगा। विधानसभा चुनाव घोषणा पत्र के बारे में श्री पचौरी ने कहा कि प्रदेश चुनाव घोषणा पत्र समिति की तीन बैठकें हो चुकी हैं और हम घोषणा पत्र को अंतिम रूप दे रहे हैं, लेकिन इसे अंतिम स्वरूप तो केन्द्रीय चुनाव घोषणा पत्र समिति ही देगी। कांग्रेस सांसद माणिक सिंह और पूर्व मंत्री प्रेमनारायण ठाकुर के भाजपा में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनाव के समय नेता इधर से उधर होते रहते हैं, इसमें कोई खास बात नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के दबाव में श्रीमती सोनिया गांधी की आमसभा के लिए लाल परेड मैदान नहीं दिया गया।
श्री पचौरी ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बुधनी और होशंगाबाद में रेत खदानों के लिए मारामारी हो रही है। खनिज घोटाले हो रहे हैं। जिन लोगों के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष श्रीमती जमुना देवी ने रेत माफिया होने की शिकायत की थी, उन पर कार्रवाई करने की जगह लालबत्ती दे दी गई। उन्होंने सरकार की खामियां गिनाते हुए कहा कि 11 पंचायतों में 341 घोषणाएं की गई थीं, इनमें से 59 अब तक पूरी नहीं हुई हैं। 41 महीनों में 1,00,453 बच्चे कुपोषण से एक साल की उम्र से पहले ही मौत के मुंह में चले गए। प्रदेश 1,94,711 आपराधिक मामले दर्ज कर देश में सबसे अधिक अपराध होने वाला राज्य बन गया। प्रदेश में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या बढ़ी है, पूर्ण साक्षरता का वादा करने वाली सरकार में 63.7 फीसदी ही साक्षरता है, आज भी 58 फीसदी बच्चे प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर स्कूल छोड़ देते हैं। श्री पचौरी ने कहा कि इस सरकार में पांच मेडिकल कालेजों को मान्यता समाप्त हो गई, कृषि की उपेक्षा हुई, सांप्रदायिक दंगे हुए, बुरहानपुर विधायक पर झूठा मुकदमा दर्ज किया और आदिवासियों को बेदखल किया गया।
हाईकमान तय करेगा, चुनाव लड़ूंगा या नहीं
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने कहा कि वह पार्टी के आदेश का पालन करेंगे, उन्हें उम्मीदवार बनाना है या नहीं, इसका निर्णय केन्द्रीय चुनाव समिति और आलाकमान करेगा। यह पूछने पर कि कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची कब तक जारी होगी, उन्होंने कहा कि केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक की तिथि अभी तय नहीं हुई है। उसकी बैठक के बाद ही उम्मीदवारों की सूची जारी हो सकेगी। उन्होंने कहा कि जीतने योग्य उम्मीदवार पार्टी टिकट का हकदार होगा। विधानसभा चुनाव घोषणा पत्र के बारे में श्री पचौरी ने कहा कि प्रदेश चुनाव घोषणा पत्र समिति की तीन बैठकें हो चुकी हैं और हम घोषणा पत्र को अंतिम रूप दे रहे हैं, लेकिन इसे अंतिम स्वरूप तो केन्द्रीय चुनाव घोषणा पत्र समिति ही देगी। कांग्रेस सांसद माणिक सिंह और पूर्व मंत्री प्रेमनारायण ठाकुर के भाजपा में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनाव के समय नेता इधर से उधर होते रहते हैं, इसमें कोई खास बात नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के दबाव में श्रीमती सोनिया गांधी की आमसभा के लिए लाल परेड मैदान नहीं दिया गया।
बजा बिगुल, मप्र में मतदान 25 नवंबर को
चुनाव आयोग ने भाजपा शासित तीन राज्यों सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नवंबर-दिसंबर में कराने की आज घोषणा की, जिसे मिनी आम चुनाव के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने पर फिलहाल कोई फैसला नहीं किया गया है। आयोग ने मध्यप्रदेश में 25 नवंबर, छत्ताीसगढ़ में दो चरणों में 14 और 20 नवंबर, दिल्ली में 29 नवंबर, राजस्थान में चार दिसंबर और मिजोरम में 29 नवंबर को वहां की विधानसभाओं के चुनाव कराने की घोषणा की।
मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने यह घोषणा करते हुए बताया कि इन सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव की मतगणना एक साथ आठ दिसंबर को होगी। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आयोग अभी वहां की स्थिति का मूल्यांकन कर रहा है। मूल्यांकन के मुद्दों में सुरक्षा बलों की उपलब्धता भी शामिल है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि चुनाव आचार संहिता तुरंत प्रभाव से लागू हो जाएगी। जाति और साम्प्रदायिक आधार पर किसी तरह की अपील नहीं की जा सकेगी और मस्जिदों, चर्चो, मंदिरों या अन्य पूजा स्थलों को चुनाव प्रचार के मंच के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि चुनाव संबंधी सभी महत्वपूर्ण घटनाओं और संवदेनशील मतदान केन्द्रों की वीडियो फिल्म बनाई जाएगी। इसके अलावा मतदान केन्द्रों के भीतर डिजिटल कैमरे लगाए जाएंगे। गोपालस्वामी ने यह भी स्पष्ट किया कि इन पांचों राज्यों में परिसीमन के आधार पर निर्धारित चुनाव क्षेत्रों के अनुरूप चुनाव होंगे। मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के जरिए होगा। इन पांचों में से 230 सदस्यीय मध्यप्रदेश, 200 सदस्यीय राजस्थान और 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभाओं का कार्यकाल 14 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। 70 सदस्यीय दिल्ली और 90 सदस्यीय छत्ताीसगढ़ विधानसभाओं का कार्यकाल 17 और 21 दिसंबर को समाप्त होगा। मतदाताओं की संख्या के अनुसार सबसे अधिक तीन करोड़ 62 लाख 19 हजार 481 मतदाता राजस्थान में हैं। मध्यप्रदेश में तीन करोड़ 57 लाख पांच हजार 136, छत्ताीसगढ़ में एक करोड़ 52 लाख सात हजार 734, दिल्ली में एक करोड़ नौ लाख और मिजोरम में छह लाख 11 हजार 124 मतदाता हैं।
मिजोरम में 91 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 85 प्रतिशत, राजस्थान में 84.63 प्रतिशत, दिल्ली में 80 प्रतिशत और छत्ताीसगढ़ में 64.51 प्रतिशत मतदाताओं के पास फोटो पहचान पत्र हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि नक्सल प्रभावित छत्ताीसगढ़ में दो चरणों में चुनाव कराने का निर्णय किया गया है। वहां 14 और 20 नवंबर को चुनाव होंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने यह घोषणा करते हुए बताया कि इन सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव की मतगणना एक साथ आठ दिसंबर को होगी। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आयोग अभी वहां की स्थिति का मूल्यांकन कर रहा है। मूल्यांकन के मुद्दों में सुरक्षा बलों की उपलब्धता भी शामिल है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि चुनाव आचार संहिता तुरंत प्रभाव से लागू हो जाएगी। जाति और साम्प्रदायिक आधार पर किसी तरह की अपील नहीं की जा सकेगी और मस्जिदों, चर्चो, मंदिरों या अन्य पूजा स्थलों को चुनाव प्रचार के मंच के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि चुनाव संबंधी सभी महत्वपूर्ण घटनाओं और संवदेनशील मतदान केन्द्रों की वीडियो फिल्म बनाई जाएगी। इसके अलावा मतदान केन्द्रों के भीतर डिजिटल कैमरे लगाए जाएंगे। गोपालस्वामी ने यह भी स्पष्ट किया कि इन पांचों राज्यों में परिसीमन के आधार पर निर्धारित चुनाव क्षेत्रों के अनुरूप चुनाव होंगे। मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के जरिए होगा। इन पांचों में से 230 सदस्यीय मध्यप्रदेश, 200 सदस्यीय राजस्थान और 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभाओं का कार्यकाल 14 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। 70 सदस्यीय दिल्ली और 90 सदस्यीय छत्ताीसगढ़ विधानसभाओं का कार्यकाल 17 और 21 दिसंबर को समाप्त होगा। मतदाताओं की संख्या के अनुसार सबसे अधिक तीन करोड़ 62 लाख 19 हजार 481 मतदाता राजस्थान में हैं। मध्यप्रदेश में तीन करोड़ 57 लाख पांच हजार 136, छत्ताीसगढ़ में एक करोड़ 52 लाख सात हजार 734, दिल्ली में एक करोड़ नौ लाख और मिजोरम में छह लाख 11 हजार 124 मतदाता हैं।
मिजोरम में 91 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 85 प्रतिशत, राजस्थान में 84.63 प्रतिशत, दिल्ली में 80 प्रतिशत और छत्ताीसगढ़ में 64.51 प्रतिशत मतदाताओं के पास फोटो पहचान पत्र हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि नक्सल प्रभावित छत्ताीसगढ़ में दो चरणों में चुनाव कराने का निर्णय किया गया है। वहां 14 और 20 नवंबर को चुनाव होंगे।
रविवार, 12 अक्टूबर 2008
बुधवार, 8 अक्टूबर 2008
वेतन जहां से, पढ़ाना भी वहीं होगा
भोपाल। 'काम कहीं वेतन कहीं से' की तर्ज पर पद न होने के बावजूद अपनी पसंद के कालेज में पढ़ा रहे प्रोफेसरों की मनमानी अब नहीं चलेगी। अब यदि वेतन चाहिए तो उन्हें उसी कालेज में क्लास लेना होगी, जहां से वेतन निकल रहा है। यह व्यवस्था इसी माह से जारी कर दी गई है। इसके बाद भी किसी कालेज में इस तरह की दोहरी व्यवस्था मिलती है तो प्राचार्य के साथ क्षेत्र के अतिरिक्त संचालक पर भी गाज गिरना तय है।
प्रदेश के सरकारी कालेजों के 150 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रोफेसर इस आदेश के घेरे में आ गए हैं। ऐसे प्रोफेसरों की सर्वाधिक संख्या राजधानी में हैं तो इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा के कालेजों में भी इनकी संख्या बहुतायत में है। हालत यह है कि अतिशेष और संबंधित विषय न होने के बाद भी प्रोफेसर शहरों के कालेजों में कब्जा जमाए हुए हैं। इनके कारण विभाग के आदेशों की तो धज्जियां उड़ ही रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कालेजों में भरपूर शिक्षक होने के बाद भी छात्र-छात्राओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है। बार-बार आदेश जारी करने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने एक अक्टूबर से इस तरह की व्यवस्था पर रोक लगा दी है। अब जिस कालेज से वेतन निकल रहा होगा, शिक्षकों को अध्यापन कार्य भी उसी कालेज में करना होगा। किसी भी स्थिति में दूसरे कालेज में अटैच प्रोफेसर्स को वेतन भुगतान अब नहीं होगा। विशेषकर उन कालेजों में तो कतई पद विरुद्ध वेतन नहीं निकाला जाएगा, जहां पहले से ही निर्धारित संख्या से अधिक प्रोफेसर पदस्थ हैं।
मनमानी करने वालों से किया आग्रह
आयुक्त उच्च शिक्षा ने विभाग की व्यवस्था को ध्वस्त करने वाले प्रोफेसरों से विशेष अंदाज में आग्रह तक कर डाला है। 'असुविधा के लिए खेद है' की तर्ज में दिए आदेश में आयुक्त ने मनमानी करने वालों से निवेदन किया है कि उन्हें यदि वेतन चाहिए तो कृपया उसी कालेज में जाकर पढ़ाएं, जहां से वेतन जारी हो रहा है। ताकि ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को भी आपके अनुभव का लाभ मिल सके।
अतिथि विद्वानों की नियुक्ति भी अटकी
ये शहर पसंद प्रोफेसर खुद तो गांव में जाना नहीं चाहते, कोई दूसरा वहां जाना चाहे तो उसमें भी रोड़ा साबित हो रहे हैं। इनका वेतन गांव के कालेजों से निकलने के कारण आज तक अतिथि विद्वानों की नियुक्ति भी नहीं हो पा रही है। बार-बार आदेश और बजट जारी करने के बाद भी अतिथि विद्वानों की नियुक्ति न होने से नाराज विभाग ने ऐसे सभी कालेजों से दस अक्टूबर तक इस संबंध में जानकारी तलब की है। जानकारी न आने की स्थिति में माना जाएगा कि उस कालेज में पद के विरुद्ध किसी भी शिक्षक का वेतन नहीं निकल रहा है। इसके बाद यदि जांच में यह स्थिति मिलती है तो उसके लिए प्राचार्य के साथ क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक को भी दोषी माना जाएगा।
प्रदेश के सरकारी कालेजों के 150 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रोफेसर इस आदेश के घेरे में आ गए हैं। ऐसे प्रोफेसरों की सर्वाधिक संख्या राजधानी में हैं तो इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा के कालेजों में भी इनकी संख्या बहुतायत में है। हालत यह है कि अतिशेष और संबंधित विषय न होने के बाद भी प्रोफेसर शहरों के कालेजों में कब्जा जमाए हुए हैं। इनके कारण विभाग के आदेशों की तो धज्जियां उड़ ही रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कालेजों में भरपूर शिक्षक होने के बाद भी छात्र-छात्राओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है। बार-बार आदेश जारी करने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने एक अक्टूबर से इस तरह की व्यवस्था पर रोक लगा दी है। अब जिस कालेज से वेतन निकल रहा होगा, शिक्षकों को अध्यापन कार्य भी उसी कालेज में करना होगा। किसी भी स्थिति में दूसरे कालेज में अटैच प्रोफेसर्स को वेतन भुगतान अब नहीं होगा। विशेषकर उन कालेजों में तो कतई पद विरुद्ध वेतन नहीं निकाला जाएगा, जहां पहले से ही निर्धारित संख्या से अधिक प्रोफेसर पदस्थ हैं।
मनमानी करने वालों से किया आग्रह
आयुक्त उच्च शिक्षा ने विभाग की व्यवस्था को ध्वस्त करने वाले प्रोफेसरों से विशेष अंदाज में आग्रह तक कर डाला है। 'असुविधा के लिए खेद है' की तर्ज में दिए आदेश में आयुक्त ने मनमानी करने वालों से निवेदन किया है कि उन्हें यदि वेतन चाहिए तो कृपया उसी कालेज में जाकर पढ़ाएं, जहां से वेतन जारी हो रहा है। ताकि ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को भी आपके अनुभव का लाभ मिल सके।
अतिथि विद्वानों की नियुक्ति भी अटकी
ये शहर पसंद प्रोफेसर खुद तो गांव में जाना नहीं चाहते, कोई दूसरा वहां जाना चाहे तो उसमें भी रोड़ा साबित हो रहे हैं। इनका वेतन गांव के कालेजों से निकलने के कारण आज तक अतिथि विद्वानों की नियुक्ति भी नहीं हो पा रही है। बार-बार आदेश और बजट जारी करने के बाद भी अतिथि विद्वानों की नियुक्ति न होने से नाराज विभाग ने ऐसे सभी कालेजों से दस अक्टूबर तक इस संबंध में जानकारी तलब की है। जानकारी न आने की स्थिति में माना जाएगा कि उस कालेज में पद के विरुद्ध किसी भी शिक्षक का वेतन नहीं निकल रहा है। इसके बाद यदि जांच में यह स्थिति मिलती है तो उसके लिए प्राचार्य के साथ क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक को भी दोषी माना जाएगा।
भोपाल। प्रदेश की आम जनता ही नहीं, केबिनेट मंत्री तक भ्रष्टाचार से परेशान हैं। ऐसा ही एक मामला मंगलवार को सामने आया। अपने विभाग में भ्रष्टाचार से परेशा
भोपाल। 'मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके दिग्गज मंत्रियों को उनके ही गढ़ में घेरने के लिए कांग्रेस के बड़े नेताओं को उनके खिलाफ चुनाव मैदान में उतरना चाहिए।' कांग्रेस को यह सलाह दी है प्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष अजय सिंह 'राहुल' ने। वे यह बात चुनाव समिति की बैठक में भी रख चुके हैं।
श्री सिंह मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय इंदिरा भवन में पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी को भी चुनाव लड़ना चाहिए। यदि वे चुनाव नहीं लड़ते हैं तो इससे गलत संदेश जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को घेरने की रणनीति के सवाल पर अजय सिंह ने कहा कि वे चुनाव समिति की बैठक में कह चुके हैं कि भाजपा के कठिन उम्मीदवारों मुख्यमंत्री, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, गोपाल भार्गव, विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी आदि के खिलाफ काग्रेस के बड़े नेताओं को चुनाव लड़ना चाहिए। इससे हम उन्हें उनके ही घर में घेरे रख सकते हैं। श्री सिंह ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी 1993 में पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के खिलाफ भोजपुर से चुनाव लड़ चुके हैं। इसका नतीजा यह हुआ था कि भोजपुर को छोड़कर आसपास की पांचों सीटें भाजपा हार गई थी। उन्होंने कहा कि वे श्री पटवा के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय पी.वी नरसिम्हा राव से लड़कर टिकट लाए थे। चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ने कहा कि टिकट को लेकर नेताओं में नहीं दावेदारों में विवाद है। उन्होंने कहा कि स्वाभाविक रूप से हर नेता अपने समर्थक को टिकट दिलाने के प्रयास में हैं लेकिन इस बार सिर्फ जीतने वाले उम्मीदवार को ही टिकट मिलेगा। बसपा के सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले को प्रदेश में फेल बताते हुए राहुल ने कहा कि कांग्रेस को पिछले चुनाव में गोंगपा से जितना खतरा हुआ उसके आधे से भी कम बसपा से है।
बसपा से लोगों को सिर्फ टिकट मिल सकता है लेकिन उसके नाम से वोट नहीं। श्री सिंह ने कहा कि सिर्फ 15 फीसदी वोट बसपा, भाजश और गोंगपा में बटेंगे और 35 से 40 फीसदी वोट लेने वाले जीत जाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजश आज की स्थिति में 40 से 56 सीटें प्रभावित करेगी और भाजपा के टिकट तय होने के बाद इनकी संख्या बढ़ भी सकती है। कांग्रेस सांसद माणिक सिंह के भाजपा में शामिल होने पर उन्होंने कहा कि उनके जाने से कांग्रेस अब सातों सीटें जीतेगी और वे अपने क्षेत्र तक में नहीं घुस पाएंगे। उन्होंने कहा कि अधिकांश टिकट 20 अक्टूबर तक तय होने की संभावना है।
श्री सिंह मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय इंदिरा भवन में पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी को भी चुनाव लड़ना चाहिए। यदि वे चुनाव नहीं लड़ते हैं तो इससे गलत संदेश जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को घेरने की रणनीति के सवाल पर अजय सिंह ने कहा कि वे चुनाव समिति की बैठक में कह चुके हैं कि भाजपा के कठिन उम्मीदवारों मुख्यमंत्री, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, गोपाल भार्गव, विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी आदि के खिलाफ काग्रेस के बड़े नेताओं को चुनाव लड़ना चाहिए। इससे हम उन्हें उनके ही घर में घेरे रख सकते हैं। श्री सिंह ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी 1993 में पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के खिलाफ भोजपुर से चुनाव लड़ चुके हैं। इसका नतीजा यह हुआ था कि भोजपुर को छोड़कर आसपास की पांचों सीटें भाजपा हार गई थी। उन्होंने कहा कि वे श्री पटवा के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय पी.वी नरसिम्हा राव से लड़कर टिकट लाए थे। चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ने कहा कि टिकट को लेकर नेताओं में नहीं दावेदारों में विवाद है। उन्होंने कहा कि स्वाभाविक रूप से हर नेता अपने समर्थक को टिकट दिलाने के प्रयास में हैं लेकिन इस बार सिर्फ जीतने वाले उम्मीदवार को ही टिकट मिलेगा। बसपा के सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले को प्रदेश में फेल बताते हुए राहुल ने कहा कि कांग्रेस को पिछले चुनाव में गोंगपा से जितना खतरा हुआ उसके आधे से भी कम बसपा से है।
बसपा से लोगों को सिर्फ टिकट मिल सकता है लेकिन उसके नाम से वोट नहीं। श्री सिंह ने कहा कि सिर्फ 15 फीसदी वोट बसपा, भाजश और गोंगपा में बटेंगे और 35 से 40 फीसदी वोट लेने वाले जीत जाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजश आज की स्थिति में 40 से 56 सीटें प्रभावित करेगी और भाजपा के टिकट तय होने के बाद इनकी संख्या बढ़ भी सकती है। कांग्रेस सांसद माणिक सिंह के भाजपा में शामिल होने पर उन्होंने कहा कि उनके जाने से कांग्रेस अब सातों सीटें जीतेगी और वे अपने क्षेत्र तक में नहीं घुस पाएंगे। उन्होंने कहा कि अधिकांश टिकट 20 अक्टूबर तक तय होने की संभावना है।
कैबिनेट मंत्री भी भ्रष्टाचार से परेशान
भोपाल। प्रदेश की आम जनता ही नहीं, केबिनेट मंत्री तक भ्रष्टाचार से परेशान हैं। ऐसा ही एक मामला मंगलवार को सामने आया। अपने विभाग में भ्रष्टाचार से परेशान खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री अखंड प्रताप सिंह यादव ने उपलोकायुक्त से गुहार लगाई। मंत्री जी इस मामले में राज्य आर्थिक अपराध ब्यूरो के अफसरों से भी समय मांग चुके हैं।
श्री सिंह मंगलवार दोपहर दो बजे लोकायुक्त कार्यालय पहुंचे। वे चुपचाप पहले लोकायुक्त कार्यालय के सचिव से मिले और फिर उपलोकायुक्त चंद्रेश भूषण के पास जा पहुंचे। वहां उन्होंने करीब बीस मिनट उपलोकायुक्त से बंद कमरे में बात की। इसके बाद बाहर निकले और मीडिया से मुखातिब हुए। मंत्री अखंड प्रताप सिंह की सफाई भी काबिले गौर थी। 'मेरे विभाग में अन्नपूर्णा योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन और खाद्यान्नों के उपार्जन में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ किस प्रकार कार्रवाई की जा सकती है, इसी के लिए सलाह लेने में उपलोकायुक्त महोदय के पास आया हूं।' एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, हां मैं केबिनेट मंत्री हूं, कार्रवाई करने में सक्षम हूं, इसी कारण सलाह लेने आया हूं। उनका कहना था कि इस मामले में उन्होंने ईओडब्ल्यू के वरिष्ठ अफसरों से भी समय मांगा है। संभंवत: वे बुधवार को ब्यूरो के अफसरों से मिल सकते हैं। इस मुलाकात में भी वे भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के बारे में विचार करेंगे।
कांग्रेस प्रवक्ता के आरोपों पर भी दी सफाई : खाद्य मंत्री ने उपलोकायुक्त चंद्रेश भूषण को कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा द्वारा खुद पर लगाए आरोपों के बारे में सफाई दी। उन्होंने लोकायुक्त के नाम संबोधित एक संक्षिप्त ज्ञापन भी मीडिया को सौंपा। इसमें लिखा है कि मुझे समाचार पत्रों से ज्ञात हुआ है कि श्री मिश्रा ने उनके खिलाफ कोई शिकायत आपके यहां की है। इस शिकायत पर अविलंब कार्रवाई की जाए और यदि मेरे सहयोग की सूचना हो तो मुझे सूचित कर दिया जाए। इसकी एक कापी उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी भेजी है। मंत्री जी ने इस मुद्दे पर कहा कि मैंने अपने अधिकार का उपयोग करते हुए बंसल पेट्रोल पंप पर की गई कार्रवाई पर अस्थायी स्टे दिया था। ये कार्रवाई मैंने मेरे सामने पेश किए गए तथ्यों के आधार पर की थी। उनका कहना था कि यदि किसी को कोई आपत्ति है तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। उनका कहना था कि मैं यहां सफाई देने नहीं, अपना पक्ष रखने आया हूं। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में उन्हें या उनके विभाग को लोकायुक्त ने कोई नोटिस जारी नहीं किया है।
श्री सिंह मंगलवार दोपहर दो बजे लोकायुक्त कार्यालय पहुंचे। वे चुपचाप पहले लोकायुक्त कार्यालय के सचिव से मिले और फिर उपलोकायुक्त चंद्रेश भूषण के पास जा पहुंचे। वहां उन्होंने करीब बीस मिनट उपलोकायुक्त से बंद कमरे में बात की। इसके बाद बाहर निकले और मीडिया से मुखातिब हुए। मंत्री अखंड प्रताप सिंह की सफाई भी काबिले गौर थी। 'मेरे विभाग में अन्नपूर्णा योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन और खाद्यान्नों के उपार्जन में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ किस प्रकार कार्रवाई की जा सकती है, इसी के लिए सलाह लेने में उपलोकायुक्त महोदय के पास आया हूं।' एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, हां मैं केबिनेट मंत्री हूं, कार्रवाई करने में सक्षम हूं, इसी कारण सलाह लेने आया हूं। उनका कहना था कि इस मामले में उन्होंने ईओडब्ल्यू के वरिष्ठ अफसरों से भी समय मांगा है। संभंवत: वे बुधवार को ब्यूरो के अफसरों से मिल सकते हैं। इस मुलाकात में भी वे भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के बारे में विचार करेंगे।
कांग्रेस प्रवक्ता के आरोपों पर भी दी सफाई : खाद्य मंत्री ने उपलोकायुक्त चंद्रेश भूषण को कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा द्वारा खुद पर लगाए आरोपों के बारे में सफाई दी। उन्होंने लोकायुक्त के नाम संबोधित एक संक्षिप्त ज्ञापन भी मीडिया को सौंपा। इसमें लिखा है कि मुझे समाचार पत्रों से ज्ञात हुआ है कि श्री मिश्रा ने उनके खिलाफ कोई शिकायत आपके यहां की है। इस शिकायत पर अविलंब कार्रवाई की जाए और यदि मेरे सहयोग की सूचना हो तो मुझे सूचित कर दिया जाए। इसकी एक कापी उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी भेजी है। मंत्री जी ने इस मुद्दे पर कहा कि मैंने अपने अधिकार का उपयोग करते हुए बंसल पेट्रोल पंप पर की गई कार्रवाई पर अस्थायी स्टे दिया था। ये कार्रवाई मैंने मेरे सामने पेश किए गए तथ्यों के आधार पर की थी। उनका कहना था कि यदि किसी को कोई आपत्ति है तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। उनका कहना था कि मैं यहां सफाई देने नहीं, अपना पक्ष रखने आया हूं। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में उन्हें या उनके विभाग को लोकायुक्त ने कोई नोटिस जारी नहीं किया है।
चेहरा ढककर चलने वालों की खैर नहीं !
भोपाल। यदि आप राजधानी में चेहरा ढककर चलने के आदी हो गए हैं तो सतर्क हो जाइए। अब आप पुलिस की कार्रवाई से बच नहीं पाएंगे। यातायात पुलिस का राजधानी में बढ़ती लूट की घटनाओं के मद्देनजर चैकिंग अभियान जारी है। इस अभियान में महिलाओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। अभियान के तीसरे दिन मंगलवार को लिंक रोड पर की गई चैकिंग में तीस लोगों के चालान बनाए गए।
चैकिंग अभियान में वैसे पुलिस के निशाने पर पुरुष या युवा वर्ग हैं। इसकी वजह लूट की वारदातों में ज्यादातर युवा वर्ग का होना है। हाल में तीन-चार घटनाएं बाइक सवार उन बदमाशों ने की हैं, जो मुंह पर कपड़ा बांधकर चल रहे थे। तीन दिन में लगभग सौ से अधिक युवक-युवतियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर चुकी है। पुलिस ऐसे युवक-युवतियों के खिलाफ परिचय छुपाने के नाम पर चालानी कार्रवाई कर रही है।
एएसपी ट्रैफिक महेन्द्र सिंह सिकरवार का कहना है कि मोटरयान अधिनियम में मुंह पर कपड़ा बांधकर चलने का नहीं, सिर्फ हेलमेट लगाने का प्रावधान है। 18 साल से कम उम्र के लड़के-लड़कियां वाहन चला रहे हैं। उनके पास लाइसेंस नहीं होता है। ऐसे में उनके खिलाफ बिना लाइसेंस वाहन चलाने के साथ उन्हें वाहन उपलब्ध कराने वाले पर जुर्माना किया जाएगा। फिलहाल तो उन्हें रोककर समझाइश दी जा रही है। उनके नाम, पते भी लिखे जा रहे हैं। इसके बाद उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी बार मुंह पर कपड़ा बांध कर चलते हुए जो युवक-युवतियां मिल रहे हैं, उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस कप्तान के निर्देश हैं कि जो महिलाएं या युवतियां कपड़ा बांधकर चल रही हैं, उनकी चैंकिंग महिला पुलिस अधिकारी से कराई जाए।
चैकिंग तो युवतियों की भी हो रही है, लेकिन हमारा जोर पुरुषों पर है। पिछले दिनों में लूट की कुछ वारदातें मुंह पर कपड़ा बांधकर चल रहे बाइक सवार बदमाशों ने की थी, इसलिए यह अभियान चलाया जा रहा है। जयदीप प्रसाद, एसपी भोपाल
चैकिंग अभियान में वैसे पुलिस के निशाने पर पुरुष या युवा वर्ग हैं। इसकी वजह लूट की वारदातों में ज्यादातर युवा वर्ग का होना है। हाल में तीन-चार घटनाएं बाइक सवार उन बदमाशों ने की हैं, जो मुंह पर कपड़ा बांधकर चल रहे थे। तीन दिन में लगभग सौ से अधिक युवक-युवतियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर चुकी है। पुलिस ऐसे युवक-युवतियों के खिलाफ परिचय छुपाने के नाम पर चालानी कार्रवाई कर रही है।
एएसपी ट्रैफिक महेन्द्र सिंह सिकरवार का कहना है कि मोटरयान अधिनियम में मुंह पर कपड़ा बांधकर चलने का नहीं, सिर्फ हेलमेट लगाने का प्रावधान है। 18 साल से कम उम्र के लड़के-लड़कियां वाहन चला रहे हैं। उनके पास लाइसेंस नहीं होता है। ऐसे में उनके खिलाफ बिना लाइसेंस वाहन चलाने के साथ उन्हें वाहन उपलब्ध कराने वाले पर जुर्माना किया जाएगा। फिलहाल तो उन्हें रोककर समझाइश दी जा रही है। उनके नाम, पते भी लिखे जा रहे हैं। इसके बाद उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी बार मुंह पर कपड़ा बांध कर चलते हुए जो युवक-युवतियां मिल रहे हैं, उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस कप्तान के निर्देश हैं कि जो महिलाएं या युवतियां कपड़ा बांधकर चल रही हैं, उनकी चैंकिंग महिला पुलिस अधिकारी से कराई जाए।
चैकिंग तो युवतियों की भी हो रही है, लेकिन हमारा जोर पुरुषों पर है। पिछले दिनों में लूट की कुछ वारदातें मुंह पर कपड़ा बांधकर चल रहे बाइक सवार बदमाशों ने की थी, इसलिए यह अभियान चलाया जा रहा है। जयदीप प्रसाद, एसपी भोपाल
40 फीसदी मंत्रियों के कट सकते हैं टिकट
नई दिल्ली में नायडू द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल होने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार सुबह प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, संगठन महामंत्री माखन सिंह, सह संगठन मंत्री भगवतशरण माथुर और अरविंद मेनन के साथ विमान से दिल्ली पहुंचे और देर रात भोपाल लौटे। इन नेताओं ने नायडू के समक्ष पार्टी और सरकार द्वारा कराए गए सर्वे तथा आंतरिक आंकलन की रिपोर्ट के साथ संभावित प्रत्याशियों के पैनल पेश किए। संगठन मंत्रियों ने अपने प्रभार के क्षेत्रों का फीडबैक भी दिया। नायडू के साथ हुई इन नेताओं की लंबी चर्चा सर्वे रिपोर्ट और सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों के संभावित उम्मीदवारों पर ही केंद्रित रही। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने की संभावना और प्रत्याशी चयन के लिए कराए गए इन सर्वे की अलग-अलग रिपोर्ट ने पार्टी को चक्कर में डाल रखा है। एक सर्वे जहां एक दर्जन से अधिक मंत्रियों सहित पचास से अधिक विधायकों को बदलने पर पार्टी की सरकार बनने का इशारा कर रहा है, तो सरकारी स्तर पर हुआ सर्वे भाजपा को सबसे बड़ा दल बताते हुए त्रिशंकु विधानसभा के संकेत दे रहा है। छोटे दलों द्वारा हो रहे नुकसान का भी इसमें उल्लेख है।
सर्वे तथा आंतरिक आंकलन बड़े पैमाने पर विधायकों के टिकट काटने की पैरवी कर रहे हैं। इस आधार पर बने संभावित उम्मीदवारों के पैनल के साथ प्रदेश नेतृत्व ने तमाम सर्वे रिपोर्ट सोमवार को वेंकैया नायडू के समक्ष रखी। प्रदेश में रायशुमारी पूरी होने की जानकारी भी दी गई। सूत्रों के अनुसार इस दौरान तय हुआ कि प्रदेश चुनाव समिति की बैठकें 11 से 13 अक्टूबर के बीच रखी जाएं, जिसमें नायडू भी मौजूद रहेंगे। इन बैठकों में पहले से तैयार पैनल और रायशुमारी की रिपोर्ट को सामने रखकर अंतिम रूप से प्रत्याशियों के पैनल बनाए जाएंगे।
सर्वे तथा आंतरिक आंकलन बड़े पैमाने पर विधायकों के टिकट काटने की पैरवी कर रहे हैं। इस आधार पर बने संभावित उम्मीदवारों के पैनल के साथ प्रदेश नेतृत्व ने तमाम सर्वे रिपोर्ट सोमवार को वेंकैया नायडू के समक्ष रखी। प्रदेश में रायशुमारी पूरी होने की जानकारी भी दी गई। सूत्रों के अनुसार इस दौरान तय हुआ कि प्रदेश चुनाव समिति की बैठकें 11 से 13 अक्टूबर के बीच रखी जाएं, जिसमें नायडू भी मौजूद रहेंगे। इन बैठकों में पहले से तैयार पैनल और रायशुमारी की रिपोर्ट को सामने रखकर अंतिम रूप से प्रत्याशियों के पैनल बनाए जाएंगे।
गुरुवार, 2 अक्टूबर 2008
निशाने पर भाजपा, आयोग ने किए हाथ खड़े
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी मंगलवार को कांग्रेस सहित तमाम राजनैतिक दलों के निशाने पर रही। इन पार्टियों ने खुले आम भाजपा पर मतदाताओं को लुभाने, जनप्रतिनिधियों को डराने और सरकारी खजाने को लुटाने की शिकायत करते हुए चुनाव आयोग से तत्काल चुनाव आचार संहिता लगाने की अपील की। लेकिन आयोग ने सभी दलों की बात सुनने के बाद हाथ खड़े कर दिए। उप निर्वाचन आयुक्त आर बालकृष्णन आयोग के कार्यालय में मंगलवार शाम को राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर रहे थे।
श्री बालकृष्णन ने डेढ़ घंटे तक भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा और कम्युनिस्ट पार्टी सहित मान्यता प्राप्त सभी दलों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। प्रदेश कांग्रेस विधि विभाग के अध्यक्ष अधिवक्ता विजय चौधरी और कोषाध्यक्ष एनपी प्रजापति ने मुख्यमंत्री द्वारा लगातार की जा रही घोषणाओं और मतदाता सूची में गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए शीघ्र चुनाव आचार संहिता लगाने का अनुरोध किया। इस पर श्री बालकृष्णन ने उन्हें बताया कि आयोग नामीनेशन से 45 दिन पहले ही आचार संहिता लगा सकता है। मतदाता सूची में गड़बड़ी पर कांग्रेस का कहना था कि उनकी शिकायत पर ही इसे ठीक किया गया। सपा के कार्यालय प्रभारी साहिब लाल गौर ने पार्टी के विधायक डॉ. सुनीलम की पिटाई कर मतदाताओं को डराने, कांग्रेस और भाजपा द्वारा चुनावी सामग्री खरीदने व बाल पेंटिंग कराने और चुनाव के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करने की शिकायत की। इस पर उप निर्वाचन आयुक्त ने साफ कहा कि आचार संहिता लगने से पहले आयोग कुछ नहीं कर सकता। पार्टियों ने सत्ताधारी दल पर चुनावी लाभ के लिए सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का भी आरोप लगाया। विभिन्न दलों के इन आरोपों का वहां मौजूद भाजपा के प्रतिनिधि शांतिलाल लोड़ा ने विरोध किया। उनका कहना था कि इसमें आयोग कुछ नहीं कर सकता। श्री बालकृष्णन ने भी इसे राज्य का मामला बता कुछ करने में असमर्थता जताई। सभी दलों के प्रतिनिधियों ने अंतिम प्रकाशन सूची स्कूलों और पंचायत भवन में चस्पा करने का कहा ताकि लोगों को पता चल सके कि उनका नाम जुड़ा है या नहीं। आयोग ने उनसे कहा कि राजनैतिक दल अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से यह चेक कराएं। पार्टियों का कहना था कि जब नाम जोड़ने के लिए सीधे आवेदन लिए जाते हैं तो चेक भी आयोग ही करे। उप निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि प्रदेश में 14 दिसंबर को नई सरकार बननी है।
पोलिंग एजेंट भी होगा आयोग का : उप निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि जिन क्षेत्रों में राजनैतिक दलों के पास पोलिंग एजेंट नहीं हैं वे वहां की सूची दे दें उनके लिए आयोग केंद्रीय शासन के कर्मचारी को वहां माइको पर्यवेक्षक तैनात करेगा। अधिकांश दलों ने पोलिंग एजेंट के उसी क्षेत्र का रहने वाला होने और पुलिस वेरीफिकेशन का विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि कई आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी के कार्यकर्ता नहीं इस कारण वहां एजेंट की समस्या है।
श्री बालकृष्णन ने डेढ़ घंटे तक भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा और कम्युनिस्ट पार्टी सहित मान्यता प्राप्त सभी दलों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। प्रदेश कांग्रेस विधि विभाग के अध्यक्ष अधिवक्ता विजय चौधरी और कोषाध्यक्ष एनपी प्रजापति ने मुख्यमंत्री द्वारा लगातार की जा रही घोषणाओं और मतदाता सूची में गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए शीघ्र चुनाव आचार संहिता लगाने का अनुरोध किया। इस पर श्री बालकृष्णन ने उन्हें बताया कि आयोग नामीनेशन से 45 दिन पहले ही आचार संहिता लगा सकता है। मतदाता सूची में गड़बड़ी पर कांग्रेस का कहना था कि उनकी शिकायत पर ही इसे ठीक किया गया। सपा के कार्यालय प्रभारी साहिब लाल गौर ने पार्टी के विधायक डॉ. सुनीलम की पिटाई कर मतदाताओं को डराने, कांग्रेस और भाजपा द्वारा चुनावी सामग्री खरीदने व बाल पेंटिंग कराने और चुनाव के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करने की शिकायत की। इस पर उप निर्वाचन आयुक्त ने साफ कहा कि आचार संहिता लगने से पहले आयोग कुछ नहीं कर सकता। पार्टियों ने सत्ताधारी दल पर चुनावी लाभ के लिए सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का भी आरोप लगाया। विभिन्न दलों के इन आरोपों का वहां मौजूद भाजपा के प्रतिनिधि शांतिलाल लोड़ा ने विरोध किया। उनका कहना था कि इसमें आयोग कुछ नहीं कर सकता। श्री बालकृष्णन ने भी इसे राज्य का मामला बता कुछ करने में असमर्थता जताई। सभी दलों के प्रतिनिधियों ने अंतिम प्रकाशन सूची स्कूलों और पंचायत भवन में चस्पा करने का कहा ताकि लोगों को पता चल सके कि उनका नाम जुड़ा है या नहीं। आयोग ने उनसे कहा कि राजनैतिक दल अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से यह चेक कराएं। पार्टियों का कहना था कि जब नाम जोड़ने के लिए सीधे आवेदन लिए जाते हैं तो चेक भी आयोग ही करे। उप निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि प्रदेश में 14 दिसंबर को नई सरकार बननी है।
पोलिंग एजेंट भी होगा आयोग का : उप निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि जिन क्षेत्रों में राजनैतिक दलों के पास पोलिंग एजेंट नहीं हैं वे वहां की सूची दे दें उनके लिए आयोग केंद्रीय शासन के कर्मचारी को वहां माइको पर्यवेक्षक तैनात करेगा। अधिकांश दलों ने पोलिंग एजेंट के उसी क्षेत्र का रहने वाला होने और पुलिस वेरीफिकेशन का विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि कई आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी के कार्यकर्ता नहीं इस कारण वहां एजेंट की समस्या है।
अन्नपूर्णा नहीं, तीन रुपए किलो अनाज
भोपाल। राज्य सरकार द्वारा योजनाओं के प्रचार के लिए उठाए गए खर्चीले कदमों के बावजूद सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं से गांवों के लोग अनजान हैं। लाडली लक्ष्मी और मजदूर सुरक्षा जैसी योजनाओं की बात तो दूर वे यह भी नहीं जानते कि तीन रूपए किलो अनाज उन्हें अन्नपूर्णा योजना के तहत मिल रहा है। जबकि सरकार में बैठी भाजपा इन्हीं योजनाओं के जरिए दोबारा सत्ता में लौटने का सपना संजोए हुए है।
दैनिक जागरण ने राज्य सरकार के चार मंत्रियों के निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर योजनाओं की नब्ज टटोली तो यह सच उजागर हुआ। ये क्षेत्र हैं डॉ. गौरीशकर शेजवार का साची, लक्ष्मीकात शर्मा का सिरोंज, राघवजी भाई का शमशाबाद और करण सिंह वर्मा का इछावर। गावों के लोग योजना का नाम भले ही न जानें, अन्नपूर्णा और जननी एक्सप्रेस जैसी कुछ योजनाओं के लाभ से परिचित है। खास बात यह है कि इन योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए राज्य सरकार ने दीवार लेखन कराने के साथ बड़ी तादाद में पुस्तकें व पैम्पलेट छपवाए और निचले स्तर तक बाटे भी गए।
लाड़ली लक्ष्मी योजना: मुख्यमंत्री की पसंदीदा लाड़ली लक्ष्मी का हाल अपेक्षा के मुताबिक नहीं है। साची के ग्यारसाबाद के प्रकाश की तरह गावों में लोग अन्य योजनाओं की तरह इसके बारे में भी नहीं जानते। गाव में कोई लाड़ली लक्ष्मी है पूछने पर हाल ही में पैदा हुई पहली बेटी के पिता प्रकाश सहित आधा दर्जन गाव वाले इकार में सिर हिलाते हैं। इसी बारे में गाव की आगनवाड़ी कार्यकर्ता से पूछा तो उसने बताया प्रकाश की बेटी पहली लाड़ली लक्ष्मी बनेगी, उसका फार्म भरवाया जा रहा है। शमशाबाद के रतवा गाव के महेश शर्मा की बेटी का फार्म भी जमा होने वाला है। इस गाव की वह दूसरी लाड़ली लक्ष्मी होगी। इन दो लोगों के अलावा कोई गाव वाला लाड़ली लक्ष्मी योजना के बारे में नहीं जानता।
जननी एक्सप्रेस: गाव वाले जानते है तो उस टेलीफोन नंबर को जिसे लगा कर डिलेवरी के लिए अस्पताल ले जाने गाड़ी बुलाई जाती है। सिरोंज के रास्ते में मोटे अक्षरों में जननी एक्सप्रेस नेम प्लेट लिखी बोलेरो गाड़ी दिखी और स्वास्थ्य केंद्रों पर उसे बुलाने के लिए मोबाइल फोन के नंबर। लोग इस सेवा से खुश है। बस इतना है कि वे इस योजना के नाम से परिचित नहीं है।
अन्नपूर्णा योजना: हर गरीब परिवार को तीन रुपए किलो गेंहू और साढ़े चार रुपए किलो चावल देने के लिए शुरू की गई अन्नपूर्णा योजना के नाम से पूछने पर लोग इसे नहीं जानते। तीन रुपए किलो अनाज मिला या नहीं, इस सवाल पर जवाब होता है मिलता है। इस योजना की शिकायत करने वाला कोई नहीं मिला। किसी को परेशानी है तो बस इस बात की कि अनाज मिलने के दिन नियत है। दो माह का अनाज एकमुश्त मिल रहा है। इछावर विधानसभा क्षेत्र के पालखेड़ी के प्रेम सिंह और सिरोंज के चितावर के रामकुमार जरूर कहते है कि परमिट नहीं बना।
काम मिला नहीं दस
रुपए और चले गए
सिरोंज क्षेत्र के ग्राम औराखेड़ी के खुमान सिंह ने यह टिप्पणी रोजगार गारटी योजना के बारे में की थी। उसके अनुसार जॉब कार्ड बना है पर काम नहीं मिल रहा। सरपंच कहते है कि दीवाली के समय काम खोलेंगे। खुमान सिंह कहता है उम्मीद थी कि वाटरशेड में काम निकलेगा लेकिन मिला नहीं। उसे काम नहीं मिलने के साथ इस बात का रज है कि पंजीयन के लिए दस रुपए और जेब से चले गए। वह नहीं जानता कि यह राशि मजदूर सुरक्षा योजना के लिए ली गई है। मुख्यमंत्री की दूसरी पसंदीदा योजना मजदूर सुरक्षा योजना की हकीकत भी यही है। जिसके लिए पंजीयन तो हुआ लेकिन लोगों को पता नहीं इसका लाभ उन्हें कैसे मिलेगा।
दैनिक जागरण ने राज्य सरकार के चार मंत्रियों के निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर योजनाओं की नब्ज टटोली तो यह सच उजागर हुआ। ये क्षेत्र हैं डॉ. गौरीशकर शेजवार का साची, लक्ष्मीकात शर्मा का सिरोंज, राघवजी भाई का शमशाबाद और करण सिंह वर्मा का इछावर। गावों के लोग योजना का नाम भले ही न जानें, अन्नपूर्णा और जननी एक्सप्रेस जैसी कुछ योजनाओं के लाभ से परिचित है। खास बात यह है कि इन योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए राज्य सरकार ने दीवार लेखन कराने के साथ बड़ी तादाद में पुस्तकें व पैम्पलेट छपवाए और निचले स्तर तक बाटे भी गए।
लाड़ली लक्ष्मी योजना: मुख्यमंत्री की पसंदीदा लाड़ली लक्ष्मी का हाल अपेक्षा के मुताबिक नहीं है। साची के ग्यारसाबाद के प्रकाश की तरह गावों में लोग अन्य योजनाओं की तरह इसके बारे में भी नहीं जानते। गाव में कोई लाड़ली लक्ष्मी है पूछने पर हाल ही में पैदा हुई पहली बेटी के पिता प्रकाश सहित आधा दर्जन गाव वाले इकार में सिर हिलाते हैं। इसी बारे में गाव की आगनवाड़ी कार्यकर्ता से पूछा तो उसने बताया प्रकाश की बेटी पहली लाड़ली लक्ष्मी बनेगी, उसका फार्म भरवाया जा रहा है। शमशाबाद के रतवा गाव के महेश शर्मा की बेटी का फार्म भी जमा होने वाला है। इस गाव की वह दूसरी लाड़ली लक्ष्मी होगी। इन दो लोगों के अलावा कोई गाव वाला लाड़ली लक्ष्मी योजना के बारे में नहीं जानता।
जननी एक्सप्रेस: गाव वाले जानते है तो उस टेलीफोन नंबर को जिसे लगा कर डिलेवरी के लिए अस्पताल ले जाने गाड़ी बुलाई जाती है। सिरोंज के रास्ते में मोटे अक्षरों में जननी एक्सप्रेस नेम प्लेट लिखी बोलेरो गाड़ी दिखी और स्वास्थ्य केंद्रों पर उसे बुलाने के लिए मोबाइल फोन के नंबर। लोग इस सेवा से खुश है। बस इतना है कि वे इस योजना के नाम से परिचित नहीं है।
अन्नपूर्णा योजना: हर गरीब परिवार को तीन रुपए किलो गेंहू और साढ़े चार रुपए किलो चावल देने के लिए शुरू की गई अन्नपूर्णा योजना के नाम से पूछने पर लोग इसे नहीं जानते। तीन रुपए किलो अनाज मिला या नहीं, इस सवाल पर जवाब होता है मिलता है। इस योजना की शिकायत करने वाला कोई नहीं मिला। किसी को परेशानी है तो बस इस बात की कि अनाज मिलने के दिन नियत है। दो माह का अनाज एकमुश्त मिल रहा है। इछावर विधानसभा क्षेत्र के पालखेड़ी के प्रेम सिंह और सिरोंज के चितावर के रामकुमार जरूर कहते है कि परमिट नहीं बना।
काम मिला नहीं दस
रुपए और चले गए
सिरोंज क्षेत्र के ग्राम औराखेड़ी के खुमान सिंह ने यह टिप्पणी रोजगार गारटी योजना के बारे में की थी। उसके अनुसार जॉब कार्ड बना है पर काम नहीं मिल रहा। सरपंच कहते है कि दीवाली के समय काम खोलेंगे। खुमान सिंह कहता है उम्मीद थी कि वाटरशेड में काम निकलेगा लेकिन मिला नहीं। उसे काम नहीं मिलने के साथ इस बात का रज है कि पंजीयन के लिए दस रुपए और जेब से चले गए। वह नहीं जानता कि यह राशि मजदूर सुरक्षा योजना के लिए ली गई है। मुख्यमंत्री की दूसरी पसंदीदा योजना मजदूर सुरक्षा योजना की हकीकत भी यही है। जिसके लिए पंजीयन तो हुआ लेकिन लोगों को पता नहीं इसका लाभ उन्हें कैसे मिलेगा।
लोहे के दलालों पर आयकर का छापा
भोपाल। आयकर विभाग ने लोहे के दलाल और व्यापारियों की मिलीभगत से चल रहा 120 करोड़ रुपए का गोरखधंधा पकड़ा है। यह लोग कागजों पर लोहे की खदीद-फरोख्त बताकर आयकर को चूना लगा रहे थे। इन दलालों और व्यापारियों से अब तक 40 करोड़ से ज्यादा की आयकर की चोरी का खुलासा हुआ है। विस्तृत जांच-पड़ताल में यह आंकड़ा और ज्यादा बढ़ सकता है।
आयकर विभाग ने मंगलवार को लोहे के पांच दलालों के एक दर्जन ठिकानों पर छापे के कार्रवाई की थी। सूत्रों के मुताबिक पीयूष गुप्ता, भारत कोठारी, श्री खंडेलवाल और श्री आहूजा शामिल है। यह सभी दलाल और व्यापारी इंदौर के हैं। दो दिन से चल रही इस कार्रवाई में आयकर विभाग ने करोड़ों रुपए का गोरखधंधा उजागर किया है। छापे में बड़ी मात्रा में दस्तावेज और प्रापर्टी के कागजात मिले हैं। छापे के लिए भोपाल मुख्यालय से आयकर की टीम इंदौर गई है। भोपाल और इंदौर की संयुक्त यह कार्रवाई देर रात तक जारी थी। इन व्यापारियों ने दो करोड़ रुपए सरेंडर कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक यह दलाल और व्यापारी कागजों पर लोहे की खरीद फरोख्त कर आयकर को चूना लगा रहे थे। यह दलाल व्यापारियों को फर्जी बिल जारी करते थे। सूत्र बताते हैं कि इसमें इंदौर की एक प्रतिष्ठित लोहा कंपनी भी शामिल बताई जाती है। ये व्यापारी और कंपनी इन बिलों को अपने दस्तावेजों में लगाकर उतनी राशि का खर्च बता देते थे। जिससे वह राशि खर्च में आ जाती थी और व्यापारी आयकर बचाने में कामयाब हो जाते थे। व्यापारियों और दलालों की मिलीभगत से यह गोरखधंधा सालों से चल रहा था। हालांकि इनमें से कई दलाल नियमित रुप से अपने रिटर्न दाखिल करते थे, लेकिन उसमें भी कई अनियमितताएं पाई गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, आयकर विभाग अब इन व्यापारियों और दलालों के यहां से मिले दस्तावेजों की विस्तृत जांच पड़ताल करेगा। उनके ठिकानों से करोड़ों रुपए की प्रापर्टी के कागजात,अब यह पता लगाया जाएगा कि इन दलालों ने कितने व्यापारियों और कंपनियों को बोगस बिल जारी कर आयकर को चूना लगाया है। सूत्रों के मुताबिक ऐसे व्यापारियों पर अब शिकंजा कसा जाएगा।
आयकर विभाग ने मंगलवार को लोहे के पांच दलालों के एक दर्जन ठिकानों पर छापे के कार्रवाई की थी। सूत्रों के मुताबिक पीयूष गुप्ता, भारत कोठारी, श्री खंडेलवाल और श्री आहूजा शामिल है। यह सभी दलाल और व्यापारी इंदौर के हैं। दो दिन से चल रही इस कार्रवाई में आयकर विभाग ने करोड़ों रुपए का गोरखधंधा उजागर किया है। छापे में बड़ी मात्रा में दस्तावेज और प्रापर्टी के कागजात मिले हैं। छापे के लिए भोपाल मुख्यालय से आयकर की टीम इंदौर गई है। भोपाल और इंदौर की संयुक्त यह कार्रवाई देर रात तक जारी थी। इन व्यापारियों ने दो करोड़ रुपए सरेंडर कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक यह दलाल और व्यापारी कागजों पर लोहे की खरीद फरोख्त कर आयकर को चूना लगा रहे थे। यह दलाल व्यापारियों को फर्जी बिल जारी करते थे। सूत्र बताते हैं कि इसमें इंदौर की एक प्रतिष्ठित लोहा कंपनी भी शामिल बताई जाती है। ये व्यापारी और कंपनी इन बिलों को अपने दस्तावेजों में लगाकर उतनी राशि का खर्च बता देते थे। जिससे वह राशि खर्च में आ जाती थी और व्यापारी आयकर बचाने में कामयाब हो जाते थे। व्यापारियों और दलालों की मिलीभगत से यह गोरखधंधा सालों से चल रहा था। हालांकि इनमें से कई दलाल नियमित रुप से अपने रिटर्न दाखिल करते थे, लेकिन उसमें भी कई अनियमितताएं पाई गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, आयकर विभाग अब इन व्यापारियों और दलालों के यहां से मिले दस्तावेजों की विस्तृत जांच पड़ताल करेगा। उनके ठिकानों से करोड़ों रुपए की प्रापर्टी के कागजात,अब यह पता लगाया जाएगा कि इन दलालों ने कितने व्यापारियों और कंपनियों को बोगस बिल जारी कर आयकर को चूना लगाया है। सूत्रों के मुताबिक ऐसे व्यापारियों पर अब शिकंजा कसा जाएगा।
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