रविवार, 28 सितंबर 2008

घुसपैठ पर स्पष्टीकरण दे सेना

गृह मंत्रालय ने सेना से इस बात का स्पष्टीकरण मांगा है कि उसे इस बात का पता कैसे नहीं लगा कि नियंत्रण रेखा पर लगी कंटीली बाड़ के बावजूद हाल ही में नागरिकों ने वहां से घुसपैठ की है।
मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सेना के अधिकारियों से उस घटना का जवाब तलब किया गया है, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के तीन परिवारों ने भारतीय क्षेत्र के 10 किलोमीटर भीतर तक आ कर पुलिस चौकी में अपने आने की सूचना दी।
गृह मंत्रालय ने इस घटना के संदर्भ में सीमा की चौकसी और नियंत्रण रेखा पर लगाई गई कंटीली बाड़ की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बच्चे और उम्र दराज लोग इसे पार करके आ रहे हैं और वहां तैनात लोगों को इसकी भनक तक नहीं लग रही है।
सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्रालय के द्वारा गृह मंत्रालय के इस पत्र को सेना को भेजा गया है। इस बारे में टिप्पणी करने के लिए सेना की ओर से कोई उपलब्ध नहीं हुआ। उत्तरी कश्मीर के कारनाह संभाग के तंगधार क्षेत्र से 26 सितंबर को तड़के पांच बच्चों और एक उम्र दराज महिला सहित 12 लोग नियंत्रण रेखा पार करके भारतीय क्षेत्र में आ गए थे।
जम्मू कश्मीर गृह विभाग ने इस घटना के बारे में केन्द्रीय गृह मंत्रालय को सूचित किया है। 12 लोगों के इस काफिले द्वारा नियंत्रण रेखा पर लगाई गई कंटीली बाड़ को पार करने से सब अचरज में हैं। उससे भी बड़ी हैरत यह है कि नियंत्रण रेखा की निगरानी करने वाले भारतीय जवानों की भी इन पर नज़र नहीं गई। इस काफिले में आठ महीने के एक शिशु सहित पांच बच्चे और एक वृद्धा शामिल हैं।
पुलिस चौकी पर आने पर इन लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। इनमें से कुछ पाकिस्तानी नागरिक हैं। बिना उचित दस्तावेजों के भारतीय सीमा में प्रवेश करने के लिए उनके विरूद्ध उचित कार्रवाई की जा रही है। सेना इस पूरे घटनाक्रम में अपनी कमी पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है। उसके अधिकारी अनौपचारिक तौर पर कह रहे हैं कि इन परिवारों ने नियंत्रण रेखा के समीप बाहरी चौकी में रिपोर्ट किया था। लेकिन पुलिस इस दावे का खंडन कर रही है।
इन परिवारों ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा है कि 1988 से 1996 के बीच वे पाक अधिकृत कश्मीर चले गए थे और वहीं विवाह करके बस गए थे। सूत्रों का कहना है कि नागरिक घुसपैठ का यह कोई अलग थलग मामला नहीं है। उनका दावा है कि नागरिकों द्वारा नियंत्रण रेखा से घुसपैठ करना सामान्य सी बात हो गई है। उन्होंने बताया कि 2006 में उत्तरी कश्मीर में ऐसी घटनाएं शुरु हुई थीं लेकिन पुलिस द्वारा ऐसा करने वालों के खिलाफ मामले दर्ज करने पर उन पर रोक लग गई। हालांकि, उस घटना के दो साल बाद भी केन्द्रीय गृह मंत्रालय पाक अधिकृत कश्मीर से होने वाली ऐसी परिवारिक घुसपैठ के खिलाफ कोई नीति बनाने में अभी तक असफल रहा है।

सरकार तैयार, फरवरी में होगा आर या पार

कांग्रेस नेतृत्व वाली संप्रग सरकार फरवरी में लोकसभा चुनाव की तरफ बढ़ रही है। भाजपा, वामपंथी दलों और बसपा के तीखे तेवरों और सहयोगी सपा के बदले अंदाज से कांग्रेस अक्टूबर में बुलाए गए सत्र के दौरान ही लोकसभा भंग कर नए चुनावों की घोषणा करने पर गंभीरता से मंथन कर रही है। अगर किसी तरह यह संसद सत्र चलाने में सरकार सफल भी रही तो दिसंबर में चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद भी सरकार लोकसभा चुनावों की घोषणा के लिए तैयार है।
कांग्रेस व सरकार के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के विदेश यात्रा से वापस आने तक कांग्रेस के रणनीतिकार पूरी योजना तैयार कर लेंगे। प्रधानमंत्री से विमर्श करने के बाद फाल्गुन से पहले यानी फरवरी तक चुनाव कराने की योजना पर मुहर लगा दी जाएगी। दरअसल, 17 अक्टूबर से प्रस्तावित संसद सत्र को लेकर कांग्रेस व सरकार के रणनीतिकार सांसत में हैं। आंतरिक सुरक्षा और महंगाई जैसे मुद्दों पर भाजपा सान चढ़ा ही रही है। चार साल तक सरकार को बाहर से समर्थन देते रहे वामपंथी दल भी घायल शेर की तरह कांग्रेस से हिसाब चुकता करने को मचल रहे हैं। चिर प्रतिद्वंदी सपा के साथ गई कांग्रेस से बसपा तो खार खाए बैठे ही है। ईसाइयों पर हमले, महंगाई व विदेश नीति जैसे मोर्चो पर अपने इन पूर्व सहयोगियों से निपटना संप्रग के लिए मुश्किल होगा।
सरकार के लिए इससे भी ज्यादा दिक्कत समाजवादी पार्टी के बदले अंदाज से हुई है। जिस तरह से सपा ने केंद्र व कांग्रेस पर हमला बोला है, उसके बाद सरकार अपने नए 'संकटमोचक सहयोगी' को लेकर भी सशंकित है। इस सत्र में वैसे भी सरकार के पास कोई खास काम नहीं है। भू-अधिग्रहण संशोधन जैसा संविधान संशोधन विधेयक जरूर एजेंडे पर है। इसका पारित न होना सरकार को मुश्किल में डाल सकता है।
उधर, राज्यसभा में तो भाजपा, वामपंथी दल, बसपा व दूसरे पाले में खड़ी पार्टियों के समक्ष कांग्रेस ही नहीं, बल्कि पूरा संप्रग अल्पमत में है।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ पार्टी व सरकार के शीर्ष नेताओं के साथ इन हालात पर विषद मंत्रणा हो चुकी है। कांग्रेस अक्टूबर वाला सत्र ज्यादा हंगामी होने पर लोकसभा भंग करने के लिए तैयार है। इन हालात में चुनाव आयोग को तैयारियों के लिए तीन माह चाहिए होंगे। इस तरह फरवरी तक सरकार खिंच जाएगी। वैसे भी कांग्रेस चाहती है कि यह संसद का आखिरी सत्र हो। अगर मई में चुनाव होते हैं तो उसे लेखानुदान लाना पड़ेगा। इससे वह बचना चाहती है।
दूसरी परिस्थिति में अगर सत्र चल भी जाए तो मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और जम्मू कश्मीर विधानसभाओं के चुनाव होने के बाद दिसंबर में लोकसभा भंग कर दिए जाने का विकल्प है। इसके बाद भी फरवरी तक चुनाव हो जाएंगे। दरअसल, कांग्रेस के रणनीतिकार मान रहे हैं कि तब तक परमाणु करार को मुकाम तक पहुंचाने का तमगा सरकार के पास होगा। इधर विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मध्य प्रदेश व राजस्थान से अच्छी खबर की आशा है, जो लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी व गठबंधन का उत्साह बढ़ाएगी।

मप्र में आडवाणी नहीं बिकाऊ माल

भोपाल। भाजपा ने कुछ साल पहले नारा दिया था 'सब पर भारी अटलबिहारी'। यह नारा ही अब उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी पर भारी पड़ रहा है। पार्टी के सबसे बड़े नेता आडवाणी मध्यप्रदेश में बिकाऊ माल नहीं है। उनसे ज्यादा बिक्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की हो रही है।
भाजपा प्रदेश कार्यालय के सामने लगी प्रचार सामग्री की दुकानें तो यही हकीकत उजागर कर रही हैं। इन दुकानों पर जो सामग्री है, वह सब पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी पर आधारित हैं। विधानसभा चुनाव मध्यप्रदेश में होना है इसलिए इन दुकानों पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विभिन्न मुद्रा में पोस्टर भी हैं। परंपरागत रूप से बिल्ले, बैच, गमछा, बिंदी और अन्य प्रचार सामग्री भी इन दुकानों पर है। यहां तैनात रमेश बताता है कि भाजपा में सबसे अधिक मांग अटलबिहारी वाजपेयी वाले पोस्टर, डंगलर तथा स्टीकरों की है। आडवाणी क्यों नहीं? पूछने पर वे बताते हैं कि उनकी डिमांड अभी तक नहीं आई है। आर्डर पर उनकी सामग्री भी छपवाई जा सकती है। प्रचार सामग्री का यह सच भाजपा की उन तैयारियों के उलट है, जिसमें पार्टी ने हर मतदान केंद्र तक आडवाणी का पोस्टर व कट आउट पहुंचाने के निर्देश प्रदेश इकाई को दिए हैं।
लोकसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए विधानसभा के मैदान में उतर रही भाजपा आडवाणी को वाजपेयी की तरह पार्टी का सर्वमान्य नेता साबित करना चाहती है। यही वजह है कि प्रदेश के चुनाव प्रभारी और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने अपनी कार्ययोजना में आडवाणी पर केंद्रित प्रचार सामग्री मतदान केंद्रों तक पहुंचाने का निर्देश दिया है। कार्यकर्ता महाकुंभ के दौरान उनके इस निर्देश का पालन भी हुआ। कार्यकर्ताओं को दिए गए थैले में आडवाणी का एक पोस्टर था तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर केंद्रित पुस्तक। इस थैले के एक ओर अकेले आडवाणी का चित्र बना है। दूसरी तरफ भाजपाध्यक्ष राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के चित्र छापे गए हैं। पार्टी की इतने प्रयासों के बावजूद प्रचार सामग्री बेचने वालों को आडवाणी के ग्राहक नहीं मिल रहे। शीला इंटरप्राइजेस के नारायण बताते हैं कि अभी उन्होंने अटल पर केंद्रित सामग्री के अलावा शिवराज सिंह चौहान के पोस्टर छपवाए हैं। कुछ सामग्री में अटल के साथ आडवाणी भी हैं, लेकिन केवल आडवाणी वाली सामग्री की मांग अभी तक नहीं आई है।
आडवाणी के साथ लगाना पड़े अटल के कटआउट
कार्यकर्ता महाकुंभ के दौरान भाजपा ने आडवाणी को प्रोजेक्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। महाकुंभ स्थल के चारों ओर के रास्तों पर आडवाणी, राजनाथ, शिवराज और तोमर के कट आउट लगाए गए थे। कुछ स्थानों पर इस दौरान अटलबिहारी वाजपेयी के कट आउट भी दिखे।

मां भवानी की उपासना का पर्व कल से

भोपाल। मां भवानी की उपासना का पर्व शारदेय नवरात्रि मंगलवार से शुरू हो जाएगा। इसी दिन शाम को घट पूजा के साथ शहर भर में झांकियां रंग बिरंगी रोशनी से झिलमिलाने लगेंगी। नवरात्रि शुरू होने के साथ ही सड़कों के अलावा बाजारों में भी चहल-पहल नजर आएगी। पितृपक्ष के दौरान लोग कपड़ा, आभूषण तथा वाहन आदि की खरीद से बचते रहे। नवरात्रि पर्व के शुरू हो जाने के साथ ही शुभ मुहूर्त से लोग खरीदारी फिर शुरू करेंगे। पं. अरविंद तिवारी ने बताया कि नवरात्रि में नवग्रह से संबंधित दोषों, विविध प्रकार के अशुभ योग, अरिष्ट, कालसर्प दोष, मंगलदोष, अस्त, वक्री, अशुभ स्थिति, साढ़ेसाती, ढैया, अशुभ दशाओं के दुष्प्रभावों को दूर करने की उपासना की जाती है। वहीं ग्रहों के शुभ प्रभावों में वृद्धिकारक पूजा-उपासनाएं एवं अन्य ज्योतिषीय कर्म किए जा सकते है। उन्होंने घट स्थापना के संबंध में बताया कि घट स्थापना दिन में की जाती है। उस दिन प्रात:काल स्नान करके लाल आसन पर पूर्व की ओर मुंह करके बैठना चाहिए। पूजा सामग्री जिसमें रोली, मौली, केसर, सुपारी, चावल, जौ, सुगंधित पुष्प, इलायची, लौंग, पान, सिन्दूर, दूध, दही, शहद, गंगाजल, शक्कर, शुद्ध घी, वस्त्र यज्ञोपवीत, तांबे का कलश, पंचपात्र, चौकी, कपड़ा (बिछाने हेतु) दुर्गा प्रतिमा या फोटो, नारियल, दीपक, रुई आदि से मां का श्रद्धापूर्वक पूजन करे। वहीं शहर भर में आठ सौ से भी अधिक स्थानों पर सार्वजनिक रूप से विराजी जा रही झांकियों का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में है।
बाबा अमरनाथ की गुफाएं- मां पाताल भैरवी समिति द्वारा स्थापित कोटरा स्थित झांकी में इस वर्ष बाबा अमरनाथ की गुफा के दर्शन होंगे। इसमें भगवान भोलेनाथ के सभी रूपों के दर्शन कराए जाएंगे। समिति के अध्यक्ष संतोष पांडेय व दीपक सराठे ने बताया कि झांकी में त्रिवेणी संगम का रुप भी दिखाया गया है। वहीं सर्प विशेषज्ञ सलीम द्वारा सर्पो की विशेष जानकारियां दी जाएगी। समिति के सचिव विकास शर्मा ने बताया कि झांकी में मां भवानी की छह फीट की आकर्षक प्रतिमा होगी। झांकी संपूर्ण लागत करीब सात लाख रुपए है।
हिमालय के दर्शन- न्यू मार्केट व्यापारी दुर्गा उत्सव समिति द्वारा रोशनपुरा चौराहे पर स्थापित झांकी में हिमालय के दर्शन कराए जाएंगे। इसमें हिमालय के स्वरूप में 65 फुट ऊपर से झरना बहता हुआ दिखाई देगा। मां भगवती की 15 फीट ऊंची आकर्षक प्रतिमा होगी। समिति के अध्यक्ष अजय कुदेशिया ने बताया कि झांकी की लागत करीब पांच लाख रुपए होगी।
राम दरबार के दर्शन- कोलार दुर्गा उत्सव समिति द्वारा सर्वधर्म में बनाई गई झांकी में राम दरबार के दर्शन होंगे। समिति के अध्यक्ष अमित शुक्ला व रामानंद सिंह ने बताया कि झांकी में लंका दहन भी बताया जाएगा। झांकी की लागत करीब साढ़े तीन लाख रुपए आएगी।
जबलपुर का भेड़ाघाट- जयश्री कैला मां शीतला माता सेवा समिति टीला जमालपुरा में साढ़े चार हजार वर्ग फीट में झांकी का निर्माण किया गया है। समिति अध्यक्ष संतोष शिवहरे व वरुण गुप्ता ने बताया कि झांकी में जबलपुर के भेड़ाघाट का स्वरूप बनाया गया है। झांकी में 70 फीट लंबी गुफा होगी और मां भवानी की 12 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसकी संपूर्ण लागत करीब तीन लाख रुपए होगी।
बाल स्वरूप के दर्शन- नव दुर्गा उत्सव समिति दुर्गा चौक टीन शेड में भगवान राम, श्रीकृष्ण, गणेश जी के बाल स्वरूपों के दर्शन कराए जाएंगे। समिति के अध्यक्ष अजय घोष व धीरेंद्र राजपूत ने बताया कि झांकी में माता की 10 फीट की भव्य प्रतिमा विराजित की जाएंगी। झांकी की लागत करीब साढ़े तीन लाख रुपए तक होगी।
जनकपुरी- राजधानी में सर्वप्रथम सार्वजनिक दुर्गा उत्सव के रूप में जनकपुरी में इस बार भी मां भवानी की प्रतिमा परंपरागत रुप से होगी। श्री दुर्गा उत्सव राम बारात समारोह समिति के उपाध्यक्ष अनुपम अग्रवाल ने बताया कि यहां से पंचमी पर परंपरागत राम बारात चल समारोह भी निकाला जाएगा।
पहाड़ी वाला माता का मंदिर- दुर्गा उत्सव समिति एमपी नगर में गुफाओं से होते हुए दर्शक पहाड़ों वाली माता के दर्शन करेंगे। इस बार झांकी अपनी परंपरागत जगह ज्योति टाकीज के पास न होकर बृजवासी मिष्ठान भंडार के पीछे खाली पड़ी जमीन पर बनाई गई है। इसकी लागत करीब तीन लाख रुपए है।
स्वर्ण मंदिर- दुर्गा उत्सव समिति बरखेड़ा में इस बार अमृतसर स्वर्ण मंदिर के दर्शन कराएं जाएंगे।

मंगलवार, 16 सितंबर 2008

१३ की लता का संगीत सफर और आज




हिंदी को आजादी चाहिए

भाषा कोई भी हो, वह अपनी जमीन से उपजती और पनपती है, इसलिए कोई लाख चाहे भी तो उसका रिश्ता उस जमीन से तोड़ नहीं सकता। भाषा को लेकर आज तक जितने भी विवाद हुए हैं, उसका हकीकत से कोई वास्ता नहीं रहा है। कुछ स्वार्थी तत्वों का हित-साधन उससे जरूर हो जाता है। भाषा का उससे न कुछ बनता है, न बिगड़ता है। जहां तक हिंदी की बात है, वह खुद इतनी सक्षम और सशक्त है कि अपना पालन-पोषण जीवंत तरीके से कर रही है। हर भाषा समय के साथ अपना रूप-रंग बदलती रहती है। इसका मतलब यह नहीं कि वह अपने मूल रूप से च्युत हो रही है। दरअसल उसकी आत्मा नहीं बदलती है। हिंदी को खुद खिलने और खेलने की आÊादी मिलनी चाहिए। हिंदी तो सतत प्रवाहित धारा है। धारा जरूरी नहीं कि सीधी ही चले, आड़ी-तिरछी भी चलेगी। उसे उसी रूप में बहने नहीं दिया गया, तो उसके साथ अन्याय होगा। हिंदी का विकास कभी नहीं रुका, सिर्फ जगह-जगह रूप बदल रहा है। जब मैं उत्तर भारत में था, तो मुझे लगता था कि जो हिंदी वहां बोली जा रही है, वही सही हिंदी है। जब मैं मुंबई आया तो पाया कि हिंदी तो यहां भी है, मगर उसमें कुछ टपोरीपन और मस्ती मिली हुई है। उसे ही हर कोई सुनता और बोलता है। किसी को कोई परेशानी भी नहीं होती। इसका मतलब यह नहीं कि हिंदी विकृत हो गई। हां, यह जरूर लगा कि व्याकरण यहां मजबूर हो गया है। भाषा-शुद्धि की आवश्यकता है। मगर यह शुद्धिकरण अभियान कहां-कहां चलाएंगे?
इसलिए भाषा को अपनी राह पर चलते रहने की आजादी चाहिए, जो अंतत: समृद्धि ही देगी। हमें अंग्रेजी से कुछ सीखने की जरूरत है। उसकी समृद्धि का राज सभी जानते हैं कि वह जहां गई है, वहीं की हो गई। भारत, स्पेन, रूस, ऑस्ट्रेलिया में अंग्रेजी को अलग-अलग ढंग से बोला जाता है, क्योंकि वहां की स्थानीय बोलियां उसमें शामिल हो जाती हैं। आंचलिक भाषाओं ने अंग्रेजी को इतना कुछ दे दिया है कि अंग्रेजी ऋणी हो गई है। भारत में भी लगभग सारी भाषाओं के शब्द अंग्रेजी में घुल-मिल रहे हैं।
इस मामले में हिंदी पिछड़ रही है। हिंदी के तथाकथित अलमबरदारों ने इसे अपनी ही सीमा में देखने और रखने का मानो संकल्प ले लिया है, लेकिन क्या किसी के रोके हिंदी का विकास रुक रहा है? अगर रुकना होता तो हिंदी के इतने सारे टीवी चैनल नहीं आए होते! और भी दर्जनों चैनल आने वाले हैं।
हिंदी के अखबारों के संस्करणों में लगातार वृद्धि हो रही है। पाठकों की संख्या का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है। टीवी सीरियल्स और हिंदी फिल्मों की लोकप्रियता और मांग में इजाफा ही हो रहा है। आज के जितने सफल विज्ञापन हिट हैं, वे सारे के सारे लगभग हिंदी में ही हैं। विज्ञापनों में ‘कैच लाइन’ का बहुत महत्व है, हिंदी में ज्यादा चर्चित हैं। वह चाहे ‘ठंडा मतलब..’, ‘सबका ठंडा एक..’, ‘दोबारा मत पूछना..’, ‘पीयो सर उठा के..’ हो या फिर ‘ज्यादा सफेदी..’ हो- हिंदी के सारे कैच लाइन मुहावरे की तरह प्रचलित हो रहे हैं।
¨हदीभाषियों को और भी उदार होने की जरूरत है। हृदय विशाल हो जाए, तो सीमा-रेखा अपने आप मिट जाएगी। सभी भाषाओं और बोलियों का सहयोग लेना चाहिए। अंग्रेजी के साथ भी जीने की आदत डालनी चाहिए, इसलिए मेरा मानना है कि भाषा के कपाट को कभी बंद नहीं रखना चाहिए। उसका खुला रहना सुखकर और समृद्धिकर है। कोई कैसे बोलेगा और कोई कैसे- इसे समस्या नहीं समझना चाहिए। हिंदी बोलने की आदत अगर कोई डाल रहा है तो यह अच्छी बात है।
गैर-हिंदीभाषी ही क्यों, हिंदीभाषी भी अशुद्ध बोलते हैं। इसका मतलब यह तो नहीं कि वे हिंदी को बिगाड़ रहे हैं। इसे इस तरह कहना चाहिए कि वे बोलकर भाषा को सीखने और शुद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं। यह उनकी मुख्यधारा(हिंदी) में शामिल होने की इच्छा है। गाना सबका स्वभाव होता है। कोई अच्छा गाता है और कोई बुरा। बुरा गाने वालों का लगाव गीतों से उतना ही है, जितना अच्छा गाने वालों का। फर्क इतना ही है कि किसी का सुर अच्छा लगता है और किसी का बुरा। गानों की तरह भाषा पर सबकी पकड़ एक जैसी हो, संभव नहीं है।
हिंदी के हितैषी पता नहीं क्यों, इसे लेकर इतने बचाव की मुद्रा में आ जाते हैं! हम यह क्यों नहीं मानते कि सबका बौद्धिक स्तर एक जैसा नहीं होता? कोई भाषा और व्याकरण के मामले में कमजोर होता है और कोई परिष्कृत शब्दों का इस्तेमाल करता है। इसके बावजूद दोनों में संवाद होना चाहिए। इससे दोनों में समृद्धि आएगी। जिम्मेदारी भी महसूस होगी।
हां, यह बात सही है कि आजकल फिल्मों की स्क्रिप्ट रोमन लिपि में लिखी जाती है, मगर इससे क्या फर्क पड़ता है। अंतत: पर्दे पर तो वह हिंदी ही बनकर आती है। इसे अंग्रेजीदां की जिद नहीं कह सकते। संभव है उन्हें अच्छी हिंदी बोलनी आती हो, मगर पढ़नी नहीं। सीधे हिंदी पढ़ने के बाद जो भाव आता है, संभव है वह रोमन से नहीं आता हो, मगर यह काम निर्देशक का है कि संवाद के अनुसार एक्सप्रेशन या इमोशन कैसे लाया जाए!
जहां तक फिल्म, टीवी, एड मीडिया में अंग्रेजी स्कूलों से पढ़े लोगों के आने की बात है, इसमें हिंदी को खुश होना चाहिए कि उन्हें हिंदी ही आश्रय दे रही है। वे अंग्रेजी में भले योजना बनाते हों, स्क्रिप्ट भी अंग्रेजी में मांगते हों, सेट पर पूरा माहौल अंग्रेजीनुमा हो, मगर कलाकारों को जब डायलॉग बोलने की बारी आएगी तो क्या बोलेंगे?
वैश्वीकरण के बाद हिंदी का भी विस्तार हो रहा है। हिंदी फिल्में विदेशों में भी धूम मचा रही हैं। इसे सिर्फ भारतीय या भारत के गैर-हिंदीभाषी ही नहीं देखते हैं, बल्कि विदेशी भी देखते और समझने की कोशिश करते हैं। अगर आज की भाषा में कहूं तो हिंदी एक बड़ा बाजार बन गया है। विदेशी भी हिंदी में काम करना चाह रहे हैं। भले उनके डायलॉग डब किए जाएं, मगर हिंदी की सत्ता को वे स्वीकार तो कर ही रहे हैं।
हिंदी की अपनी भाव-भूमि है। उसके अपने शब्दों में क्षेत्र, जमीन, मौसम, संवेदना और भावना का असर होता है। ‘तारे जमीं पर’ में ‘मां..’ वाला गाना भारतीय जमीन और मानसिकता का प्रतिबिंब है। उसका अनुवाद अगर विदेशी भाषा में होगा तो वह असर नहीं पैदा होगा, क्योंकि वहां की संस्कृति में ‘मां’ का क्या स्थान है, ठीक-ठीक पता नहीं है।
यह निश्चित है कि मां का जो दर्जा यहां है, वैसा कहीं नहीं है। इसलिए मैं मानता हूं कि हिंदी की भाषा जितनी समृद्ध है, उतने ही विचार भी परिपक्व हैं। हिंदी को रोकना संभव नहीं है, मगर हमारी जिम्मेदारी है कि हम हिंदी को खिलने की आजादी दें।

नई जल योजना की नई बातें

बाढ़ की तबाही से जल प्रबंधन फिर एक बार सुर्खियों में है, मगर एक और तरह की जल चिंता हाल में स्वीडन की राजधानी स्टाकहोम में ‘विश्व जल सप्ताह’ में व्यक्त की गई थी और उसमें आशंका व्यक्त की गई कि यदि इस अति-महत्वपूर्ण संसाधन के दुरुपयोग को नहीं रोका गया, तो धरती की बढ़ती आबादी के लिए भोजन और पेयजल की समस्या का समाधान खोजना मुश्किल होगा।
इस आशय का रहस्योद्घाटन हुआ कि विश्व की खाद्य सामग्री का 50 प्रतिशत हिस्सा बर्बाद हो जाता है, अत: इसके उत्पादन में जो पानी का इस्तेमाल होता है, वह प्रतिवर्ष बेकार जाता है। यदि खाद्य सामग्री की बर्बादी कम से कम 50 प्रतिशत नहीं रोकी गई तो विचारकों की राय में 2025 तक भोजन और पेयजल की भारी समस्या खड़ी होगी। कुवैत जहां पानी मुफ्त मिलता है, प्रति व्यक्ति 600 लीटर पानी प्रतिदिन वहां इस्तेमाल होता है।
इसके विपरीत स्वीडन में, जहां पानी के लिए कीमत देनी पड़ती है, वहां लोग 150 लीटर प्रतिदिन से ही काम चलाते हैं। इसका मतलब है कि पानी की समस्या का समाधन तलाशना है तो इसके उपयोग के लिए उचित मूल्यनीति अख्तियार करनी चाहिए। लोगों को पानी के पर्यावरणीय महत्व का ज्ञान भी कराना आवश्यक है। इस आशय का प्रचार होना चाहिए कि पानी एक मूल्यवान व सीमित संसाधन है, जिसका इस्तेमाल संभलकर करने की जरूरत है।
भारत को स्टाकहोम पानी सम्मेलन के संवाद से सबक लेना जरूरी है। भारत ने अभी तक पानी की समस्या पर गहराई से विचार नहीं किया है। सीमित पानी के स्टॉक के उपयोग के लिए न तो कोई योजना बनाई है और न ही लाभकारी इस्तेमाल का आचरण अख्तियार किया है। पहला, भारत में जलभंडार सीमित है, दुनिया में नदियों के पानी का सिर्फ ४ प्रतिशत पानी ही भारत में उपलब्ध है। यहां पानी मानसून पर निर्भर करता है, जिसका चरित्र स्थायी नहीं है। कभी बाढ़ तो कभी सूखे से गुजरना पड़ता है।
अधिकांश वष्र साल में 100 घंटे होती है। अत: इसके लिए गहन योजना आवश्यक है। दूसरा, भारत कृषिप्रधान देश है। अनुभव बताता है कि गरीबी से निपटने के लिए कृषि विकास की प्रधानता आने वाले दिनों में भी रहेगी। पहली हरित क्रांति की सफलता पानी की उपलब्धता के कारण हुई। दूसरी प्रस्तावित हरित क्रांति की सफलता भी पानी पर ही निर्भर करेगी। तीसरा, आर्थिक सोच में भी बदलाव आया है। पानी प्रकृति प्रदत्त है, लेकिन सीमित उपलब्धता और इसके लगातार दूषित होने के कारण मुफ्त और मनमाने तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। आठवीं योजना के दौरान पानी को आर्थिक संसाधन की मान्यता दी गई है।
दुनिया के स्तर पर पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है। विचारकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में पानी को लेकर ही विश्व में तनाव होने वाला है। भारत में पानी को लेकर कई स्तरों पर संघर्ष चल रहा है। कई राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर संघर्ष है। न तो केंद्र सरकार और न ही न्यायालय राज्यों के आपसी द्वंद्व को सुलझाने में कामयाब हुए हैं। इसी तरह विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर सामंजस्य स्थापित करने की समस्या खड़ी हुई है।
भारत में 1990 में ८३ प्रतिशत पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए होता था। 2025 में यद्यपि कृषि के विकास के लिए अधिक पानी की जरूरत होगी, सिंचाई के लिए पानी का अनुपात घटकर ७५ प्रतिशत हो जाएगा। इसी तरह घरेलू उपयोग में भी अधिक पानी मुहैया कराने की जरूरत पड़ेगी। शहरों के विकास के कारण भारत की नदियों का पानी दूषित हो रहा है। ‘स्वजल धारा’ योजना के तहत घरेलू इस्तेमाल के लिए पानी की योजना लागू की गई है, लेकिन राजस्थान के स्वजल धारा के मूल्यांकन के निष्कर्ष से पता चला है कि कमजोर तबके के लोगों को स्वजल धारा के तहत पानी नहीं मिल पाता है। पिछले वर्षो में जमीन से पानी निकालने की सुविधा के कारण पानी का स्तर लगातार कम होता जा रहा है।
‘जल ही जीवन है’ की कहावत को यदि सरजमीं पर उतारना है तो पानी के कई पक्षों पर गहराई से विचार कर नीति निर्धारित करनी होगी। देश का तेज विकास हो रहा है। अनुमान है कि 2025 में 350 मीट्रिक टन अनाज की जरूरत होगी। देहातों में भी शुद्ध जल की आवश्यकता बढ़ जाएगी, क्योंकि जल प्रदूषण की रफ्तार तेज है। उद्योगों को भी अधिक पानी चाहिए। ‘डबलीन-सिद्धांत’ यह प्रतिपादित करता है कि ‘पानी का इसके सभी तरह के इस्तेमालों में आर्थिक महत्व है और इसे आर्थिक वस्तु की मान्यता मिल जानी चाहिए।’
इस सिद्धांत ने उस परंपरागत मान्यता को समाप्त कर दिया है, जिसमें यह माना गया था कि पानी प्रकृति का मुफ्त का उपहार है और इसलिए इसे पाने का सभी को मानवीय अधिकार है।
‘राष्ट्रीय जल नीति’ (2002) की स्पष्ट धारणा है कि ‘जल संसाधन के विभिन्न उपयोगों के प्रबंधन में सहभागी नीति अख्तियार करनी चाहिए। इसके लिए केवल सरकारी महकमों को नहीं, बल्कि उपभोक्ता और इससे जुड़े दूसरे लोगों को योजना, डिजाइन और प्रबंधन में प्रभावकारी और निर्णायक ढंग से सम्मिलित करना चाहिए।’
प्रबंधन की नई सोच के मुताबिक सरकार के नियंत्रण को कम करना जरूरी है और उसके स्थान पर उपभोक्ताओं को अधिकार दिया जाए कि वे स्वयं दूसरा इंतजाम करें। केंद्र सरकार द्वारा ‘साझेदार सिंचाई प्रबंधन’ के लिए एक एक्ट भी प्रस्तावित है, जिसे दस राज्यों ने लागू किया है। इसमें ‘वाटर यूजर एसोसिएशन’ पर अधिक जोर दिया गया है। स्वामीनाथन कमेटी की राय है कि इस नीति के तहत गरीब किसानों को भी निर्णायक मंडल में शामिल किया जाना चाहिए।
उम्मीद की जाती है कि जब उपभोक्ता के हाथ में उपलब्ध पानी के व्यवस्था की जवाबदेही होगी, तो पानी की बर्बादी रुकेगी और वितरण उचित होगा, लेकिन व्यवहार में कई खामियां नजर आ रही हैं। खबर है कि राजनीतिक दखलंदाजी से इसका काम प्रभावित होता है। हर हालत में जवाबदेह उपभोक्ता की (चाहे वह किसान हो या स्वजल धारा का सदस्य) नितांत जरूरत है, जिसके लिए जनचेतना अभियान चलाना चाहिए।

111 कांग्रेसी टिकटों पर विचार

भोपाल. विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर नई दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस चुनाव समिति ने राज्य की 230 में से 111 सीटों पर विचार किया। इनमें 41 मौजूदा विधायकों की सीटें भी शामिल हैं।
प्रदेश की बाकी 119 सीटों पर विचार करने के लिए 22 सितंबर को दिल्ली में फिर बैठक होगी। दो चरणों में चली समिति की मैराथन बैठक में उन आधा दर्जन मौजूदा विधायकों को दोबारा टिकट देने के बारे में सहमति नहीं बन पाई, जिनके क्षेत्र परिसीमन में समाप्त या आरक्षित हो गए हैं।
हालांकि अधिकांश कद्दावर नेताओं को टिकट मिलना लगभग तय है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री निवास तिवारी को इस मर्तबा सिरमौर से टिकट दिए जाने की संभावना है। परिसीमन में उनकी परंपरागत सीट मनगंवा आरक्षित हो गई है।

कांग्रेस से नाराज हैं 45 फीसदी मुसलमान

प्रदेश कांग्रेस के लिए खबर बुरी है कि उसका परंपरागत मुस्लिम वोट बैंक उससे छिटक रहा है। एक सर्वे में खुलासा हुआ कि प्रदेश के 45 फीसदी मुसलमान कांग्रेस के खिलाफ हैं। यह खुलेआम दूसरी पार्टी में वोट करने की बात कर रहे हैं। कांग्रेस के ही अल्पसंख्यक विभाग द्वारा कराया गया यह सर्वे प्रदेश कांग्रेस की चिंता बढ़ाने वाला है। विभाग ने सर्वे रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को भी भेज दी है। साथ ही कहा है कि उन्हें इस पर यकीन न हो तो दिल्ली से किसी भी एजेंसी से सर्वे करा सकती हैं।
सूत्र बताते हैं कि मध्यप्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग ने पूरे प्रदेश में एक सर्वे कराया है। इस सर्वे में अल्पसंख्यकों से जानने की कोशिश की गई कि वे किस पार्टी को वोट देना चाहते हैं। जब सर्वे रिपोर्ट आई तो विभाग ही चौंक गया। इसमें 45 फीसदी मुसलमानों ने कांग्रेस को मौका परस्त करार देते हुए वोट नहीं देने की बात की। जबकि 55 फीसदी देखो और इंतजार करो की स्थिति में रहे। सर्वे में कांग्रेस को वोट नहीं देने के संबंध में पूछे गए सवाल में अधिकांश लोगों ने कहा कि उन पर जब अत्याचार हुए तो कांग्रेस ने साथ नहीं दिया। प्रदेश में उनके नेताओं की संख्या लगातार घटती गई। जहां पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के दौर में 16-16 लोगों को कांग्रेस ने टिकट दिया वहीं अब इनकी संख्या नाम मात्र रह गई है। आलम यह है कि विधानसभा में अब कांग्रेस में मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व नगण्य है। सर्वे में यह बात भी आई कि अब कांग्रेसी नेता मुस्लिम समुदाय के हित में जोरदार ढंग से बात नहीं करते हैं। इस कारण उनका रुझान समाजवादी पार्टी की तरफ ज्यादा हुआ है। इसके बाद उनकी दूसरी पसंदीदा पार्टी बसपा है। सर्वे में कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई है। सूत्र बताते हैं कि अल्पसंख्यक भाजपा को वोट नहीं देना चाहते हैं इस कारण कांग्रेस से नाराजगी का फायदा सपा और बसपा को मिल सकता है। कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग ने सर्वे रिपोर्ट अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को फैक्स कर दी है। इसमें विभाग की कार्यकारिणी भंग किए जाने और चार महीना बीत जाने के बावजूद नई कार्यकारिणी गठित नहीं किए जाने की भी शिकायत की गई है। इसमें विभाग के अध्यक्ष को भी निष्क्रय बताया गया है। साथ ही मुस्लिम समुदाय को वापस कांग्रेस से जोड़ने के सुझाव भी सुझाए गए हैं।

एलियन ग्रह की तस्वीरें मिलीं

न्यूयार्क। खगोलविदें ने सूर्य से मिलते-जुलते एक तारे का चक्कर लगाने वाले ग्रह एलियन की तस्वीरें मिलने का दावा किया है।
टोरंटो विश्वविद्यालय के एक दल ने हवाई के जेमिनी नार्थ दूरबीन से बृहस्पति से आठ गुना बड़े, दस गुना अधिक गर्म और कम से कम 30 हजार गुना ज्यादा चमकीले ग्रह का पता लगाया है। यह ग्रह आरएक्सएस जे 16029 1-210524 नामक तारे के करीब पाया गया है। यह तारा सूर्य से 85 फीसदी अधिक भारी, लेकिन उम्र में उससे 0.1 फीसदी से भी कम है। इसकी संभावित आयु 50 लाख वर्ष है। न्यू साइंटिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार दोनों पृथ्वी से पांच सौ प्रकाश वर्ष दूर हैं।
खगोलविदें के अनुसार नया संभावित ग्रह अपने तारे के परिक्रमा पथ पर करीब 330 एस्ट्रोनोमिकल इकाई की दूरी पर चक्कर काटता है। हमारे सौर परिवार में सबसे अधिक दूरी पर स्थित ग्रह नेप्च्यून है, जो सूर्य से लगभग 30 एस्ट्रोनोमिकल इकाई की दूरी पर है। दल के सदस्य रे जयव‌र्द्धन ने कहा कि यह खोज इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि सूर्य की तरह तारों के ग्रहों के निर्माण में एक से अधिक तरीके काम करते हैं।

मुख्यमंत्री ने की तैयारियों की समीक्षा

भोपाल। भाजपा कार्यकर्ता महाकुंभ को वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी तथा पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस संबंध में पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों से चर्चा की। साथ ही महाकुंभ स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के अलावा पार्टी के चुनाव प्रभारी अनिल माधव दवे के अलावा भोपाल संभागायुक्त डॉ. पुखराज मारू, आईजी डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्तव, डीआईजी अशोक अवस्थी सहित कई अधिकारी मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक देश में हो रहीं आतंकवादी घटनाओं को देखते हुए आला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। राजधानी के जंबूरी मैदान में 25 सितंबर को होने वाले इस महाकुंभ में दो लाख से अधिक कार्यकर्ताओं को लाने का लक्ष्य रखा गया है। तैयारियों का जायजा: बैठक के श्री दवे ने जंबूरी स्थित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण भी किया। वहां बन रहे पंडाल के अलावा कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और सुविधा के संबंध में की जा रहीं तैयारियों की समीक्षा भी उन्होंने की। इस मौके पर भाजपा जिला इकाई के पदाधिकारी भी मौजूद थे।

रविवार, 14 सितंबर 2008

जया बच्चन से अतिक्रमण तोड़ने का खर्च नहीं वसूल सका बीएमसी

भोपाल। लोकायुक्त के फरमान भी नगर निगम में गंभीरता से नहीं लिए जाते। मात्र औपचारिकता निभाकर छोड़ दिया जाता है। असंल अपार्टमेंट में सपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री जया बच्चन समेत 18 फ्लैट मालिकों को अवैध निर्माण तोड़ने का खर्चा वसूलने के लिए नगर निगम ने नोटिस थमाया था। लेकिन साल भर बाद भी निगम प्रशासन वसूली नहीं कर सका।
असंल अपार्टमेंट के भूतल के फ्लैटों में अतिक्रमण कर खुली भूमि पर कब्जा करने के मामले की लोकायुक्त में शिकायत हुई थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए लोकायुक्त ने अतिक्रमण हटाने की पिछले साल जून में कार्रवाई की थी। इस दौरान फिल्म अभिनेत्री जया बच्चन सहित 18 भवन स्वामियों के 26 फ्लैटों के सामने से निगम की भवन अनुज्ञा शाखा के इंजीनियरों और अतिक्रमण विरोधी दस्ते ने जेसीबी मशीन की मदद से फैंसिंग और पक्के निर्माण को तोड़ दिया था। इसके बाद इस मामले की लोकायुक्त में सुनवाई के दौरान निगम प्रशासन से पूछा गया कि दुबारा अतिक्रमण न हो इसके लिए क्या किया जा रहा है। निगम प्रशासन ने बताया कि असंल अपार्टमेंट के अतिक्रमणकारियों से निगम अमले द्वारा अवैध निर्माण तोड़ने पर आए खर्च की वसूली के लिए नोटिस थमाए जाएंगे। निगम की भवन अनुज्ञा शाखा ने जया बच्चन समेत सभी फ्लैट मालिकों को कुल 56,920 रुपए की वसूली का नोटिस थमाया था। इस नोटिस में अवैध निर्माण तोड़ने पर आए खर्च की राशि सात दिन की अवधि में जमा करने की हिदायत दी गई थी। बावजूद इसके किसी भी अतिक्रमणकारी ने साल भर बाद भी राशि जमा नहीं कराई है।
किससे कितनी राशि की होना है वसूली
फ्लैट मालिक फ्लैट नंबर राशि
जया बच्चन एच-101, 102 2800रु.
पीएस चावला ओ-102,103 4250रु
जसवीर कौर,
सतवंत सिंह,
राजीव कुमार पी-101,102,103- 21120रु
ताहिरा खान एन-101,103 4250रु
रणवीर सिंह एन-102 2125रु
कैलाश अग्रवाल के-102,103 2000रु
सीमा गुप्ता के-101 1400रु
राजेश नागू जे-102,103 4250रु
कुसुम बाजपेयी जी-103 2125रु
एसएन शर्मा क्यू-101,102 2800रु
प्रदीप पाटनी ओ-101 1400 रु
सलीम डी-101 1400रु
यावर रसीद डी-103 1400रु
श्री मनीष जी-101 2800रु
श्री हरविंदर बी-101 1400रु
श्री सिन्हा ए-102 1400 रु
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कुल राशि 59,920 रु.

सूबे में पांव जमाने की कोशिश में बसपा

Sep 06, 01:05 am
इंदौर। मध्य प्रदेश में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए बहुजन समाज पार्टी ने मध्य प्रदेश में पैर जमाने की मुहिम तेज कर दी है। पार्टी इसी कड़ी में उज्जैन में सात सितंबर को भाईचारा सम्मेलन का आयोजन कर रही है।
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष नर्बदा प्रसाद अहिरवार ने बताया कि प्रदेश की भाजपा सरकार सड़क, बिजली और पानी समेत सारे मोर्चो पर नाकाम रही है। हम भाईचारा सम्मेलन में जनता को सरकार की असलियत से रूबरू करायेंगे। इसमें समतामूलक समाज की स्थापना के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर भी चर्चा की जाएगी।
अहिरवार ने दावा किया कि प्रदेश की जनता कांग्रेस और भाजपा से तंग आ चुकी है और आशा भरी नजरों से किसी तीसरे विकल्प की ओर देख रही है। उन्होंने कहा कि धार्मिक नगरी उज्जैन में सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के नारे के साथ आयोजित होने वाले भाईचारा सम्मेलन में उत्तर प्रदेश की बसपा सरकार के कई मंत्री शामिल होंगे।
गौरतलब है कि बसपा का प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके की कुछ सीटों पर प्रभाव दिखता रहा है। उज्जैन में होने वाले भाईचारा सम्मेलन को मालवा अंचल में पार्टी की जड़ें फैलाने के अभियान से जोड़ कर देखा जा रहा है।

मनोरंजन : रंगमंच कलाकारों का दर्जा सिनेमा कलाकार से ऊंचा: अमिताभ

कोलकाता। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के अनुसार एक फिल्म अभिनेता के लिए परदे पर खुद को रंगमंच कलाकार के रूप में पेश करना बेहद कठिन होता है। निर्माता ऋतुपर्णो घोष की शुक्रवार को रिलीज हुई फिल्म द लास्ट लियर में बच्चन महान नाटककार विलियम शेक्सपीयर के जबरदस्त प्रशंसक एक रंगमंच कलाकार के किरदार में दिखे हैं।
फिल्म के विशेष प्रदर्शन के मौके पर कोलकाता पहुंचे बच्चन ने कहा कि एक रंगमंच कलाकार की कला सिनेमा कलाकार से बढ़कर होती है। मैंने जिस रंगमंच कलाकार, हरीश मिश्रा का चरित्र परदे पर निभाया है, उसके अंदर इस बात का अहम है। रंगमंच के कलाकारों की तरह बातचीत के दौरान मिश्रा अपने हाथ चलाते रहते हैं। बच्चन ने माना कि हैरी के चरित्र को निभाने के लिए उन्हें बेहद मेहनत करनी पड़ी। वे कहते हैं कि हरीश उर्फ हैरी के चरित्र में खुद को ढालने के लिए घोष ने मुझे इतना गृहकार्य दे दिया था कि मुझे स्कूल के दिनों की याद आ गई थी। उन्होंने मुझे शेक्सपीयर के नाटक पढ़ने को दिए और विश्वभर में आयोजित उनके नाटकों की डीवीडी देखने को भी दी। उन्होंने मेरी मेज किताबों से भर दी थी। सेट पर भी वे मुझसे चर्चा करते रहते थे, ताकि मैं हैरी के चरित्र में ही रहूं।
उनके अनुसार हैरी के चरित्र का अकेलापन और सांसारिक विषय ही इस फिल्म की विशेषता है। यह एक मजबूत भावनात्मक फिल्म है जिसे देखकर लोग हंसेंगे भी और रोएंगे भी। उत्पल दत्त के बंगाली नाटक आजकेर शाहजहां पर आधारित इस फिल्म में प्रीति जिंटा और अर्जुन रामपाल ने भी अभिनय किया है। अपनी पहली फिल्म सात हिंदुस्तानी में बच्चन ने दत्त के साथ अभिनय किया था। साथ ही, उनकी बांग्ला फिल्म भुवन शोम के लिए अपनी आवाज भी दी थी।

मल्लिका का टूटता तिलिस्म!


मल्लिका शेरावत जब अपनी बातें खुलेआम सबके सामने रखती थीं, तब भी उनकी आलोचना होती थी और अब, जब उन्होंने अपना मुंह बंद कर काम पर ध्यान देना शुरू किया है, तब भी उनके हाथ कुछ खास नहीं आ रहा है। फिल्मी दुनिया में मल्लिका के करियर को डूबती नैया माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि समय के साथ उनके आकर्षण का तिलिस्म भी टूट रहा है। सच तो यह है कि अपनी मादक अदाओं के भरोसे दर्शकों का दिल जीतने की आशा भी अब उनके लिए निराशा में बदल रही है। प्यार के साइड इफेक्ट्स की सफलता को आधार बनाकर ही मल्लिका ने अगली और पगली और मान गए मुगल-ए-आजम जैसी रोमांटिक कॉमेडी फिल्में कीं, लेकिन इन फिल्मों को स्वीकारने का निर्णय अंतत: उनके फिल्मी करियर के लिए घातक साबित हुआ। लगातार रिलीज हुई ये फिल्में असफल रहीं और उसका परिणाम यह हुआ कि फिल्म इंडस्ट्री की इस मल्लिका की कुर्सी हिलने लगी।
दरअसल, हिंदी फिल्मों में लगातार मिल रही असफलता की वजह से मल्लिका ने अब हॉलीवुड की ओर ध्यान देना शुरू कर दिया है। यदि उनकी आने वाली फिल्मों की ओर नजर डालें, तो फिलहाल उनके पास हिंदी की एकमात्र फिल्म है फौज में मौज, जबकि हॉलीवुड की दो फिल्में हैं। जहां अनवील्ड में वे योगिनी की भूमिका निभा रही हैं, वहीं हॉलीवुड की मशहूर निर्देशक जेनिफर लींक की फिल्म में वे नागिन बनी हैं। यदि ये फिल्में भी नहीं चलीं, तो मल्लिका न घर की रहेंगी और न घाट की!

नैनोटेक्नोलोजी पर बातचीत विफल

कोलकाता राजनीतिक कार्यकर्ता विरोध एक कार संयंत्र का निर्माण करने के लिए टाटा मोटर्स ' अति नैनोटेक्नोलोजी कार सस्ते ताजा विरोध की धमकी के बाद शनिवार को सरकार के साथ बातचीत विफल रहे गतिरोध को तोड़ने का एक अधिकारी ने कहा . टाटा मोटर्स के कारखाने में काम स्थगित कर दिया पश्चिम बंगाल में है और इससे पहले इस महीने की धमकी को देखने के लिए वैकल्पिक स्थलों के बाद स्थानीय किसानों का समर्थन अवरुद्ध सड़कों के प्रमुख विपक्षी दल के कार्यकर्ताओं की धमकी और संयंत्र है . इस परियोजना से राज्य में नैनो की गई है mired में एक पंक्ति के बाद से देश की नाक snub , 2300 डॉलर की कार में अनावरण किया गया था मेढक के प्रचार जनवरी में . अनिच्छुक किसानों को उनकी भूमि की मांग की थी 300 एकड़ खेत फैक्टरी से जटिल है . सरकार का कहना है कि 70 एकड़ से अधिक वापस जा सकते हैं ( 28 हेक्टेयर ) और मुआवजा देकर किसानों के लिए ज्यादा पैसा है , लेकिन उनके पास इस प्रस्ताव से इनकार कर दिया . " सरकार मुआवजा पैकेज का वादा किया था वह नहीं है जो हम से , " ममता बनर्जी ने कहा , तृणमूल कांग्रेस की नेता है , जो विरोध प्रदर्शन की अगुआई की . " हम अपनी घोषणा के बाद अगले कदम में एक रैली के निकट फैक्टरी पर 16 सितम्बर है . " टाटा मोटर्स ने कहा कि वे टिप्पणी करने के इच्छुक नहीं थे इस समय है . इस टकराव का खतरा कम उत्पादन क्षमता की संभावना नहीं है लेकिन देरी करने के लिए अक्टूबर के प्रक्षेपण की योजना बनाई है नैनो , बिल के रूप में दुनिया की सस्ती कार , कुछ इकाइयों के रूप में आ सकता है नैनो से मौजूदा पौधों . यह एक बड़ी प्रतिबिंबित नैनोटेक्नोलॉजी विरोध के बीच गतिरोध उद्योग और किसानों के अनिच्छुक देने के लिए देश में एक ऐसे देश में जहां तक दो तिहाई आबादी कृषि पर निर्भर करते हैं . राजनीतिकरण की किसानों के रोष ने आगे की जटिल मुद्दा है . नैनोटेक्नोलॉजी की फैक्टरी की जा रही थीं और उसकी सहायक इकाइयों के निर्माण पर लगभग 1000 एकड़ ( 400 हेक्टेयर ) भूमि है . लगभग 400 एकड़ ( 160 हेक्टेयर ) , सहायक इकाइयों के लिए रखी है , के अंतर्गत विवाद है . टाटा मोटर्स की सहायक इकाइयों से अलग कहते हैं मुख्य संयंत्र को इस परियोजना की लागत के हिसाब से परेशान है , और किसी भी परिवर्तन के मूल व्यवस्था में अस्वीकार्य है .

एकजुट रहे दिल्ली के लोग

नई दिल्ली , 13 सितम्बर गृह मंत्री शिवराज पाटिल आज की रात की चेतावनी दी " कड़ी से कड़ी सजा दी " श्रृंखलाबद्ध विस्फोटों के पीछे उन लोगों को देश की राजधानी में लोगों को एकजुट करने की अपील की है और उनके नापाक इरादों विफल . पाटिल , जो स्थिति की समीक्षा की विस्फोटों के तुरंत बाद दावा किया है जो जीवन के कई ने कहा , समय की मांग थी कि उनके का उद्देश्य यह सुनिश्चित करने के लिए सफल नहीं हुए और इस स्थिति बिगड़ना करने की अनुमति नहीं थी . उन्होंने लोगों से अपील की जाँच करने के लिए अफवाह mongering और साहस के साथ काम नहीं किया गया है ताकि सामाजिक सौहार्द अशांत है . विस्फोटों की निंदा करते हुए , उन्होंने के साथ सहानुभूति व्यक्त की हत्या के परिवारों के लोगों के लिए प्रार्थना की और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ है . दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की समीक्षा बैठक में उपस्थित थे .

न्यूज़ : प्रदेश में आचार संहिता ३अक्टूबर से

प्रदेश में आचार संहिता २० से , आधी अधूरी योजनाए से भाजपा शुरू करेगी चुनावी विगुल, कमजोर कांग्रेस नेता उठायेंगे फायदा

शनिवार, 13 सितंबर 2008

reportersaurabh

laxman jhula

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रात्रि के समय लेक व्यू का फोटो

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शिव फोटो हरीदार

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घास पर बने गणेश

जल्द आ रहे है ,

आपके बारे में जानकारी लेकर जल्द आ रहे है हम सोमवार से पढ़े न्यूज़ के साथ मीडिया की खबरे